यूनुस · 6/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
إِنَّ فِي اخْتِلَافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَمَا خَلَقَ اللَّهُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَّقُونَ ۝٦
Inna fikh tilaafil laili wannahaari wa maa khalaqal laahu fis samaawaati wal ardi la Aayaatil liqawminy yattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
इसमें ज़रा भी शक़ नहीं कि रात दिन के उलट फेर में और जो कुछ ख़ुदा ने आसमानों और ज़मीन में बनाया है (उसमें) परहेज़गारों के वास्ते बहुतेरी निशानियाँ हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • اخْتِلَافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ: रात और दिन का एक-दूसरे के बाद आना-जाना, कभी एक का लंबा और दूसरे का छोटा होना।
  • لَآيَاتٍ: निशानियाँ, सबूत और सबक।
  • يَتَّقُونَ: अल्लाह से डरने वाले, जो उसके आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें।

तफसीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी कुदरत और हिकमत की निशानियाँ बयान कर रहा है। रात और दिन का बारी-बारी से आना, उनमें से एक का अंधेरा और दूसरे का उजाला, कभी एक का लंबा होना और कभी दूसरे का छोटा — यह सब एक व्यवस्थित प्रणाली के अधीन चल रहा है। यह बदलाव अपने आप नहीं होता, बल्कि अल्लाह की ओर से है, जो अपनी मशीयत (इच्छा) से इसे बदलता रहता है।

इसी तरह, आसमानों और ज़मीन में अल्लाह ने जो कुछ पैदा किया है — सूरज, चाँद, तारे, बादल, बारिश, पहाड़, दरिया, पेड़-पौधे, जानवर और तरह-तरह की मख़लूक़ात — यह सब उसकी कुदरत की निशानियाँ हैं। इनमें से हर चीज़ अपनी बनावट, अपने निज़ाम और अपने फ़ायदे के साथ इस बात का सबूत है कि इन्हें बनाने वाला कोई और नहीं बल्कि अल्लाह है, जो हर चीज़ पर क़ादिर है।

लेकिन यह निशानियाँ सिर्फ़ उन लोगों के लिए फ़ायदेमंद हैं जो अल्लाह से डरते हैं, उसके अज़ाब से बचने की कोशिश करते हैं, और उसके हुक्मों को मानते हैं। ऐसे लोग ही इन निशानियों पर ग़ौर करते हैं और उनसे सबक लेते हैं। जो लोग अल्लाह से नहीं डरते, वे इन चीज़ों को देखकर भी अंधे बने रहते हैं और उनसे कोई सबक नहीं लेते।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पैदा की हुई हर चीज़ में उसकी कुदरत की निशानियाँ मौजूद हैं, और हमें इन पर ग़ौर करना चाहिए।
  2. रात और दिन का बदलना हमें याद दिलाता है कि जिस तरह यह दुनिया बदलती रहती है, उसी तरह हमारी ज़िंदगी भी बदलती रहेगी और एक दिन हमें अपने अमल का हिसाब देना होगा।
  3. अल्लाह से डरने वाला इंसान ही सही मायने में इन निशानियों से फ़ायदा उठा पाता है, इसलिए हमें अपने दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करना चाहिए।
  4. यह आयत हमें प्रकृति के निज़ाम पर ग़ौर करने की तरफ़ बुलाती है, जो हमें अल्लाह की महानता और उसकी हिकमत की तरफ़ ले जाता है।


📜 आयत 4-8 — यूनुस

4إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ جَمِيعًا ۖ وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ إِنَّهُ يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ لِيَجْزِيَ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ بِالْقِسْطِ ۚ وَالَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ شَرَابٌ مِّنْ حَمِيمٍ وَعَذَابٌ أَلِيمٌ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ
तुम सबको (आख़िर) उसी की तरफ लौटना है ख़ुदा का वायदा सच्चा है वही यक़ीनन मख़लूक को पहली मरतबा पैदा करता है फिर (मरने के बाद) वही दुबारा जिन्दा करेगा ताकि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको इन्साफ के साथ जज़ाए (ख़ैर) अता फरमाएगा और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया उन के लिए उनके कुफ्र की सज़ा में पीने को खौलता हुआ पानी और दर्दनाक अज़ाब होगा
5هُوَ الَّذِي جَعَلَ الشَّمْسَ ضِيَاءً وَالْقَمَرَ نُورًا وَقَدَّرَهُ مَنَازِلَ لِتَعْلَمُوا عَدَدَ السِّنِينَ وَالْحِسَابَ ۚ مَا خَلَقَ اللَّهُ ذَٰلِكَ إِلَّا بِالْحَقِّ ۚ يُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
वही वह (ख़ुदाए क़ादिर) है जिसने आफ़ताब को चमकदार और महताब को रौशन बनाया और उसकी मंज़िलें मुक़र्रर की ताकि तुम लोग बरसों की गिनती और हिसाब मालूम करो ख़ुदा ने उसे हिकमत व मसलहत से बनाया है वह (अपनी) आयतों का वाक़िफ़कार लोगों के लिए तफ़सीलदार बयान करता है
6إِنَّ فِي اخْتِلَافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَمَا خَلَقَ اللَّهُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَّقُونَ
इसमें ज़रा भी शक़ नहीं कि रात दिन के उलट फेर में और जो कुछ ख़ुदा ने आसमानों और ज़मीन में बनाया है (उसमें) परहेज़गारों के वास्ते बहुतेरी निशानियाँ हैं
7إِنَّ الَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا وَرَضُوا بِالْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَاطْمَأَنُّوا بِهَا وَالَّذِينَ هُمْ عَنْ آيَاتِنَا غَافِلُونَ
इसमें भी शक़ नहीं कि जिन लोगों को (क़यामत में) हमारी (बारगाह की) हुज़ूरी का ठिकाना नहीं और दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी से निहाल हो गए और उसी पर चैन से बैठे हैं और जो लोग हमारी आयतों से ग़ाफिल हैं
8أُولَٰئِكَ مَأْوَاهُمُ النَّارُ بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
यही वह लोग हैं जिनका ठिकाना उनकी करतूत की बदौलत जहन्नुम है
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अनुवाद — यूनुस 6

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Tuesday, August 18, 2026

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