अल-क़द्र · 4/5
अनुवाद उच्चारण — अल-क़द्र
تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ ۝٤
Tanaz zalul malaa-ikatu war roohu feeha bi izni-rab bihim min kulli amr
📖 हिंदी अर्थ
इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَنَزَّلُ: उतरती हैं, अवतरित होती हैं।
  • الْمَلَائِكَةُ: फ़रिश्ते।
  • وَالرُّوحُ: यानी जिब्रील अलैहिस्सलाम।
  • بِإِذْنِ رَبِّهِم: अपने रब की आज्ञा से।
  • مِّن كُلِّ أَمْرٍ: हर उस मामले के साथ जो उस साल में निर्धारित किया गया है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि लैलतुल क़द्र (शब-ए-क़द्र) की रात को फ़रिश्ते और जिब्रील अलैहिस्सलाम बड़ी संख्या में उतरते हैं। यह उतरना उनके रब की आज्ञा से होता है, और वे उस रात हर उस मामले को लेकर उतरते हैं जो अल्लाह ने उस साल के लिए तय किया है — चाहे वह रिज़्क़ (आजीविका) हो, मौत हो, जन्म हो, या कोई और तक़दीर का फ़ैसला हो। यानी उस रात अल्लाह तआला अपने फ़रिश्तों को हुक्म देता है कि वे उतरें और उस साल के सभी मामलों को लिखें और अंजाम दें।

यह रात कितनी बड़ी और मुबारक है कि आसमानों के फ़रिश्ते, जो हमेशा अल्लाह की इबादत में मशग़ूल रहते हैं, वे भी उस रात ज़मीन की तरफ़ उतरते हैं। और सबसे अफ़ज़ल फ़रिश्ता जिब्रील अलैहिस्सलाम, जो वही (प्रकाशना) लाने वाले हैं, वह भी उस रात उतरते हैं। यह उतरना अल्लाह की इजाज़त से होता है, क्योंकि कोई भी उसकी इजाज़त के बिना कुछ नहीं कर सकता।

इस आयत से हमें यह समझने को मिलता है कि लैलतुल क़द्र की रात अल्लाह के करीब होने का, उससे दुआ माँगने का और इबादत करने का बेहतरीन मौक़ा है। जब फ़रिश्ते उस रात ज़मीन पर उतरते हैं, तो वे मोमिनों के लिए दुआएँ करते हैं, उनके लिए रहमत और बरकत की दुआ माँगते हैं। यह रात हमारे लिए एक बेशक़ीमती तोहफ़ा है — अगर हम इसे इबादत में गुज़ारें, तो हमारे गुनाह माफ़ हो सकते हैं और हमारी तक़दीर में भलाई लिखी जा सकती है।

प्यारे मुसलमान भाइयों और बहनों! यह रात साल में सिर्फ़ एक बार आती है। अल्लाह ने इसे हज़ार महीनों से बेहतर बनाया है। इस रात की इबादत का सवाब 83 साल से ज़्यादा की इबादत के बराबर है। तो आइए, हम इस रात को ग़फ़लत में न गुज़ारें, बल्कि नमाज़, क़ुरआन की तिलावत, ज़िक्र और दुआ में बिताएँ। अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी माँगें, अपने माता-पिता, भाई-बहनों और पूरी उम्मत के लिए दुआ करें। यह रात हमारे लिए जन्नत का दरवाज़ा खोलने का ज़रिया बन सकती है — अगर हम इसे समझकर इस्तेमाल करें। अल्लाह हम सबको इस रात की बरकतें नसीब फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 2-5 — अल-क़द्र

2وَمَا أَدْرَاكَ مَا لَيْلَةُ الْقَدْرِ
और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है
3لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ
शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है
4تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ
इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं
5سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ
ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है
अल-क़द्रकुरान सूची
5आयत
मक्कीRevelation
4आयत

अनुवाद — अल-क़द्र 4

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Wednesday, August 19, 2026

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