हूद · 2/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ ۚ إِنَّنِي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ وَبَشِيرٌ ۝٢
Allaa ta`budooo illal laah; innanee lakum minhu nazeerunw wa basheer
📖 हिंदी अर्थ
फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बेहिश्त की) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَلَّا تَعْبُدُوا: यह कि तुम इबादत न करो।
  • نَذِيرٌ: डराने वाला, जो अल्लाह के अज़ाब से आगाह करे।
  • بَشِيرٌ: खुशखबरी देने वाला, जो अल्लाह के सवाब (इनाम) की खुशी सुनाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत का मतलब यह है कि यह क़ुरआन और उसकी आयतें इसलिए उतारी गईं और उनके अहकाम (आदेश) इसलिए बयान किए गए, ताकि लोग सिर्फ़ अल्लाह ही की इबादत करें और उसके साथ किसी को शरीक न ठहराएँ। अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को हिदायत दी कि वे लोगों से कहें: "मैं तुम्हारे लिए अल्लाह की तरफ से डराने वाला और खुशखबरी देने वाला हूँ।" यानी मैं तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से डराता हूँ अगर तुम कुफ़्र करो और उसकी नाफ़रमानी करो, और मैं तुम्हें उसके सवाब की खुशखबरी देता हूँ अगर तुम ईमान लाओ और उसके हुक्मों पर अमल करो। यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) की बुनियादी शिक्षा को स्पष्ट करती है, जो हर नबी का मूल संदेश रहा है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. इस आयत से सबसे बड़ा सबक़ यह है कि इबादत सिर्फ़ अल्लाह की होनी चाहिए, और यही दीन का ख़ुलासा है। जिसने तौहीद को अपना लिया, उसने दीन की नींव मज़बूत कर ली।
  2. अल्लाह का रसूल ﷺ अपनी उम्मत के लिए रहमत हैं, क्योंकि वे डराने और खुशखबरी देने दोनों काम करते हैं — डर अज़ाब से आगाह करने के लिए और खुशी सवाब की उम्मीद दिलाने के लिए। यह बताता है कि इस्लाम में डर और उम्मीद दोनों का संतुलन है, ताकि इंसान न तो निराश हो और न ही लापरवाह।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और उसका अज़ाब दोनों हक़ीक़त हैं। जो ईमान और नेक अमल अपनाए, उसके लिए खुशखबरी है; और जो कुफ़्र और नाफ़रमानी करे, उसके लिए डर है। यही बात इंसान को अच्छे कामों की तरफ़ राग़िब करती है और बुरे कामों से रोकती है।
  4. इस आयत में नबी ﷺ का अपनी उम्मत के प्रति शफ़्क़त और मुहब्बत का इज़हार है, क्योंकि वे लोगों को अज़ाब से बचाने और सवाब तक पहुँचाने के लिए भेजे गए हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें भी अपने भाइयों को भलाई की तरफ़ बुलाना चाहिए और बुराई से डराना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — हूद

1الر ۚ كِتَابٌ أُحْكِمَتْ آيَاتُهُ ثُمَّ فُصِّلَتْ مِن لَّدُنْ حَكِيمٍ خَبِيرٍ
अलिफ़ लाम रा - ये (क़ुरान) वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से (दलाएल से) खूब मुस्तहकिम (मज़बूत) कर दी गयीं
2أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ ۚ إِنَّنِي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ وَبَشِيرٌ
फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बेहिश्त की) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ
3وَأَنِ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوا إِلَيْهِ يُمَتِّعْكُم مَّتَاعًا حَسَنًا إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى وَيُؤْتِ كُلَّ ذِي فَضْلٍ فَضْلَهُ ۖ وَإِن تَوَلَّوْا فَإِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ كَبِيرٍ
और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुर्ज़गी को उसकी बुर्जुगी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर है
4إِلَى اللَّهِ مَرْجِعُكُمْ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
(याद रखो) तुम सब को (आख़िरकार) ख़ुदा ही की तरफ लौटना है और वह हर चीज़ पर (अच्छी तरह) क़ादिर है
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अनुवाद — हूद 2

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सूरा आयत 2/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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