अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- اسْتَجَابُوا: अर्थात आज्ञा मानी, पुकार पर लबेद कहा।
- الْحُسْنَى: सर्वोत्तम प्रतिफल, अर्थात जन्नत।
- لَافْتَدَوْا بِهِ: उसके बदले में (अपनी मुक्ति के लिए) फिदया (मुआवज़ा) दे डालें।
- سُوءُ الْحِسَابِ: कठोर हिसाब, जिसमें हर छोटे-बड़े गुनाह की पूछ-गछ हो और कोई बात माफ़ न की जाए।
- الْمِهَادُ: बिछौना, आरामगाह।
तफसीर:
जिन लोगों ने अपने रब की पुकार पर लब्बैक कहा — यानी उसके एक होने की गवाही दी, उसकी इबादत की और उसके रसूल की आज्ञा का पालन किया — उनके लिए सबसे उत्तम प्रतिफल है, जो जन्नत है और वह सब कुछ है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है। यह उनकी आज्ञाकारिता का फल है।
इसके विपरीत, जिन लोगों ने उसकी पुकार को नहीं माना और कुफ्र व इनकार पर डटे रहे, उनका हाल यह होगा कि क़यामत के दिन जब वे अज़ाब को अपनी आँखों से देखेंगे, तो वे चाहेंगे कि काश उनके पास धरती का सारा धन-दौलत हो और उसके साथ उतना ही और भी हो, तो वे उसे अपनी जान बचाने के लिए फिदया (मुआवज़े) के रूप में दे डालें। लेकिन यह फिदया उनसे क़बूल नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह ईमान और अच्छे आमाल के बिना बेकार है।
ऐसे लोगों का हिसाब बहुत सख्त होगा — उनसे उनके हर गुनाह का हिसाब लिया जाएगा, कोई नेकी उनके पलड़े में नहीं होगी जो उन्हें बचा सके। उनका ठिकाना जहन्नम है, जो उनके लिए बिछौना और आरामगाह होगी। और वह बिछौना कितना बुरा है!
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की पुकार पर लब्बैक कहना ही सफलता और भलाई की कुंजी है। जो जितनी शिद्दत से अल्लाह की तरफ़ रुजू करता है, उसे उतना ही बेहतरीन इनाम मिलता है।
- यह आयत हमें दुनिया की मोहब्बत से बचाती है और बताती है कि दुनिया का सारा खज़ाना भी अगर आदमी के पास हो, तो भी वह अल्लाह के अज़ाब से उसे नहीं बचा सकता। असली निजात सिर्फ ईमान और नेक आमाल में है।
- यहाँ अल्लाह ने यह भी बताया कि क़यामत के दिन कुछ लोगों का हिसाब बहुत सख्त होगा। यह हमें चेतावनी देता है कि हम अपने हर अमल का हिसाब देना है, इसलिए ज़िंदगी में सावधानी से काम लें और गुनाहों से बचें।
- इस आयत में जन्नत को "الحسنى" (सबसे अच्छा बदला) कहा गया है, जो दर्शाता है कि अल्लाह की रहमत और इनाम इतना बड़ा है कि उसकी कोई मिसाल नहीं। यह मोमिनों के लिए बड़ी खुशखबरी और हौसला बढ़ाने वाली बात है।
📜 आयत 16-20 — अर-राद
अनुवाद — अर-राद 18
सूरा अर-राद आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन लोगों ने अपने परवरदिगार का कहना माना उनके लिए…सूरा आयत 18/43 — अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-राद सुनें, अर-राद अनुवाद, अर-राद mp3, अर-राद pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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