अल-आदियात · 9/11
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आदियात
۞ أَفَلَا يَعْلَمُ إِذَا بُعْثِرَ مَا فِي الْقُبُورِ ۝٩
Afala ya`lamu iza b`uthira ma filquboor
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या वह ये नहीं जानता कि जब मुर्दे क़ब्रों से निकाले जाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بُعْثِرَ (बु'थिरा): उलट-पलट कर निकाल दिया जाए, क़ब्रों की मिट्टी को खोदकर उसमें छिपे हुए लोगों को बाहर निकाला जाए।
  • مَا فِي الْقُبُورِ (मा फ़िल-क़ुबूर): वह सब कुछ जो क़ब्रों में है, यानी मुर्दे (मृत लोग)।

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या यह इंसान नहीं जानता कि जिस दिन अल्लाह तआला क़ब्रों को उलट-पलट कर उनमें दफ़्न मुर्दों को ज़िंदा करके निकालेगा, तो उसका हाल क्या होगा? यह आयत उस इंसान को चेतावनी दे रही है जो दुनिया की ज़िंदगी में मगरूर (घमंडी) हो गया है, माल और औलाद पर इतराता है, और यह भूल गया है कि उसे एक दिन अपने रब के सामने हाज़िर होना है।

जिस दिन क़ब्रों से सब लोग निकलेंगे, अल्लाह उन्हें ज़िंदा करके हिसाब-किताब के मैदान में इकट्ठा करेगा, तो आज का यह घमंडी इंसान अपनी सारी ताकत और दौलत को बेकार पाएगा। उस दिन कोई माल काम नहीं आएगा, न कोई औलाद, न कोई साथी। हर इंसान अपने किए गए अच्छे या बुरे कर्मों का बदला पाने के लिए अकेला खड़ा होगा।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जो लोग आज अल्लाह के हुक्म से ग़ाफ़िल हैं और सिर्फ़ दुनिया की ख्वाहिशों में डूबे हुए हैं, वे उस दिन क्या जवाब देंगे? क्या वे उस दिन को भूल गए हैं? क्या उन्हें यक़ीन नहीं कि अल्लाह तआला मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर पूरी ताकत रखता है?

इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारें, अपने आख़िरत (परलोक) को संवारें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हर इंसान को अपने अमल (कर्मों) का सामना करना होगा। अल्लाह तआला ने हमें यह दुनिया इम्तिहान (परीक्षा) के लिए दी है, और क़यामत का दिन उस इम्तिहान का नतीजा होगा। जो लोग आज नेकी करेंगे, उनके लिए जन्नत की खुशियाँ हैं, और जो गुनाह में डूबे रहेंगे, उनके लिए अज़ाब का डर है।

याद रखें, यह दुनिया कुछ दिनों की है, लेकिन आख़िरत हमेशा रहने वाली है। आइए, हम अपने रब की याद में ज़िंदगी गुज़ारें, उसकी राह में खर्च करें, और उस दिन के लिए अच्छे कर्मों का ज़ख़ीरा इकट्ठा करें जब कोई किसी की मदद नहीं कर सकेगा। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, और उसने हमें तौबा (पश्चाताप) का रास्ता दिखाया है — आइए, हम उसकी ओर लौटें और उसकी रहमत के हक़दार बनें।



📜 आयत 7-11 — सूरा अल-आदियात

7وَإِنَّهُ عَلَىٰ ذَٰلِكَ لَشَهِيدٌ
और यक़ीनी ख़ुदा भी उससे वाक़िफ़ है
8وَإِنَّهُ لِحُبِّ الْخَيْرِ لَشَدِيدٌ
और बेशक वह माल का सख्त हरीस है
9۞ أَفَلَا يَعْلَمُ إِذَا بُعْثِرَ مَا فِي الْقُبُورِ
तो क्या वह ये नहीं जानता कि जब मुर्दे क़ब्रों से निकाले जाएँगे
10وَحُصِّلَ مَا فِي الصُّدُورِ
और दिलों के भेद ज़ाहिर कर दिए जाएँगे
11إِنَّ رَبَّهُم بِهِمْ يَوْمَئِذٍ لَّخَبِيرٌ
बेशक उस दिन उनका परवरदिगार उनसे ख़ूब वाक़िफ़ होगा
अल-आदियातकुरान सूची
11आयत
मक्कीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — अल-आदियात 9

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Wednesday, September 30, 2026

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