यूनुस · 105/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
وَأَنْ أَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفًا وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُشْرِكِينَ ۝١٠٥
Wa an aqim wajhaka liddeeni Haneefanw wa laa takoonannna minal mushrikeen
📖 हिंदी अर्थ
और (मुझे) ये भी (हुक्म है) कि (बातिल) से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ कायम रख और मुशरेकीन से हरगिज़ न होना

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَقِمْ وَجْهَكَ: अपने चेहरे को सीधा रखो, अर्थात अपने आप को पूरी तरह से सीधा करो और एकाग्र करो।
  • لِلدِّينِ: धर्म के लिए, यानी इस्लाम के लिए।
  • حَنِيفًا: एकेश्वरवादी होकर, सभी झूठे धर्मों से हटकर सत्य धर्म की ओर झुका हुआ।
  • الْمُشْرِكِينَ: वे लोग जो अल्लाह के साथ किसी और को पूजते या साझीदार बनाते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने पैगंबर मुहम्मद ﷺ को आदेश दिया कि वे अपने चेहरे को पूरी तरह से इस्लाम के धर्म की ओर सीधा रखें, यानी अपने पूरे अस्तित्व को, अपने इरादों को, अपने कर्मों को और अपनी इबादत को केवल अल्लाह के लिए समर्पित कर दें। "हनीफ" होने का अर्थ है कि सभी झूठे धर्मों, रीति-रिवाजों और अंधविश्वासों से मुंह मोड़कर पूरी तरह से एक अल्लाह की ओर झुक जाना। यह आदेश केवल पैगंबर ﷺ के लिए नहीं था, बल्कि उनकी पूरी उम्मत के लिए है कि हर मुसलमान अपने जीवन को इस्लाह के अनुसार ढाले और किसी भी प्रकार के शिर्क (अल्लाह के साथ साझीदार बनाने) से बचे। साथ ही अल्लाह ने स्पष्ट चेतावनी दी कि मुशरिकों में शामिल न हों, क्योंकि शिर्क सबसे बड़ा पाप है और यह इंसान को अल्लाह की रहमत से वंचित कर देता है। यह आदेश उन सभी लोगों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन है जो सच्ची सफलता और मुक्ति चाहते हैं।

फायदे और सबक:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में पूर्ण समर्पण और एकाग्रता आवश्यक है। आधे-अधूरे ढंग से धर्म पर चलना काफी नहीं है, बल्कि पूरे दिल और जान से अल्लाह की ओर झुकना चाहिए।
  2. यह आयत हमें शिर्क से बचने की सख्त ताकीद करती है। शिर्क न केवल मूर्तिपूजा है, बल्कि इसमें रिया (दिखावा), अल्लाह के अलावा किसी और से डरना या उम्मीद रखना, और किसी और के कानून को अल्लाह के कानून से ऊपर मानना भी शामिल है।
  3. यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि उन्हें अपने धर्म पर दृढ़ रहना चाहिए, चाहे समाज और आसपास के लोग किसी भी धर्म या विचारधारा पर हों। सच्चाई पर अडिग रहना ही सच्ची कामयाबी है।
  4. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह का दीन (इस्लाम) एक ऐसा सीधा रास्ता है जो इंसान को हर प्रकार की गुमराही, अंधविश्वास और झूठी पूजा-पद्धतियों से आज़ाद करता है। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आखिरत दोनों में सुख और शांति देता है।


📜 आयत 103-107 — सूरा यूनुस

103ثُمَّ نُنَجِّي رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا ۚ كَذَٰلِكَ حَقًّا عَلَيْنَا نُنجِ الْمُؤْمِنِينَ
फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक्त) हम अपने रसूलों को और जो लोग ईमान लाए उनको (अज़ाब से) तलूउ बचा लेते हैं यूँ ही हम पर लाज़िम है कि हम ईमान लाने वालों को भी बचा लें
104قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِن كُنتُمْ فِي شَكٍّ مِّن دِينِي فَلَا أَعْبُدُ الَّذِينَ تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ وَلَٰكِنْ أَعْبُدُ اللَّهَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُمْ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक़ में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़ुदा के सिवा तुम भी जिन लोगों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ
105وَأَنْ أَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفًا وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
और (मुझे) ये भी (हुक्म है) कि (बातिल) से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ कायम रख और मुशरेकीन से हरगिज़ न होना
106وَلَا تَدْعُ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكَ وَلَا يَضُرُّكَ ۖ فَإِن فَعَلْتَ فَإِنَّكَ إِذًا مِّنَ الظَّالِمِينَ
और ख़ुदा को छोड़ ऐसी चीज़ को पुकारना जो न तुझे नफा ही पहुँचा सकती हैं न नुक़सान ही पहुँचा सकती है तो अगर तुमने (कहीं ऐसा) किया तो उस वक्त तुम भी ज़ालिमों में (शुमार) होगें
107وَإِن يَمْسَسْكَ اللَّهُ بِضُرٍّ فَلَا كَاشِفَ لَهُ إِلَّا هُوَ ۖ وَإِن يُرِدْكَ بِخَيْرٍ فَلَا رَادَّ لِفَضْلِهِ ۚ يُصِيبُ بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۚ وَهُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें कोई बुराई छू भी गई तो फिर उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं होगा और अगर तुम्हारे साथ भलाई का इरादा करे तो फिर उसके फज़ल व करम का लपेटने वाला भी कोई नहीं वह अपने बन्दों में से जिसको चाहे फायदा पहुँचाएँ और वह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — यूनुस 105

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Saturday, October 3, 2026

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