अर-राद · 4/43
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-राद
وَفِي الْأَرْضِ قِطَعٌ مُّتَجَاوِرَاتٌ وَجَنَّاتٌ مِّنْ أَعْنَابٍ وَزَرْعٌ وَنَخِيلٌ صِنْوَانٌ وَغَيْرُ صِنْوَانٍ يُسْقَىٰ بِمَاءٍ وَاحِدٍ وَنُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَىٰ بَعْضٍ فِي الْأُكُلِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ ۝٤
Wa fil ardi qita`um muta jaawiraatunw wa jannaatum min a`naabinw wa zar`unw wa nakheelun sinwaanunw wa ghairu sinwaaniny yusqaa bimaaa`inw waahid; wa nufaddilu ba`dahaa `alaa ba`din fil-ukul; inna fee zaalika la aayaatil liqawminy ya`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
और खुरमों (खजूर) के दरख्त की एक जड़ और दो याखें और बाज़ अकेला (एक ही याख़ का) हालॉकि सब एक ही पानी से सीचे जाते हैं और फलों में बाज़ को बाज़ पर हम तरजीह देते हैं बेशक जो लोग अक़ल वाले हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قِطَعٌ مُتَجَاوِرَاتٌ: पास-पास स्थित भूमि के टुकड़े।
  • جَنَّاتٌ: बाग़।
  • صِنْوَانٌ: वे खजूर के पेड़ जो एक ही जड़ से निकले हों।
  • غَيْرُ صِنْوَانٍ: वे खजूर के पेड़ जो अलग-अलग जड़ों से हों।
  • يُسْقَىٰ: सींचा जाता है।
  • الْأُكُلِ: फल, उपज, खाने की चीज़ें।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी क़ुदरत के अज़ीम नमूने पेश किए हैं। वह फ़रमाता है कि धरती में कई भू-भाग पास-पास हैं, फिर भी उनकी प्रकृति अलग-अलग है। कोई ज़मीन उपजाऊ और अच्छी है जो फ़सलें उगाती है, तो कोई खारी और बंजर है जिसमें कुछ नहीं उगता। उसी धरती में अंगूरों के बाग़ हैं, खेती के खेत हैं, और खजूर के पेड़ हैं—कुछ ऐसे जो एक ही जड़ से कई पेड़ निकले हैं (सिनवान) और कुछ अलग-अलग जड़ों वाले हैं। इन सबको एक ही पानी से सींचा जाता है, फिर भी अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से इनके फलों में अंतर रखा है—कोई मीठा, कोई खट्टा, कोई बड़ा, कोई छोटा, कोई बेहतर स्वाद वाला, कोई कम। इसी तरह एक ही मिट्टी और एक ही पानी के बावजूद अल्लाह किसी फल को दूसरे पर फ़ाज़िलत देता है। इसमें कोई शक नहीं कि इन सारी चीज़ों में उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ हैं जो अक़्ल से काम लेते हैं, ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं और इनसे अल्लाह की वहदानियत और क़ुदरत पर दलील पकड़ते हैं।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि कुदरत के नज़ारों पर ग़ौर करना इबादत है। जो लोग अक़्ल और दिल से इन पर विचार करते हैं, वे अल्लाह की अज़मत को पहचान लेते हैं।
  2. एक ही ज़मीन, एक ही पानी, फिर भी अलग-अलग फल—यह साबित करता है कि यह सब किसी हकीम और क़ादिर (सर्वशक्तिमान) के इख़्तियार में है, न कि कुदरत का कोई अंधा खेल।
  3. इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि अल्लाह ने लोगों को भी अलग-अलग योग्यताएँ और गुण दिए हैं। जिस तरह फलों में एक दूसरे पर फ़ाज़िलत है, उसी तरह इंसानों में भी अल्लाह की मर्ज़ी से फ़र्क़ है—ताकि वे एक-दूसरे के काम आएँ और समाज में तकमील (पूर्णता) हो।
  4. यह आयत शुक्रगुज़ारी की तरफ़ भी इशारा करती है—जब हम अलग-अलग फल और अनाज देखें, तो अल्लाह का शुक्र अदा करें जिसने अपनी रहमत से यह सब पैदा किया।
  5. आख़िर में, यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि जो लोग अक़्ल से काम लेते हैं, वे कभी अल्लाह की वहदानियत से इनकार नहीं कर सकते, क्योंकि ये निशानियाँ हर तरफ़ बिखरी हुई हैं।


