अल-फातिहा · 6/7
अनुवाद उच्चारण — अल-फातिहा
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ ۝٦
Ihdinas-Siraatal-Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
हमें सीधा रास्ता दिखा।

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اهْدِنَا (इह्दिना): हमें मार्गदर्शन कर, हमें रास्ता दिखा, हमें तौफ़ीक़ दे।
  • الصِّرَاطَ (अस्सिरात): रास्ता, मार्ग।
  • الْمُسْتَقِيمَ (अल-मुस्तक़ीम): सीधा, स्पष्ट, जिसमें कोई टेढ़ापन न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में हम अल्लाह से दुआ करते हैं: "ऐ अल्लाह! हमें सीधे रास्ते पर चला।" यानी हम उससे यह माँग करते हैं कि वह हमें सत्य और स्पष्ट मार्ग दिखाए, हमें उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे, और उस पर स्थिर रखे। यह मार्ग इस्लाम है—वह स्पष्ट रास्ता जो अल्लाह की रज़ा और उसकी जन्नत तक पहुँचाता है। यह वही रास्ता है जिसे अल्लाह ने अपने आख़िरी नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के माध्यम से दिखाया।

जब हम यह दुआ करते हैं, तो हम अल्लाह से तीन चीज़ें माँगते हैं: पहला, मार्गदर्शन—कि वह हमें सही रास्ता समझाए; दूसरा, उस रास्ते पर चलने की ताक़त और तौफ़ीक़ दे; और तीसरा, उस पर स्थिर रहने की हिम्मत दे। यह दुआ सिर्फ़ एक बार की माँग नहीं है, बल्कि हर पल की ज़रूरत है, क्योंकि इंसान कमज़ोर है और उसे हर वक़्त अल्लाह की मदद की ज़रूरत होती है।

यहाँ एक ख़ूबसूरत बात यह है कि हम यह दुआ जमात (सामूहिक रूप से) करते हैं—"हमें रास्ता दिखा"—यानी हम सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि सब मोमिनीन के लिए हिदायत की दुआ करते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें दूसरों के लिए भी भलाई की दुआ करनी चाहिए।


फ़ायदे (लाभ और शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह पर भरोसा: यह आयत हमें सिखाती है कि हिदायत पाना सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। हमें हर काम में उसी से मदद माँगनी चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा मार्गदर्शक है।
  2. इस्लाम ही सच्चा रास्ता: यह आयत साफ़ करती है कि सीधा रास्ता सिर्फ़ इस्लाम है—वह रास्ता जो अल्लाह ने अपने नबी के ज़रिए दिखाया। इसके अलावा जो भी रास्ते हैं, वे टेढ़े हैं और मंज़िल तक नहीं पहुँचाते।
  3. स्थिरता की दुआ: हमें सिर्फ़ हिदायत की शुरुआत ही नहीं, बल्कि उस पर स्थिर रहने की भी दुआ करनी चाहिए। कई लोग सही रास्ता पाते हैं, लेकिन उस पर क़ायम नहीं रह पाते। इसलिए यह दुआ हमें सिखाती है कि हम अल्लाह से साबित क़दमी की माँग करें।
  4. सामूहिक भावना: "हमें" कहकर हम सिखते हैं कि इस्लाम में इंसान अकेला नहीं है। हम सब एक जमात हैं, एक उम्मत हैं, और हमें एक-दूसरे की भलाई के लिए दुआ करनी चाहिए।
  5. हर नमाज़ में याद: यह आयत हम हर नमाज़ में पढ़ते हैं, जो हमें याद दिलाती है कि हमें हर वक़्त अल्लाह की रहनुमाई की ज़रूरत है—चाहे हम कितने भी अच्छे क्यों न हों। यह हमें इंसान की कमज़ोरी और अल्लाह की बेइंतिहा रहमत की याद दिलाती है।


📜 आयत 4-7 — अल-फातिहा

4مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ
रोज़े जज़ा का मालिक है।
5إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ
हम तेरी ही इबादत करते हैं, और तुझ ही से मदद मांगते है।
6اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
हमें सीधा रास्ता दिखा।
7صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ
उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम फ़रमाया, जो माअतूब नहीं हुए, जो भटके हुए नहीं है।
अल-फातिहाकुरान सूची
7आयत
मक्कीRevelation
6आयत

अनुवाद — अल-फातिहा 6

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सूरा आयत 6/7 — अल-फातिहा الفاتحة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फातिहा सुनें, अल-फातिहा अनुवाद, अल-फातिहा mp3, अल-फातिहा pdf. आयत 4–7. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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