Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَمْسَسْكَ (छू ले / पहुँचा दे)
- بِضُرٍّ (कष्ट, हानि, बीमारी या तंगी)
- كَاشِفَ (दूर करने वाला / हटाने वाला)
- يُرِدْكَ (तुम्हारे लिए चाहे)
- رَادَّ (रोकने वाला / टालने वाला)
- فَضْلِهِ (उसकी कृपा, भलाई, रहमत)
- يُصِيبُ (पहुँचाता है / नसीब करता है)
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अगर अल्लाह तुम्हें किसी कष्ट, बीमारी, मुसीबत या तंगी में डाल दे, तो उसे दूर करने वाला उसके सिवा कोई नहीं है। चाहे सारी दुनिया के लोग मिलकर भी उस कष्ट को हटाने की कोशिश कर लें, वे हरगिज़ कामयाब नहीं हो सकते। और अगर अल्लाह तुम्हारे साथ भलाई, रिज़्क़, सुख-चैन और कृपा का इरादा कर ले, तो कोई भी उसकी भलाई को रोकने या टालने वाला नहीं है। न कोई शक्ति उसे रोक सकती है, न कोई ज़रिया उसे बदल सकता है।
अल्लाह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपनी कृपा से नवाज़ता है और जिसे चाहता है, उसकी परीक्षा के लिए कष्ट देता है। यह सब उसकी मर्ज़ी और हिकमत (बुद्धिमत्ता) से होता है। वह किसी का मोहताज नहीं, और उसके फ़ैसले पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।
वही अल्लाह ग़फ़ूर (बहुत क्षमा करने वाला) है — अपने उन बंदों के गुनाहों को माफ़ कर देता है जो तौबा करके उसकी ओर लौटते हैं। और वही रहीम (बहुत दयालु) है — अपने नेक और आज्ञाकारी बंदों पर रहमत और मेहरबानी करता है।
फ़ायदे (सीख):
- तौहीद (एकेश्वरवाद) की पूरी तस्वीर: यह आयत सिखाती है कि लाभ-हानि, सुख-दुख, रिज़्क़ और मुसीबत — सब कुछ सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। किसी और से डरना या किसी और से उम्मीद रखना बेकार है।
- अल्लाह पर भरोसा: जब मुसीबत आए तो घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह से ही दुआ करनी चाहिए, क्योंकि वही उसे दूर कर सकता है। और जब नेमत मिले तो अकड़ना नहीं चाहिए, बल्कि शुक्र करना चाहिए।
- तौबा की खुशखबरी: आयत के अंत में "ग़फ़ूर-उर-रहीम" का ज़िक्र बताता है कि अल्लाह के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। चाहे कितने ही गुनाह हों, सच्ची तौबा से अल्लाह माफ़ कर देता है और अपनी रहमत से नवाज़ता है।
- इस्लाम का सुंदर पहलू: यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि जीवन में जो कुछ भी होता है, वह अल्लाह की हिकमत से होता है। इसलिए मुसीबत में सब्र और नेमत में शुक्र — यही ईमान की निशानी है। यही वह रास्ता है जो इंसान को सुकून और अल्लाह की मुहब्बत की तरफ ले जाता है।
📜 आयत 105-109 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 107
सूरा यूनुस आयत 107 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें…सूरा आयत 107/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 105–109. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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