अर-राद · 3/43
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-राद
وَهُوَ الَّذِي مَدَّ الْأَرْضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنْهَارًا ۖ وَمِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ جَعَلَ فِيهَا زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ ۖ يُغْشِي اللَّيْلَ النَّهَارَ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ ۝٣
Wa Huwal lazee maddal arda wa ja`ala feehaa rawaasiya wa anhaaraa; wa min kullis samaraati ja`ala feehaa zawjainis yaini Yughshil lailan nahaar; inna fee zaalika la aayaatil liqawminy yatafakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
(अपनी) आयतें तफसीलदार बयान करता है और वह वही है जिसने ज़मीन को बिछाया और उसमें (बड़े बड़े) अटल पहाड़ और दरिया बनाए और उसने हर तरह के मेवों की दो दो किस्में पैदा की (जैसे खट्टे मीठे) वही रात (के परदे) से दिन को ढाक देता है इसमें शक़ नहीं कि जो लोग और ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मद्दल अर्द: धरती को फैलाना, विस्तृत करना।
  • रवासी: पहाड़, जो धरती को जमाए रखते हैं।
  • ज़ौजैन: दो प्रकार, दो किस्में (जैसे मीठा और खट्टा, सफेद और काला)।
  • युगशी: ढकना, छिपाना (रात का दिन को ढक लेना)।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की कुदरत और उसकी बेमिसाल रचना के कुछ अजीबोगरीब नमूने पेश करती है। अल्लाह ही वह है जिसने इस विशाल धरती को बिछाया और फैलाया, ताकि इंसान उस पर आराम से रह सके, चल-फिर सके और अपनी ज़रूरतें पूरी कर सके। उसी ने इस धरती में पहाड़ों को गाड़ दिया, जो मेखों (खूँटों) की तरह इसे जमाए रखते हैं, ताकि यह अपने रहने वालों को लेकर झुके या डगमगाए नहीं। उसी ने धरती में नदियाँ जारी कीं, जो पानी का सिलसिला हैं और इंसानों, जानवरों और खेती के लिए जीवन का साधन हैं।

फिर अल्लाह ने धरती में हर प्रकार के फलों की दो-दो किस्में पैदा कीं — जैसे मीठा और खट्टा, सफेद और काला, छोटा और बड़ा। यह विविधता और अलग-अलग रंग-रूप, स्वाद और खुशबू इस बात का सबूत है कि यह सब किसी एक कारीगर की बनाई हुई चीज़ है, जो अपनी हिकमत से सब कुछ बनाता है। इसी तरह, अल्लाह रात को दिन पर ओढ़ा देता है, यानी रात की तारीकी दिन की रोशनी को ढक लेती है, और फिर दिन आकर रात को ढक लेता है। यह नियमित बदलाव, जो कभी नहीं रुकता, अल्लाह की कुदरत की एक और निशानी है।

इन सब चीज़ों में — धरती का फैलाव, पहाड़ों की मज़बूती, नदियों का बहाव, फलों की किस्में, और रात-दिन का बदलना — उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं जो सोचते-समझते हैं। जो इन पर ग़ौर करता है, वह अल्लाह की कुदरत, उसकी हिकमत और उसकी रहमत को पहचान लेता है और उसके आगे सर झुका देता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि कुदरत की हर चीज़ को ग़ौर से देखना चाहिए। जो इंसान सोचता है, वही अल्लाह की कुदरत को पहचान पाता है और उसकी इबादत की ओर रुख करता है।
  2. धरती, पहाड़, नदियाँ और फल — ये सब अल्लाह की रहमत के खज़ाने हैं। इन पर ध्यान देने से इंसान का दिल अल्लाह की मुहब्बत से भर जाता है और वह उसका शुक्र अदा करता है।
  3. रात और दिन का बदलना हमें याद दिलाता है कि इस दुनिया का सिलसिला किसी कारीगर के हाथ में है। जो इसे बदलता है, वही क़यामत के दिन हमें ज़िंदा करके हिसाब लेगा। यह ईमान और आख़िरत की याद दिलाता है।
  4. फलों की विविधता और उनके अलग-अलग स्वाद इस बात की दलील है कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। यह हमें सिखाता है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी दी हुई नेमतों का सही इस्तेमाल करें।


📜 आयत 1-5 — सूरा अर-राद

1المر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ ۗ وَالَّذِي أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ الْحَقُّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब (क़ुरान) की आयतें है और तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से जो कुछ तुम्हारे पास नाज़िल किया गया है बिल्कुल ठीक है मगर बहुतेरे लोग ईमान नहीं लाते
2اللَّهُ الَّذِي رَفَعَ السَّمَاوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا ۖ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ يُدَبِّرُ الْأَمْرَ يُفَصِّلُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُم بِلِقَاءِ رَبِّكُمْ تُوقِنُونَ
ख़ुदा वही तो है जिसने आसमानों को जिन्हें तुम देखते हो बग़ैर सुतून (खम्बों) के उठाकर खड़ा कर दिया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और सूरज और चाँद को (अपना) ताबेदार बनाया कि हर एक वक्त मुक़र्ररा तक चला करते है वही (दुनिया के) हर एक काम का इन्तेज़ाम करता है और इसी ग़रज़ से कि तुम लोग अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होने का यक़ीन करो
3وَهُوَ الَّذِي مَدَّ الْأَرْضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنْهَارًا ۖ وَمِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ جَعَلَ فِيهَا زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ ۖ يُغْشِي اللَّيْلَ النَّهَارَ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
(अपनी) आयतें तफसीलदार बयान करता है और वह वही है जिसने ज़मीन को बिछाया और उसमें (बड़े बड़े) अटल पहाड़ और दरिया बनाए और उसने हर तरह के मेवों की दो दो किस्में पैदा की (जैसे खट्टे मीठे) वही रात (के परदे) से दिन को ढाक देता है इसमें शक़ नहीं कि जो लोग और ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
4وَفِي الْأَرْضِ قِطَعٌ مُّتَجَاوِرَاتٌ وَجَنَّاتٌ مِّنْ أَعْنَابٍ وَزَرْعٌ وَنَخِيلٌ صِنْوَانٌ وَغَيْرُ صِنْوَانٍ يُسْقَىٰ بِمَاءٍ وَاحِدٍ وَنُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَىٰ بَعْضٍ فِي الْأُكُلِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और खुरमों (खजूर) के दरख्त की एक जड़ और दो याखें और बाज़ अकेला (एक ही याख़ का) हालॉकि सब एक ही पानी से सीचे जाते हैं और फलों में बाज़ को बाज़ पर हम तरजीह देते हैं बेशक जो लोग अक़ल वाले हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
5۞ وَإِن تَعْجَبْ فَعَجَبٌ قَوْلُهُمْ أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا أَإِنَّا لَفِي خَلْقٍ جَدِيدٍ ۗ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ الْأَغْلَالُ فِي أَعْنَاقِهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और अगर तुम्हें (किसी बात पर) ताज्जुब होता है तो उन कुफ्फारों को ये क़ौल ताज्जुब की बात है कि जब हम (सड़गल कर) मिट्टी हो जाएंगें तो क्या हम (फिर दोबारा) एक नई जहन्नुम में आंऎंगें ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार के साथ कुफ्र किया और यही वह लोग हैं जिनकी गर्दनों में (क़यामत के दिन) तौक़ पड़े होगें और यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये इसमें हमेशा रहेगें
अर-रादकुरान सूची
43आयत
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3आयत

अनुवाद — अर-राद 3

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Wednesday, September 30, 2026

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