📜 आयत 2-6 — सूरा अर-राद

2اللَّهُ الَّذِي رَفَعَ السَّمَاوَاتِ بِغَيْرِ عَمَدٍ تَرَوْنَهَا ۖ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ يُدَبِّرُ الْأَمْرَ يُفَصِّلُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُم بِلِقَاءِ رَبِّكُمْ تُوقِنُونَ
ख़ुदा वही तो है जिसने आसमानों को जिन्हें तुम देखते हो बग़ैर सुतून (खम्बों) के उठाकर खड़ा कर दिया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और सूरज और चाँद को (अपना) ताबेदार बनाया कि हर एक वक्त मुक़र्ररा तक चला करते है वही (दुनिया के) हर एक काम का इन्तेज़ाम करता है और इसी ग़रज़ से कि तुम लोग अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होने का यक़ीन करो
3وَهُوَ الَّذِي مَدَّ الْأَرْضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنْهَارًا ۖ وَمِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ جَعَلَ فِيهَا زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ ۖ يُغْشِي اللَّيْلَ النَّهَارَ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
(अपनी) आयतें तफसीलदार बयान करता है और वह वही है जिसने ज़मीन को बिछाया और उसमें (बड़े बड़े) अटल पहाड़ और दरिया बनाए और उसने हर तरह के मेवों की दो दो किस्में पैदा की (जैसे खट्टे मीठे) वही रात (के परदे) से दिन को ढाक देता है इसमें शक़ नहीं कि जो लोग और ग़ौर व फिक्र करते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
4وَفِي الْأَرْضِ قِطَعٌ مُّتَجَاوِرَاتٌ وَجَنَّاتٌ مِّنْ أَعْنَابٍ وَزَرْعٌ وَنَخِيلٌ صِنْوَانٌ وَغَيْرُ صِنْوَانٍ يُسْقَىٰ بِمَاءٍ وَاحِدٍ وَنُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَىٰ بَعْضٍ فِي الْأُكُلِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और खुरमों (खजूर) के दरख्त की एक जड़ और दो याखें और बाज़ अकेला (एक ही याख़ का) हालॉकि सब एक ही पानी से सीचे जाते हैं और फलों में बाज़ को बाज़ पर हम तरजीह देते हैं बेशक जो लोग अक़ल वाले हैं उनके लिए इसमें (कुदरत खुदा की) बहुतेरी निशानियाँ हैं
5۞ وَإِن تَعْجَبْ فَعَجَبٌ قَوْلُهُمْ أَإِذَا كُنَّا تُرَابًا أَإِنَّا لَفِي خَلْقٍ جَدِيدٍ ۗ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ الْأَغْلَالُ فِي أَعْنَاقِهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और अगर तुम्हें (किसी बात पर) ताज्जुब होता है तो उन कुफ्फारों को ये क़ौल ताज्जुब की बात है कि जब हम (सड़गल कर) मिट्टी हो जाएंगें तो क्या हम (फिर दोबारा) एक नई जहन्नुम में आंऎंगें ये वही लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार के साथ कुफ्र किया और यही वह लोग हैं जिनकी गर्दनों में (क़यामत के दिन) तौक़ पड़े होगें और यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये इसमें हमेशा रहेगें
6وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالسَّيِّئَةِ قَبْلَ الْحَسَنَةِ وَقَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِمُ الْمَثُلَاتُ ۗ وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍ لِّلنَّاسِ عَلَىٰ ظُلْمِهِمْ ۖ وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَدِيدُ الْعِقَابِ
और (ऐ रसूल) ये लोग तुम से भलाई के क़ब्ल ही बुराई (अज़ाब) की जल्दी मचा रहे हैं हालॉकि उनके पहले (बहुत से लोगों की) सज़ाएं हो चुकी हैं और इसमें शक़ नहीं की तुम्हारा परवरदिगार बावजूद उनकी शरारत के लोगों पर बड़ा बख़शिश (करम) वाला है और इसमें भी शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सख्त अज़ाब वाला है
अर-रादकुरान सूची
43आयत
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4आयत

अनुवाद — अर-राद 4

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Monday, September 28, 2026

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