अल-हिज्र · 10/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِي شِيَعِ الْأَوَّلِينَ ۝١٠
Wa laqad arsalnaa min qablika fee shiya`il awwaleen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले भी अगली उम्मतों में (और भी बहुत से) रसूल भेजे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شِيَعِ: समुदाय, गिरोह, या विभिन्न समूह। यहाँ इसका अर्थ पिछली उम्मतों (समुदायों) से है।
  • الأَوَّلِينَ: पिछले लोग, अर्थात् पहले की उम्मतें।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! हमने आपसे पहले भी पिछले समुदायों में कई रसूल (पैगंबर) भेजे थे। ये रसूल अलग-अलग क़ौमों और गिरोहों में भेजे गए, जो अपने-अपने ज़माने में आए। उन सभी रसूलों का अंजाम यही रहा कि उनकी क़ौमों ने उन्हें झुठलाया और उनका मज़ाक उड़ाया। कोई भी रसूल ऐसा नहीं गुज़रा जिसका उसकी क़ौम ने उपहास न किया हो।

इस आयत का मक़सद नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को तसल्ली देना है कि आप अकेले नहीं हैं जिन्हें आपकी क़ौम झुठला रही है और मज़ाक उड़ा रही है। यह रसूलों का पुराना तरीक़ा (सुन्नत) रहा है। जिस तरह आपके साथ आपकी क़ौम के मुशरिकीन (बहुदेववादी) व्यवहार कर रहे हैं, ठीक उसी तरह पिछले रसूलों के साथ उनकी उम्मतों ने किया। इसलिए आप दिल पर बोझ न लें, क्योंकि यह रसूलों का रास्ता है, और अल्लाह अपने रसूलों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की मुश्किलें कोई नई बात नहीं हैं, बल्कि यह तो हर ज़माने में नबियों के साथ होता रहा है। इससे हमें सब्र और स्थिरता का सबक मिलता है।
  2. यह आयत हमें बताती है कि सच्चाई का रास्ता हमेशा मुश्किलों भरा होता है, लेकिन अल्लाह अपने नबियों और उनके सच्चे पैरोकारों की मदद करता है और आख़िरकार सच्चाई ही जीतती है।
  3. हमें यह भी सीख मिलती है कि जब हमें किसी काम में मुश्किल या लोगों की तरफ़ से ताने आएँ, तो हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, बल्कि यह सोचना चाहिए कि यही अल्लाह के नबियों का तरीक़ा रहा है और अल्लाह उन्हीं के साथ है।
  4. यह आयत हमें नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से मुहब्बत और उनकी क़ुर्बानियों को समझने की तरफ़ भी ले जाती है, कि उन्होंने कितनी मुश्किलें सहन कीं ताकि हम तक दीन पहुँचे। इसलिए हमें उनके बताए रास्ते पर चलना चाहिए।


📜 आयत 8-12 — अल-हिज्र

8مَا نُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ إِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُوا إِذًا مُّنظَرِينَ
(हालॉकि) हम फरिश्तों को खुल्लम खुल्ला (जिस अज़ाब के साथ) फैसले ही के लिए भेजा करते हैं और (अगर फरिश्ते नाज़िल हो जाए तो) फिर उनको (जान बचाने की) मोहलत भी न मिले
9إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ
बेशक हम ही ने क़ुरान नाज़िल किया और हम ही तो उसके निगेहबान भी हैं
10وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِي شِيَعِ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले भी अगली उम्मतों में (और भी बहुत से) रसूल भेजे
11وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और (उनकी भी यही हालत थी कि) उनके पास कोई रसूल न आया मगर उन लोगों ने उसकी हँसी ज़रुर उड़ाई
12كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ
हम (गोया खुद) इसी तरह इस (गुमराही) को (उन) गुनाहगारों के दिल में डाल देते हैं
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अनुवाद — अल-हिज्र 10

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Tuesday, August 18, 2026

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