अल-हिज्र · 9/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ ۝٩
Innaa Nahnu nazalnaz Zikra wa Innaa lahoo lahaa fizoon
📖 हिंदी अर्थ
बेशक हम ही ने क़ुरान नाज़िल किया और हम ही तो उसके निगेहबान भी हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الذِّكْر (अज़-ज़िक्र): यहाँ इससे अभिप्राय क़ुरआन करीम है, जो सारे जहान के लिए नसीहत और याददिहानी है।
  • لَحَافِظُونَ (ला-हाफ़िज़ून): हिफ़ाज़त करने वाले, यानी हर तरह की तब्दीली, कमी-बेशी और तहरीफ़ से महफ़ूज़ रखने वाले।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने ही यह ज़िक्र (क़ुरआन) अपने नबी मुहम्मद ﷺ पर उतारा है, ताकि लोगों को नसीहत और हिदायत दी जाए। यह बात उन लोगों के इनकार के जवाब में है जो इस बात को नहीं मानते थे कि क़ुरआन अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हुआ है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस तरह हमने इसे नाज़िल किया है, उसी तरह हम इसकी पूरी हिफ़ाज़त भी करेंगे। यह हिफ़ाज़त हर उस चीज़ से है जो इसे बदल सकती है — न इसमें कोई चीज़ बढ़ाई जा सकती है, न घटाई जा सकती है, न इसे तहरीफ़ (बदलाव) से छेड़ा जा सकता है, और न ही इसका कोई हिस्सा ज़ाइल हो सकता है। अल्लाह ने इस किताब को अपनी ख़ास हिफ़ाज़त में रखा है, और यही वजह है कि आज तक यह अपनी मूल सूरत में महफ़ूज़ है, जबकि पिछली किताबों को उनकी उम्मतों की ग़फ़लत और तब्दीलियों की वजह से वो मक़ाम हासिल नहीं रहा।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से मुसलमानों को यक़ीन होता है कि क़ुरआन करीम अल्लाह की ज़ाती हिफ़ाज़त में है, इसलिए इसमें कोई कमी या बदलाव कभी नहीं आ सकता। यह चीज़ दिल को इत्मिनान देती है कि हमारा दीन और हमारी किताब क़यामत तक सुरक्षित रहेगी।
  2. यह आयत मुसलमानों को क़ुरआन से मुहब्बत और उस पर अमल की तरग़ीब देती है, क्योंकि यह अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल की गई आख़िरी और महफ़ूज़ किताब है।
  3. इस आयत से यह भी सबक़ मिलता है कि जिस चीज़ की हिफ़ाज़त अल्लाह ने ज़िम्मा ली है, उसे कोई ताक़त बदल नहीं सकती — चाहे दुश्मन कितनी भी कोशिश कर लें। यह मुसलमानों के लिए एक बड़ी तसल्ली और फ़ख़्र की बात है।
  4. यह आयत उन लोगों के लिए एक चेतावनी भी है जो क़ुरआन की आयातों में तहरीफ़ या ग़लत तावील करते हैं, कि अल्लाह की हिफ़ाज़त के बावजूद उनकी कोशिशें बेकार जाएँगी।
🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अल-हिज्र

7لَّوْ مَا تَأْتِينَا بِالْمَلَائِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
अगर तू अपने दावे में सच्चा है तो फरिश्तों को हमारे सामने क्यों नहीं ला खड़ा करता
8مَا نُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ إِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُوا إِذًا مُّنظَرِينَ
(हालॉकि) हम फरिश्तों को खुल्लम खुल्ला (जिस अज़ाब के साथ) फैसले ही के लिए भेजा करते हैं और (अगर फरिश्ते नाज़िल हो जाए तो) फिर उनको (जान बचाने की) मोहलत भी न मिले
9إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ
बेशक हम ही ने क़ुरान नाज़िल किया और हम ही तो उसके निगेहबान भी हैं
10وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِي شِيَعِ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले भी अगली उम्मतों में (और भी बहुत से) रसूल भेजे
11وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और (उनकी भी यही हालत थी कि) उनके पास कोई रसूल न आया मगर उन लोगों ने उसकी हँसी ज़रुर उड़ाई
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अनुवाद — अल-हिज्र 9

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Tuesday, August 18, 2026

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