हूद · 64/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَيَا قَوْمِ هَٰذِهِ نَاقَةُ اللَّهِ لَكُمْ آيَةً فَذَرُوهَا تَأْكُلْ فِي أَرْضِ اللَّهِ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابٌ قَرِيبٌ ۝٦٤
Wa yaa qawmi haazihee naaqatul laahi lakum aayatan fazaroohaa taakul feee ardil laahi wa laa tamassoohaa bisooo`in fa yaakhuzakum azaabun qareeb
📖 हिंदी अर्थ
ऐ मेरी क़ौम ये ख़ुदा की (भेजी हुई) ऊँटनी है तुम्हारे वास्ते (मेरी नबूवत का) एक मौजिज़ा है तो इसको (उसके हाल पर) छोड़ दो कि ख़ुदा की ज़मीन में (जहाँ चाहे) खाए और उसे कोई तकलीफ न पहुँचाओ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَاقَةُ اللَّهِ: अल्लाह की ऊँटनी।
  • آيَةً: निशानी, प्रमाण, चमत्कार।
  • فَذَرُوهَا: उसे छोड़ दो।
  • تَأْكُلْ فِي أَرْضِ اللَّهِ: अल्लाह की धरती में चरती रहे।
  • بِسُوءٍ: किसी बुराई या नुक़सान के साथ (यहाँ अर्थ है उसे मारना या ज़ख़्मी करना)।
  • عَذَابٌ قَرِيبٌ: निकट का अज़ाब (जो उसी वक़्त या बहुत जल्द आ जाए)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह अल्लाह की ऊँटनी है, जिसे अल्लाह ने तुम्हारे लिए एक निशानी और प्रमाण बनाया है। यह मेरी सच्चाई की गवाह है, कि मैं जो कुछ कहता हूँ वह अल्लाह की तरफ़ से है। तुमने मुझसे एक चमत्कार माँगा था, और अल्लाह ने तुम्हारी माँग पूरी करते हुए यह ऊँटनी एक चट्टान से निकाली है। अब यह तुम्हारे सामने जीती-जागती निशानी के रूप में मौजूद है।

इसलिए, उसे छोड़ दो कि वह अल्लाह की धरती पर चरती रहे। उसके खाने-पीने की ज़िम्मेदारी तुम पर नहीं है, अल्लाह ही उसे रोज़ी देता है। उसे किसी भी प्रकार का नुक़सान मत पहुँचाओ, न उसे मारो और न ही उसे ज़ख़्मी करो। यदि तुमने उसे कोई तकलीफ़ दी या उसके साथ बुराई की, तो अल्लाह का अज़ाब तुम पर आ जाएगा, और वह अज़ाब बहुत निकट होगा — यानी तुम्हारे उस बुरे काम के तुरंत बाद ही आ जाएगा। यह अज़ाब तीन दिनों के भीतर आने वाला था, जैसा कि अल्लाह ने अपने नबी सालिह (अलैहिस्सलाम) के ज़रिए बताया था।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह के नबी अपनी क़ौम के लिए सिर्फ़ ख़ैर और भलाई चाहते हैं। वे लोगों को अज़ाब से डराते हैं ताकि वे सीधे रास्ते पर आ जाएँ, और यही उनकी दया और शफ़्क़त का सबूत है।
  2. अल्लाह के निशानियों का सम्मान करना चाहिए। जब अल्लाह कोई चमत्कार या निशानी दिखाता है, तो उसका मज़ाक़ उड़ाना या उसे नुक़सान पहुँचाना अल्लाह की नाफ़रमानी है और उसका अंजाम बहुत बुरा होता है।
  3. अल्लाह की रहमत और उसका अज़ाब दोनों क़रीब हैं। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह की नाफ़रमानी से बचे, क्योंकि अज़ाब किसी भी वक़्त आ सकता है — जब इंसान को उम्मीद न हो।
  4. यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के हुक्मों की खिलाफ़वर्ज़ी करने वालों का अंजाम तबाही है, जबकि अल्लाह के हुक्मों का पालन करने वालों के लिए सुकून और कामयाबी है। इस्लाम हमें अल्लाह की रहमत की तरफ़ बुलाता है और उसके अज़ाब से बचने की तरकीब सिखाता है — और वह तरकीब है ईमान, इताअत और अच्छे अख़लाक़।
🎧 सुनें

