अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِيَّاكَ (इय्याक): केवल आपको, सिर्फ आपको।
- نَعْبُدُ (ना'बुदु): हम इबादत करते हैं, हम आज्ञा का पालन करते हैं।
- نَسْتَعِينُ (नस्तईन): हम मदद माँगते हैं, हम सहायता चाहते हैं।
विस्तृत व्याख्या:
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को सिखाता है कि वे किस तरह उससे बात करें और किस तरह उसके सामने अपनी आज्ञाकारिता और लाचारी का इज़हार करें। इस आयत का अर्थ है: "हे अल्लाह! हम केवल तेरी ही इबादत करते हैं, और हम केवल तुझी से मदद माँगते हैं।"
इसमें "केवल" शब्द पर विशेष ज़ोर दिया गया है, जिसका मतलब है कि इबादत (पूजा, बंदगी) किसी और की नहीं, सिर्फ अल्लाह की होनी चाहिए। चाहे वह दुआ हो, मदद माँगना हो, क़ुर्बानी देना हो, या कोई और इबादत — यह सब सिर्फ अल्लाह के लिए होना चाहिए। इसी तरह, मदद और सहायता भी सिर्फ अल्लाह से माँगी जानी चाहिए, क्योंकि सारा अधिकार और ताकत उसी के हाथ में है। वही सब कुछ कर सकता है, और उसके बिना कोई किसी की मदद नहीं कर सकता।
इस आयत में इबादत का ज़िक्र पहले किया गया और मदद माँगने का बाद में। इसका कारण यह है कि पहले बंदे को अपनी बंदगी और आज्ञाकारिता पेश करनी चाहिए, फिर अल्लाह से मदद की दरख्वास्त करनी चाहिए। यह भी सिखाया गया है कि इबादत के लिए भी अल्लाह की मदद ज़रूरी है, क्योंकि इंसान अपने दम पर सही इबादत नहीं कर सकता।
इस आयत में बंदे के दिल को बीमारियों से पाक करने का नुस्खा भी है। जब इंसान यह कहता है कि "मैं सिर्फ तेरी इबादत करता हूँ," तो उसके दिल से दिखावे (रिया), घमंड और अभिमान की बीमारियाँ दूर होती हैं। और जब वह कहता है "मैं सिर्फ तुझसे मदद माँगता हूँ," तो उसके दिल से अल्लाह के अलावा किसी और से उम्मीद लगाने की बीमारी खत्म होती है।
फ़ायदे और सीख:
- इंसान को अपनी सारी इबादतें सिर्फ अल्लाह के लिए करनी चाहिए, किसी और के लिए नहीं।
- मुसीबतों और ज़रूरतों के वक्त सिर्फ अल्लाह से मदद माँगनी चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ करने पर क़ादिर है।
- यह आयत इंसान को अल्लाह के सामने अपनी लाचारी और कमज़ोरी का एहसास कराती है, जिससे उसका दिल अल्लाह की तरफ झुकता है और उसकी मोहब्बत बढ़ती है।
- इस आयत से इंसान को यह सीख मिलती है कि वह अपने जीवन के हर काम में अल्लाह पर भरोसा करे और उसी से तौफ़ीक़ (सफलता) माँगे।
- यह आयत दिल को साफ करती है और इंसान को दिखावे, घमंड और अभिमान से बचाती है, क्योंकि जब वह यह कहता है कि "मैं सिर्फ तेरी इबादत करता हूँ," तो उसे याद आता है कि उसकी सारी नेकियाँ अल्लाह की मदद से हैं, उसके अपने दम पर नहीं।
📜 आयत 3-7 — अल-फातिहा
अनुवाद — अल-फातिहा 5
सूरा अल-फातिहा आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम तेरी ही इबादत करते हैं, और तुझ ही से…सूरा आयत 5/7 — अल-फातिहा الفاتحة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फातिहा सुनें, अल-फातिहा अनुवाद, अल-फातिहा mp3, अल-फातिहा pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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