हूद · 112/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
فَاسْتَقِمْ كَمَا أُمِرْتَ وَمَن تَابَ مَعَكَ وَلَا تَطْغَوْا ۚ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ ۝١١٢
Fastaqim kamaaa umirta wa man taaba ma`aka wa laa tatghaw; innahoo bimaa ta`maloona Baseer
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) जैसा तुम्हें हुक्म दिया है तुम और वह लोग भी जिन्होंने तुम्हारे साथ (कुफ्र से) तौबा की है ठीक साबित क़दम रहो और सरकशी न करो (क्योंकि) तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह यक़ीनन देख रहा है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاسْتَقِمْ: सीधे रहो, दृढ़ता से स्थिर रहो, अडिग रहो।
  • كَمَا أُمِرْتَ: जैसा तुम्हें आदेश दिया गया है।
  • وَمَن تَابَ مَعَكَ: और जिन्होंने तुम्हारे साथ तौबा (पश्चाताप) किया।
  • وَلَا تَطْغَوْا: और सीमा से आगे न बढ़ो, अत्याचार मत करो।
  • بَصِيرٌ: देखने वाला, सब कुछ जानने वाला।

व्याख्या:

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए आदेश देता है कि आप दीन (धर्म) पर सीधे और अडिग रहें, ठीक उसी तरह जैसा अल्लाह ने आपको आदेश दिया है। यह आदेश केवल नबी ﷺ के लिए नहीं है, बल्कि उन सभी मोमिनों के लिए भी है जिन्होंने अपने गुनाहों से तौबा करके ईमान की राह अपनाई है। उन्हें भी हुक्म दिया जा रहा है कि वे भी अपने नबी के साथ मिलकर सीधे रास्ते पर स्थिर रहें।

फिर अल्लाह फरमाता है: "और सीमा से आगे न बढ़ो" यानी अल्लाह के हुक्मों की सीमाओं का उल्लंघन मत करो, न ही उसकी इबादत में कमी करो और न ही उसकी मना की हुई चीज़ों की तरफ बढ़ो। तुम्हें जो आदेश दिए गए हैं, उन्हीं पर अमल करो और उनसे आगे न बढ़ो।

अंत में अल्लाह फरमाता है: "बेशक वह तुम्हारे सारे कामों को देख रहा है।" यानी अल्लाह को तुम्हारे सभी कर्मों का पूरा इल्म है, चाहे वे छोटे हों या बड़े, छिपे हों या खुले। उसकी नज़र से कोई चीज़ छिपी नहीं है, और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें सीखने को मिलता है कि इस्लाम में सबसे अहम चीज़ "इस्तिक़ामत" (स्थिरता) है। सिर्फ शुरुआत करना काफी नहीं, बल्कि दीन पर ज़िंदगी भर डटे रहना ज़रूरी है।
  2. तौबा करने वालों को अल्लाह ने अपने नबी के साथ शामिल किया है, जिससे पता चलता है कि तौबा करने वालों का दर्जा बहुत ऊंचा है और वे नबी की संगत के लायक बन जाते हैं।
  3. इस्लाम में हर चीज़ में संतुलन और मध्यमार्ग सिखाया गया है। न तो इबादत में इतना ज़्यादा करो कि हक़ तोड़ो, और न ही इतना कम कि फ़र्ज़ छूट जाएं।
  4. यह आयत हमें यह यकीन दिलाती है कि अल्लाह हमारे हर काम को देख रहा है, इसलिए हमें हर वक़्त उसकी निगरानी का एहसास रखना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए।
  5. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का दीन कोई बोझ नहीं है, बल्कि वह हमारी भलाई के लिए है। जो लोग उस पर अमल करते हैं, उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी मिलती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 110-114 — हूद

110وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَاخْتُلِفَ فِيهِ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ ۚ وَإِنَّهُمْ لَفِي شَكٍّ مِّنْهُ مُرِيبٍ
और हमने मूसा को किताब तौरैत अता की तो उसमें (भी) झगड़े डाले गए और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से हुक्म कोइ पहले ही न हो चुका होता तो उनके दरमियान (कब का) फैसला यक़ीनन हो गया होता और ये लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) भी इस (क़ुरान) की तरफ से बहुत गहरे शक़ में पड़े हैं
111وَإِنَّ كُلًّا لَّمَّا لَيُوَفِّيَنَّهُمْ رَبُّكَ أَعْمَالَهُمْ ۚ إِنَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
और इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उनकी कारस्तानियों का बदला भरपूर देगा (क्योंकि) जो उनकी करतूतें हैं उससे वह खूब वाक़िफ है
112فَاسْتَقِمْ كَمَا أُمِرْتَ وَمَن تَابَ مَعَكَ وَلَا تَطْغَوْا ۚ إِنَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
तो (ऐ रसूल) जैसा तुम्हें हुक्म दिया है तुम और वह लोग भी जिन्होंने तुम्हारे साथ (कुफ्र से) तौबा की है ठीक साबित क़दम रहो और सरकशी न करो (क्योंकि) तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह यक़ीनन देख रहा है
113وَلَا تَرْكَنُوا إِلَى الَّذِينَ ظَلَمُوا فَتَمَسَّكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِنْ أَوْلِيَاءَ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ
और (मुसलमानों) जिन लोगों ने (हमारी नाफरमानी करके) अपने ऊपर ज़ुल्म किया है उनकी तरफ माएल (झुकना) न होना और वरना तुम तक भी (दोज़ख़) की आग आ लपटेगी और ख़ुदा के सिवा और लोग तुम्हारे सरपरस्त भी नहीं हैं फिर तुम्हारी मदद कोई भी नहीं करेगा
114وَأَقِمِ الصَّلَاةَ طَرَفَيِ النَّهَارِ وَزُلَفًا مِّنَ اللَّيْلِ ۚ إِنَّ الْحَسَنَاتِ يُذْهِبْنَ السَّيِّئَاتِ ۚ ذَٰلِكَ ذِكْرَىٰ لِلذَّاكِرِينَ
और (ऐ रसूल) दिन के दोनो किनारे और कुछ रात गए नमाज़ पढ़ा करो (क्योंकि) नेकियाँ यक़ीनन गुनाहों को दूर कर देती हैं और (हमारी) याद करने वालो के लिए ये (बातें) नसीहत व इबरत हैं
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
112आयत

अनुवाद — हूद 112

सूरा हूद आयत 112 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ रसूल) जैसा तुम्हें हुक्म दिया है तुम और…

सूरा आयत 112/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 110–114. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए