यूनुस · 107/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
وَإِن يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ ۖ وَإِن يُرِدْكَ بِخَيْرٍ فَلَا رَادَّ لِفَضْلِهِ ۚ يُصِيبُ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۚ وَهُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ ۝١٠٧
Wa iny yamsaskal laahu bidurrin falaa kaashifa lahoo illaa Huwa wa iny yuridka bikhairin falaa raaadda lifadlih; yuseebu bihee man yashaaa`u min `ibaadih; wa huwal Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें कोई बुराई छू भी गई तो फिर उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं होगा और अगर तुम्हारे साथ भलाई का इरादा करे तो फिर उसके फज़ल व करम का लपेटने वाला भी कोई नहीं वह अपने बन्दों में से जिसको चाहे फायदा पहुँचाएँ और वह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَمْسَسْكَ (छू ले / पहुँचा दे)
  • بِضُرٍّ (कष्ट, हानि, बीमारी या तंगी)
  • كَاشِفَ (दूर करने वाला / हटाने वाला)
  • يُرِدْكَ (तुम्हारे लिए चाहे)
  • رَادَّ (रोकने वाला / टालने वाला)
  • فَضْلِهِ (उसकी कृपा, भलाई, रहमत)
  • يُصِيبُ (पहुँचाता है / नसीब करता है)

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अगर अल्लाह तुम्हें किसी कष्ट, बीमारी, मुसीबत या तंगी में डाल दे, तो उसे दूर करने वाला उसके सिवा कोई नहीं है। चाहे सारी दुनिया के लोग मिलकर भी उस कष्ट को हटाने की कोशिश कर लें, वे हरगिज़ कामयाब नहीं हो सकते। और अगर अल्लाह तुम्हारे साथ भलाई, रिज़्क़, सुख-चैन और कृपा का इरादा कर ले, तो कोई भी उसकी भलाई को रोकने या टालने वाला नहीं है। न कोई शक्ति उसे रोक सकती है, न कोई ज़रिया उसे बदल सकता है।

अल्लाह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपनी कृपा से नवाज़ता है और जिसे चाहता है, उसकी परीक्षा के लिए कष्ट देता है। यह सब उसकी मर्ज़ी और हिकमत (बुद्धिमत्ता) से होता है। वह किसी का मोहताज नहीं, और उसके फ़ैसले पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।

वही अल्लाह ग़फ़ूर (बहुत क्षमा करने वाला) है — अपने उन बंदों के गुनाहों को माफ़ कर देता है जो तौबा करके उसकी ओर लौटते हैं। और वही रहीम (बहुत दयालु) है — अपने नेक और आज्ञाकारी बंदों पर रहमत और मेहरबानी करता है।


फ़ायदे (सीख):

  1. तौहीद (एकेश्वरवाद) की पूरी तस्वीर: यह आयत सिखाती है कि लाभ-हानि, सुख-दुख, रिज़्क़ और मुसीबत — सब कुछ सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। किसी और से डरना या किसी और से उम्मीद रखना बेकार है।
  2. अल्लाह पर भरोसा: जब मुसीबत आए तो घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह से ही दुआ करनी चाहिए, क्योंकि वही उसे दूर कर सकता है। और जब नेमत मिले तो अकड़ना नहीं चाहिए, बल्कि शुक्र करना चाहिए।
  3. तौबा की खुशखबरी: आयत के अंत में "ग़फ़ूर-उर-रहीम" का ज़िक्र बताता है कि अल्लाह के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। चाहे कितने ही गुनाह हों, सच्ची तौबा से अल्लाह माफ़ कर देता है और अपनी रहमत से नवाज़ता है।
  4. इस्लाम का सुंदर पहलू: यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि जीवन में जो कुछ भी होता है, वह अल्लाह की हिकमत से होता है। इसलिए मुसीबत में सब्र और नेमत में शुक्र — यही ईमान की निशानी है। यही वह रास्ता है जो इंसान को सुकून और अल्लाह की मुहब्बत की तरफ ले जाता है।


📜 आयत 105-109 — सूरा यूनुस

105وَأَنْ أَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفًا وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
और (मुझे) ये भी (हुक्म है) कि (बातिल) से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ कायम रख और मुशरेकीन से हरगिज़ न होना
106وَلَا تَدْعُ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكَ وَلَا يَضُرُّكَ ۖ فَإِن فَعَلْتَ فَإِنَّكَ إِذًا مِّنَ الظَّالِمِينَ
और ख़ुदा को छोड़ ऐसी चीज़ को पुकारना जो न तुझे नफा ही पहुँचा सकती हैं न नुक़सान ही पहुँचा सकती है तो अगर तुमने (कहीं ऐसा) किया तो उस वक्त तुम भी ज़ालिमों में (शुमार) होगें
107وَإِن يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ ۖ وَإِن يُرِدْكَ بِخَيْرٍ فَلَا رَادَّ لِفَضْلِهِ ۚ يُصِيبُ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۚ وَهُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें कोई बुराई छू भी गई तो फिर उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं होगा और अगर तुम्हारे साथ भलाई का इरादा करे तो फिर उसके फज़ल व करम का लपेटने वाला भी कोई नहीं वह अपने बन्दों में से जिसको चाहे फायदा पहुँचाएँ और वह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
108قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَاءَكُمُ الْحَقُّ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَنِ اهْتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهْتَدِي لِنَفْسِهِ ۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَا ۖ وَمَا أَنَا عَلَيْكُم بِوَكِيلٍ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ लोगों तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) आ चुका फिर जो शख़्स सीधी राह पर चलेगा तो वह सिर्फ अपने ही दम के लिए हिदायत एख्तेयार करेगा और जो गुमराही एख्तेयार करेगा वह तो भटक कर कुछ अपना ही खोएगा और मैं कुछ तुम्हारा ज़िम्मेदार तो हूँ नहीं
109وَاتَّبِعْ مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ وَاصْبِرْ حَتَّىٰ يَحْكُمَ اللَّهُ ۚ وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِمِينَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारे पास जो 'वही' भेजी जाती है तुम बस उसी की पैरवी करो और सब्र करो यहाँ तक कि ख़ुदा तुम्हारे और काफिरों के दरमियान फैसला फरमाए और वह तो तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
107आयत

अनुवाद — यूनुस 107

सूरा यूनुस आयत 107 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें…

सूरा आयत 107/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 105–109. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए