अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- افْتَرَاهُ – इसे गढ़ लिया, इसे स्वयं रच लिया।
- مُفْتَرَيَاتٍ – गढ़ी हुई, मनगढ़ंत (जिन्हें तुम स्वयं रच लो)।
- مِنْ دُونِ اللهِ – अल्लाह के अतिरिक्त (अर्थात् अल्लाह के सिवा जिन्हें तुम पुकार सकते हो)।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या ये मक्का के मुशरिकीन कहते हैं कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यह क़ुरआन स्वयं गढ़ लिया है और इसे अल्लाह की ओर से होने का दावा करते हैं? यह उनका झूठ और निराधार आरोप है। ऐ नबी! आप उनसे कह दीजिए: यदि तुम सच्चे हो और तुम्हारा यह दावा सही है कि यह क़ुरआन किसी इंसान का बनाया हुआ है, तो तुम भी इसी जैसी दस सूरतें बनाकर लाओ, जो गढ़ी हुई हों (यानी तुम्हें सच्चाई की कोई पाबंदी नहीं, जो चाहे रच लो)। और अल्लाह के सिवा जिसे चाहो बुला लो—अपने देवताओं, काहिनों, सहायकों या किसी और को—ताकि वे तुम्हारी मदद करें। यदि तुम सच्चे हो तो यह करके दिखाओ।
यह एक खुला चैलेंज है। अल्लाह ने पूरे इतिहास में किसी को भी यह शक्ति नहीं दी कि वह क़ुरआन जैसी कोई चीज़ पेश कर सके, चाहे वह दस सूरतें ही क्यों न हों। यह स्वयं इस बात का प्रमाण है कि क़ुरआन अल्लाह का कलाम है, किसी इंसान की रचना नहीं। क़ुरआन की भाषा, उसका बलाग़त (वाक्चातुर्य), उसका गहरा अर्थ, उसकी सच्चाई और उसका प्रभाव—ये सब ऐसे हैं जिन्हें कोई इंसान पैदा नहीं कर सकता। अतः यह आरोप कि इसे मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने गढ़ा है, पूर्णतः निराधार और झूठ है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत क़ुरआन की अजीमुश्शान (महान) स्थिति को स्पष्ट करती है कि यह अल्लाह का कलाम है, और इसकी कोई मिसाल नहीं। यह हमारे दिलों में क़ुरआन की अज़मत और उसके प्रति सम्मान को बढ़ाती है।
- यह हमें सिखाती है कि सच्चाई के सामने झूठ कभी टिक नहीं सकता। जो लोग सच्चाई का विरोध करते हैं, उनके पास कोई ठोस दलील नहीं होती, केवल आरोप और बहाने होते हैं।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह ने अपने नबी की मदद की और उनके सच्चे होने का प्रमाण दिया। इससे हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह अपने नबियों की हिफ़ाज़त करता है और सच्चाई को बुलंद करता है।
- हमें चाहिए कि क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी सच्ची रहनुमाई है और इसमें हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।
📜 आयत 11-15 — हूद
अनुवाद — हूद 13
सूरा हूद आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम्हें उनका ख्याल न करना चाहिए और ख़ुदा हर चीज़…सूरा आयत 13/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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