Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तदु (تَدْعُ) – पुकारना, पूजना, दुआ करना
- मिन दूनिल्लाह (مِن دُونِ اللَّهِ) – अल्लाह को छोड़कर, अल्लाह के सिवा
- ला यनफ़उका (لَا يَنفَعُكَ) – तुम्हें लाभ नहीं पहुँचा सकता
- ला यदुर्रुका (لَا يَضُرُّكَ) – तुम्हें हानि नहीं पहुँचा सकता
- ज़ालिमीन (الظَّالِمِينَ) – अत्याचारी, सीमा उल्लंघन करने वाले, अपनी आत्मा पर ज़ुल्म करने वाले
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अल्लाह को छोड़कर उन चीज़ों को मत पुकारो और न उनकी पूजा करो जो न तो तुम्हें कोई लाभ पहुँचा सकती हैं और न ही कोई हानि। ये मूर्तियाँ, देवता, पीर-औलिया, या कोई भी मख़लूक़ – ये सब बेबस और बेइख़्तियार हैं। इनके पास न तो किसी को फ़ायदा देने की ताक़त है और न ही नुक़सान पहुँचाने की। ये तो स्वयं अपने लिए भी कुछ नहीं कर सकतीं, फिर तुम्हारे लिए क्या करेंगी?
अगर तुमने ऐसा किया – यानी अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारा या उसकी इबादत की – तो तुम ज़ालिमों में से हो जाओगे। यहाँ "ज़ालिम" का मतलब है अल्लाह पर अत्याचार करने वाला (क्योंकि उसने उसकी इबादत का हक़ किसी और को दिया) और अपनी आत्मा पर अत्याचार करने वाला (क्योंकि उसने अपने आप को अल्लाह की रहमत से महरूम कर लिया)।
यह हुक्म भले ही नबी ﷺ को सम्बोधित है, लेकिन इसका ख़िताब पूरी उम्मत के लिए है। हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी हर दुआ, हर इबादत, हर उम्मीद और हर डर को सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह के साथ जोड़े।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि जिस अल्लाह ने हमें पैदा किया, हमें रिज़्क़ दिया, हमें साँसें दीं, और हर पल हमारी देखभाल कर रहा है – उसी से हमें जुड़े रहना चाहिए। जब हम सीधे उसी से जुड़ जाते हैं, तो हमें किसी और की ज़रूरत नहीं रहती। वह सुनता है, वह जानता है, वह कर सकता है। उसके आगे हाथ फैलाना ही सबसे बड़ी इज़्ज़त है।
याद रखिए! जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों को पुकारते हैं – चाहे वे मूर्तियाँ हों, क़ब्रें हों, या कोई और – वे न केवल गुमराह हैं, बल्कि अपनी आत्मा पर बड़ा ज़ुल्म कर रहे हैं। क्योंकि वे अपने आप को उस सच्चे मालिक की रहमत से दूर कर रहे हैं जो सब कुछ कर सकता है, और एक ऐसी चीज़ की तरफ़ जा रहे हैं जो कुछ भी नहीं कर सकती।
इसलिए अपनी ज़िन्दगी को इस खूबसूरत तौहीद (एकेश्वरवाद) की रोशनी में ढालें। हर मुश्किल में, हर ज़रूरत में, हर दर्द में – सिर्फ़ अल्लाह से माँगें। वही सुनने वाला है, वही देने वाला है। उसकी रहमत की कोई हद नहीं, और उसके दरवाज़े कभी बंद नहीं होते। यही सच्ची कामयाबी है, और यही सच्ची आज़ादी है – कि हम किसी के आगे न झुकें, सिवाय उस एक अल्लाह के जो सबका मालिक है।
📜 आयत 104-108 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 106
सूरा यूनुस आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा को छोड़ ऐसी चीज़ को पुकारना जो न…सूरा आयत 106/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 104–108. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


