अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْخَيْرِ (अल-ख़ैर): यहाँ इसका अर्थ 'धन-दौलत' है, जैसा कि अधिकांश मुफ़स्सिरीन (व्याख्याकारों) ने कहा है।
- لَشَدِيدٌ (ल-शदीद): अत्यधिक प्रबल, बहुत गहरा और सख्त (यहाँ प्रेम की अधिकता के लिए प्रयुक्त)।
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला इंसान की एक और कमज़ोरी और खामी को उजागर कर रहे हैं। इंसान की फ़ितरत (प्रकृति) में धन-दौलत से गहरा लगाव और उसका अत्यधिक प्रेम रखा गया है। यह प्रेम इतना गहरा होता है कि यह उसके दिल में जड़ें जमा लेता है और उसके पूरे व्यवहार को प्रभावित करता है।
यहाँ "ख़ैर" से मुराद माल (धन) है, क्योंकि इंसान धन को ही सबसे बड़ी भलाई और ख़ैर समझता है। वह इसके पीछे भागता है, इसके लिए दिन-रात मेहनत करता है, और जब उसे मिलता है तो उससे चिपक जाता है। यह लगाव इतना सख्त होता है कि इंसान कंजूसी (बुख़्ल) करने लगता है, दूसरों का हक़ देने में कसर रखता है, और अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करने से कतराता है।
यह आयत इंसान को उसकी इस कमज़ोरी से आगाह करती है ताकि वह अपने इस स्वभाव पर क़ाबू पाए। इस्लाम इंसान को सिखाता है कि धन तो अल्लाह की दी हुई अमानत (धरोहर) है, और उसका सही उपयोग यह है कि उसे अल्लाह की राह में ख़र्च किया जाए, ज़रूरतमंदों की मदद की जाए, और अपने ऊपर भी अल्लाह द्वारा निर्धारित हद के अनुसार ख़र्च किया जाए।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है। हम सब जानते हैं कि धन से मोहब्बत इंसान की फ़ितरत है, लेकिन अल्लाह तआला हमें बताना चाहते हैं कि यह मोहब्बत जब हद से बढ़ जाए तो यह इंसान को अल्लाह से दूर कर देती है। जो इंसान धन को ही सब कुछ समझ लेता है, वह अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल हो जाता है, नमाज़ से जी चुराता है, और दूसरों के हक़ मारने लगता है।
लेकिन अल्लाह तआला अपने बंदों पर बड़ा मेहरबान है। उसने हमें यह रास्ता दिखाया है कि हम अपने धन को अल्लाह की राह में ख़र्च करके उसे सच्ची ख़ैर (भलाई) बना सकते हैं। जब हम अपने माल में से अल्लाह का हक़ निकालते हैं - ज़कात देते हैं, सदक़ा करते हैं, और ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं - तो अल्लाह हमारे रिज़्क़ में बरकत (वृद्धि) डालता है और हमारे दिल को सुकून और खुशी से भर देता है।
आइए हम अपने दिलों को धन की मोहब्बत से पाक करें और अल्लाह की मोहब्बत को अपने दिलों में जगह दें। याद रखें, धन तो एक साधन है, मंज़िल नहीं। असली मंज़िल अल्लाह की रज़ा है, और वही हमें सच्ची कामयाबी और सुकून दिला सकती है।
📜 आयत 6-10 — अल-आदियात
अनुवाद — अल-आदियात 8
सूरा अल-आदियात आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बेशक वह माल का सख्त हरीस हैसूरा आयत 8/11 — अल-आदियात العاديات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आदियात सुनें, अल-आदियात अनुवाद, अल-आदियात mp3, अल-आदियात pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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