हूद · 1/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
الر ۚ كِتَابٌ أُحْكِمَتْ آيَاتُهُ ثُمَّ فُصِّلَتْ مِن لَّدُنْ حَكِيمٍ خَبِيرٍ ۝١
Alif-Laaam-Raa; Kitaabun uhkimat Aayaatuhoo summa fussilat mil ladun Hakeemin Khabeer
📖 हिंदी अर्थ
अलिफ़ लाम रा - ये (क़ुरान) वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से (दलाएल से) खूब मुस्तहकिम (मज़बूत) कर दी गयीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الر: ये हुरूफ़े-मुक़त्तआत (अलग-अलग अक्षर) हैं, जिनके बारे में विद्वानों ने कहा है कि ये उन रहस्यों में से हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने इल्म के साथ ख़ास रखा है। इनका असली मतलब अल्लाह ही बेहतर जानता है। इसी तरह के अक्षर सूरह बक़रा की शुरुआत में भी आए हैं।
  • أُحْكِمَتْ: मज़बूत और पुख़्ता बनाई गईं, जिनमें कोई कमी, विरोधाभास या ख़राबी न हो।
  • فُصِّلَتْ: स्पष्ट रूप से बयान की गईं, अलग-अलग विषयों में विस्तार से समझाई गईं।
  • مِن لَّدُنْ: की ओर से, के पास से।
  • حَكِيمٍ: बड़ी हिकमत वाला, जो हर काम में सही और उचित फ़ैसला करता है।
  • خَبِيرٍ: हर चीज़ की पूरी ख़बर रखने वाला, जो बाहरी और भीतरी सब कुछ जानता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है: "अलिफ़-लाम-रा।" ये वो हुरूफ़ हैं जिनका असली इल्म सिर्फ़ अल्लाह को है। इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि ये क़ुरआन एक ऐसी किताब है जिसकी आयात को बड़ी मज़बूती और पुख़्तगी के साथ नाज़िल किया गया है। इसकी आयात में कोई विरोधाभास नहीं, कोई कमी नहीं और कोई ख़राबी नहीं। हर आयत अपने मक़ाम पर बिल्कुल सही और मुनासिब है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि इस किताब की आयात को "तफ़सील" (विस्तार) दिया गया है, यानी उन्हें साफ़-साफ़ बयान किया गया है। इसमें हलाल और हराम, अच्छे काम और बुरे काम, वादे और डरावनी चेतावनियाँ, पिछली उम्मतों के क़िस्से और हिदायत के लिए ज़रूरी हर चीज़ को अलग-अलग करके स्पष्ट रूप से समझाया गया है।

ये सब कुछ उस अल्लाह की तरफ़ से है जो हकीम है, यानी अपने हर फ़ैसले और हुक्म में पूरी हिकमत रखता है। उसका हर काम सही है और उसकी हर तक़रीर (बात) उचित है। वह ख़बीर भी है, यानी उसे अपने बंदों के हालात, उनकी ज़रूरतों और उनके दिलों की हालत का पूरा इल्म है। इसलिए उसने जो कुछ भी इस किताब में नाज़िल किया है, वह बिल्कुल उनके लिए मुनासिब और बेहतरीन है।


फ़ायदे (सबक़):

  1. क़ुरआन की किताब अल्लाह की तरफ़ से है: ये आयत साबित करती है कि क़ुरआन कोई इंसानी किताब नहीं, बल्कि अल्लाह की नाज़िल की हुई किताब है, जो हर तरह की कमी से पाक है।
  2. क़ुरआन में कोई कमी नहीं: जिस तरह अल्लाह ने इस किताब को मज़बूत और पुख़्ता बनाया है, उसी तरह ये हमारे लिए हिदायत का सबसे भरोसेमंद ज़रिया है। हमें इस पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए।
  3. अल्लाह की हिकमत और इल्म पर भरोसा: अल्लाह हकीम और ख़बीर है, यानी वह जानता है कि उसके बंदों के लिए क्या बेहतर है। इसलिए हमें उसके हुक्मों को दिल से क़बूल करना चाहिए, चाहे हमारी समझ में उसकी हिकमत न भी आए।
  4. क़ुरआन को पढ़ना और समझना: जब ये किताब इतनी स्पष्ट और विस्तृत है, तो हमारा फ़र्ज़ है कि इसे पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी में लागू करें। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।
  5. अल्लाह की तरफ़ से रहमत: ये किताब अल्लाह की बड़ी रहमत है, जो उसने अपने बंदों पर नाज़िल की है, ताकि वे अंधेरों से निकलकर रोशनी की तरफ़ आएँ।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-3 — हूद

1الر ۚ كِتَابٌ أُحْكِمَتْ آيَاتُهُ ثُمَّ فُصِّلَتْ مِن لَّدُنْ حَكِيمٍ خَبِيرٍ
अलिफ़ लाम रा - ये (क़ुरान) वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से (दलाएल से) खूब मुस्तहकिम (मज़बूत) कर दी गयीं
2أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ ۚ إِنَّنِي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ وَبَشِيرٌ
फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बेहिश्त की) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ
3وَأَنِ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوا إِلَيْهِ يُمَتِّعْكُم مَّتَاعًا حَسَنًا إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى وَيُؤْتِ كُلَّ ذِي فَضْلٍ فَضْلَهُ ۖ وَإِن تَوَلَّوْا فَإِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ كَبِيرٍ
और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुर्ज़गी को उसकी बुर्जुगी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर है
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Tuesday, August 18, 2026

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