📜 आयत 62-66 — हूद

62قَالُوا يَا صَالِحُ قَدْ كُنتَ فِينَا مَرْجُوًّا قَبْلَ هَٰذَا ۖ أَتَنْهَانَا أَن نَّعْبُدَ مَا يَعْبُدُ آبَاؤُنَا وَإِنَّنَا لَفِي شَكٍّ مِّمَّا تَدْعُونَا إِلَيْهِ مُرِيبٍ
वह लोग कहने लगे ऐ सालेह इसके पहले तो तुमसे हमारी उम्मीदें वाबस्ता थी तो क्या अब तुम जिस चीज़ की परसतिश हमारे बाप दादा करते थे उसकी परसतिश से हमें रोकते हो और जिस दीन की तरफ तुम हमें बुलाते हो हम तो उसकी निस्बत ऐसे शक़ में पड़े हैं
63قَالَ يَا قَوْمِ أَرَأَيْتُمْ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّي وَآتَانِي مِنْهُ رَحْمَةً فَمَن يَنصُرُنِي مِنَ اللَّهِ إِنْ عَصَيْتُهُ ۖ فَمَا تَزِيدُونَنِي غَيْرَ تَخْسِيرٍ
कि उसने हैरत में डाल दिया है सालेह ने जवाब दिया ऐ मेरी क़ौम भला देखो तो कि अगर मैं अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हूँ और उसने मुझे अपनी (बारगाह) मे रहमत (नबूवत) अता की है इस पर भी अगर मै उसकी नाफ़रमानी करुँ तो ख़ुदा (के अज़ाब से बचाने में) मेरी मदद कौन करेगा-फिर तुम सिवा नुक़सान के मेरा कुछ बढ़ा दोगे नहीं
64وَيَا قَوْمِ هَٰذِهِ نَاقَةُ اللَّهِ لَكُمْ آيَةً فَذَرُوهَا تَأْكُلْ فِي أَرْضِ اللَّهِ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابٌ قَرِيبٌ
ऐ मेरी क़ौम ये ख़ुदा की (भेजी हुई) ऊँटनी है तुम्हारे वास्ते (मेरी नबूवत का) एक मौजिज़ा है तो इसको (उसके हाल पर) छोड़ दो कि ख़ुदा की ज़मीन में (जहाँ चाहे) खाए और उसे कोई तकलीफ न पहुँचाओ
65فَعَقَرُوهَا فَقَالَ تَمَتَّعُوا فِي دَارِكُمْ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ ۖ ذَٰلِكَ وَعْدٌ غَيْرُ مَكْذُوبٍ
(वरना) फिर तुम्हें फौरन ही (ख़ुदा का) अज़ाब ले डालेगा इस पर भी उन लोगों ने उसकी कूँचे काटकर (मार) डाला तब सालेह ने कहा अच्छा तीन दिन तक (और) अपने अपने घर में चैन (उड़ा लो)
66فَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا صَالِحًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَمِنْ خِزْيِ يَوْمِئِذٍ ۗ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْقَوِيُّ الْعَزِيزُ
यही ख़ुदा का वायदा है जो कभी झूठा नहीं होता फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने सालेह और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दी और उस दिन की रुसवाई से बचा लिया इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार ज़बरदस्त ग़ालिब है
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
64आयत

अनुवाद — हूद 64

सूरा हूद आयत 64 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ मेरी क़ौम ये ख़ुदा की (भेजी हुई) ऊँटनी है…

सूरा आयत 64/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 62–66. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए