हूद · 12/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
فَلَعَلَّكَ تَارِكٌ بَعْضَ مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ وَضَائِقٌ بِهِ صَدْرُكَ أَن يَقُولُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ كَنزٌ أَوْ جَاءَ مَعَهُ مَلَكٌ ۚ إِنَّمَا أَنتَ نَذِيرٌ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ ۝١٢
Fala`allaka taarikum ba`da maa yoohaaa ilaika wa daaa`iqum bihee sadruka ai yaqooloo law laaa unzila `alaihi kanzun aw jaaa`a ma`ahoo malak; innamaa anta nazeer; wallaahu `alaa kulli shai`inw wakeel
📖 हिंदी अर्थ
तो जो चीज़ तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए से भेजी है उनमें से बाज़ को (सुनाने के वक्त) यायद तुम फक़त इस ख्याल से छोड़ देने वाले हो और तुम तंग दिल हो कि मुबादा ये लोग कह बैंठें कि उन पर खज़ाना क्यों नहीं नाज़िल किया गया या (उनके तसदीक के लिए) उनके साथ कोई फरिश्ता क्यों न आया तो तुम सिर्फ (अज़ाब से) डराने वाले हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَلَعَلَّكَ تَارِكٌ – शायद तुम छोड़ दो।
  • وَضَائِقٌ بِهِ صَدْرُكَ – और उससे तुम्हारा सीना तंग हो।
  • لَوْلَا – क्यों नहीं।
  • كَنزٌ – खज़ाना (धन-दौलत)।
  • نَذِيرٌ – डराने वाला (चेतावनी देने वाला)।
  • وَكِيلٌ – संरक्षक, प्रबंधक, देखभाल करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! कुफ़्फ़ार (इनकार करने वालों) के अत्याचार, हठधर्मिता और उनके द्वारा अनुचित माँगों के कारण शायद आपके मन में यह ख़याल आए कि उन्हें सच्चाई की ओर लाने के लिए या उनकी नाराज़गी से बचने के लिए उस वह़्य (प्रकाशना) का कुछ हिस्सा छोड़ दें जो अल्लाह ने आप पर उतारी है, या उसे पूरी तरह से सुनाने में संकोच करें। और जब आप उन्हें वह पैग़ाम सुनाते हैं जिसमें उनके माबूदों की निंदा और उनके आचरण की आलोचना होती है, तो आपका सीना तंग होता है, क्योंकि वे मज़ाक़ उड़ाते हुए कहते हैं: "इस आदमी पर खज़ाना क्यों नहीं उतारा गया? या इसके साथ कोई फ़रिश्ता क्यों नहीं आया जो इसकी पुष्टि करे?" वे ये बातें सच्चाई की तलाश में नहीं कहते, बल्कि हठ और उपहास के तौर पर कहते हैं।

अल्लाह तआला अपने नबी को तसल्ली देते हुए फ़रमाता है: आप इन बातों की परवाह न करें और उस पूरे पैग़ाम को पहुँचाएँ जो आप पर उतारा गया है। आपका काम केवल चेतावनी देना है, यानी लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराना। आप पर यह ज़िम्मेदारी नहीं है कि उनकी मनमानी माँगों को पूरा करें या उनके कहने पर कोई निशानी लाएँ। अल्लाह हर चीज़ का संरक्षक और प्रबंधक है; वह अपने बंदों के मामलों की देखभाल करता है, उनके दिलों को जानता है, और आपके पैग़ाम को पहुँचाने में आपकी मदद करेगा और आपकी हिफ़ाज़त करेगा। वही उनके इनकार और आपके धैर्य का हिसाब लेने वाला है।


फ़ायदे (सबक और शिक्षाएँ):

  1. पैग़ाम पहुँचाने में पूर्ण समर्पण: दावत-ए-दीन (इस्लाम का संदेश) पहुँचाने में किसी भी प्रकार की कमी या संकोच नहीं होना चाहिए, चाहे लोगों की प्रतिक्रिया कैसी भी हो। सच्चाई को बिना किसी डर के पेश करना चाहिए।
  2. नबी की मानवीय प्रकृति: यह आयत दिखाती है कि नबी भी इंसान थे और उन्हें भी लोगों के तानों और उपहास से दुख होता था, लेकिन अल्लाह ने उन्हें सब्र और हिम्मत दी। यह हमारे लिए सबक है कि कठिनाइयों में अल्लाह पर भरोसा रखें।
  3. ज़िम्मेदारी की सीमा: इंसान का काम केवल सच्चाई बताना है, लोगों को क़ुबूल करवाना नहीं। हमें परिणाम की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने फ़र्ज़ को अंजाम देना चाहिए।
  4. अल्लाह पर भरोसा: अल्लाह हर चीज़ का संरक्षक है। जब हम उसके दीन के लिए काम करते हैं, तो वह हमारी मदद करता है और हमारी हिफ़ाज़त करता है। यह भरोसा मुसलमान को साहस और स्थिरता प्रदान करता है।
  5. लोगों की अनुचित माँगों से विचलित न होना: काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों की माँगें अक्सर सच्चाई से भटकाने के लिए होती हैं। मुसलमान को चाहिए कि वह क़ुरआन और सुन्नत पर अटल रहे और ऐसी माँगों पर ध्यान न दे।


📜 आयत 10-14 — हूद

10وَلَئِنْ أَذَقْنَاهُ نَعْمَاءَ بَعْدَ ضَرَّاءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ السَّيِّئَاتُ عَنِّي ۚ إِنَّهُ لَفَرِحٌ فَخُورٌ
(और हमारी शिकायत करने लगता है) और अगर हम तकलीफ के बाद जो उसे पहुँचती थी राहत व आराम का जाएक़ा चखाए तो ज़रुर कहने लगता है कि अब तो सब सख्तियाँ मुझसे दफा हो गई इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा (जल्दी खुश) होने येख़ी बाज़ है
11إِلَّا الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أُولَٰئِكَ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ كَبِيرٌ
मगर जिन लोगों ने सब्र किया और अच्छे (अच्छे) काम किए (वह ऐसे नहीं) ये वह लोग हैं जिनके वास्ते (ख़ुदा की) बख़्शिस और बहुत बड़ी (खरी) मज़दूरी है
12فَلَعَلَّكَ تَارِكٌ بَعْضَ مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ وَضَائِقٌ بِهِ صَدْرُكَ أَن يَقُولُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ كَنزٌ أَوْ جَاءَ مَعَهُ مَلَكٌ ۚ إِنَّمَا أَنتَ نَذِيرٌ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ
तो जो चीज़ तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए से भेजी है उनमें से बाज़ को (सुनाने के वक्त) यायद तुम फक़त इस ख्याल से छोड़ देने वाले हो और तुम तंग दिल हो कि मुबादा ये लोग कह बैंठें कि उन पर खज़ाना क्यों नहीं नाज़िल किया गया या (उनके तसदीक के लिए) उनके साथ कोई फरिश्ता क्यों न आया तो तुम सिर्फ (अज़ाब से) डराने वाले हो
13أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ فَأْتُوا بِعَشْرِ سُوَرٍ مِّثْلِهِ مُفْتَرَيَاتٍ وَادْعُوا مَنِ اسْتَطَعْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
तुम्हें उनका ख्याल न करना चाहिए और ख़ुदा हर चीज़ का ज़िम्मेदार है क्या ये लोग कहते हैं कि उस शख़्श (तुम) ने इस (क़ुरान) को अपनी तरफ से गढ़ लिया है तो तुम (उनसे साफ साफ) कह दो कि अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो (ज्यादा नहीं) ऐसे दस सूरे अपनी तरफ से गढ़ के ले आओं
14فَإِلَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّمَا أُنزِلَ بِعِلْمِ اللَّهِ وَأَن لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ
और ख़ुदा के सिवा जिस जिस के तुम्हे बुलाते बन पड़े मदद के वास्ते बुला लो उस पर अगर वह तुम्हारी न सुने तो समझ ले कि (ये क़ुरान) सिर्फ ख़ुदा के इल्म से नाज़िल किया गया है और ये कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो क्या तुम अब भी इस्लाम लाओगे (या नहीं)
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अनुवाद — हूद 12

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Tuesday, August 18, 2026

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