अल-हिज्र · 8/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
مَا نُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ إِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُوا إِذًا مُّنظَرِينَ ۝٨
Maa nunazzilul malaaa`i kata illaa bilhaqqi wa maa kaanooo izam munzareen
📖 हिंदी अर्थ
(हालॉकि) हम फरिश्तों को खुल्लम खुल्ला (जिस अज़ाब के साथ) फैसले ही के लिए भेजा करते हैं और (अगर फरिश्ते नाज़िल हो जाए तो) फिर उनको (जान बचाने की) मोहलत भी न मिले

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا نُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ: हम फ़रिश्तों को नाज़िल नहीं करते।
  • إِلَّا بِالْحَقِّ: सिवाय सत्य (उचित कारण) के साथ।
  • مُنظَرِينَ: जिन्हें मोहलत दी गई हो (अज़ाब में देरी की गई हो)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों के उस कथन का उत्तर है, जिन्होंने मज़ाक़िया अंदाज़ में कहा था कि "यदि तुम सच्चे हो तो हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं लाते?" अल्लाह तआला ने उन्हें जवाब दिया कि हम फ़रिश्तों को केवल हक़ (सत्य) के साथ नाज़िल करते हैं, अर्थात् जब अज़ाब का वक़्त आ जाता है और किसी क़ौम पर अज़ाब का फ़ैसला सुनाया जा चुका होता है, तभी फ़रिश्ते नाज़िल होते हैं। यह उनके लिए रहमत या मोहलत के लिए नहीं होता, बल्कि उनके विनाश और सज़ा के लिए होता है।

जब फ़रिश्ते नाज़िल होंगे, तो उन काफ़िरों को कोई मोहलत नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें तुरंत पकड़ लिया जाएगा और अज़ाब में डाल दिया जाएगा। यहाँ यह भी संकेत है कि फ़रिश्तों का नाज़िल होना उनके लिए बड़ी भयावह घटना होगी, क्योंकि वे अज़ाब लेकर आते हैं, न कि कोई ख़ुशख़बरी लेकर।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. अल्लाह की सुन्नत (रीति) यह है कि वह अपने बंदों को मोहलत देता है, लेकिन जब अज़ाब का समय आ जाता है, तो कोई देरी या टाल-मटोल नहीं होती। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह की पकड़ से डरना चाहिए और उसकी ओर जल्दी लौटना चाहिए।
  2. फ़रिश्तों का नाज़िल होना केवल अल्लाह के हुक्म से होता है, और वह भी हिकमत (बुद्धिमत्ता) के अनुसार। यह हमें अल्लाह के इल्म और हिकमत पर भरोसा रखना सिखाता है, क्योंकि वही जानता है कि कब और किस पर फ़रिश्ते नाज़िल करने हैं।
  3. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की रहमत और उसका अज़ाब दोनों उसकी हिकमत के अधीन हैं। जो लोग नबी की बात नहीं मानते और निशानियाँ माँगते हैं, उनके लिए अज़ाब ही नसीब होता है, जबकि मोमिनों के लिए रहमत और हिदायत है। इसलिए हमें नबी की सुन्नत पर चलना चाहिए और अल्लाह की निशानियों पर ईमान लाना चाहिए, न कि उनके लिए ज़िद और मज़ाक़ करना चाहिए।


📜 आयत 6-10 — सूरा अल-हिज्र

6وَقَالُوا يَا أَيُّهَا الَّذِي نُزِّلَ عَلَيْهِ الذِّكْرُ إِنَّكَ لَمَجْنُونٌ
(ऐ रसूल कुफ्फ़ारे मक्का तुमसे) कहते हैं कि ऐ शख़्श (जिसको ये भरम है) कि उस पर 'वही' व किताब नाज़िल हुईहै तो (अच्छा ख़ासा) सिड़ी है
7لَّوْ مَا تَأْتِينَا بِالْمَلَائِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
अगर तू अपने दावे में सच्चा है तो फरिश्तों को हमारे सामने क्यों नहीं ला खड़ा करता
8مَا نُنَزِّلُ الْمَلَائِكَةَ إِلَّا بِالْحَقِّ وَمَا كَانُوا إِذًا مُّنظَرِينَ
(हालॉकि) हम फरिश्तों को खुल्लम खुल्ला (जिस अज़ाब के साथ) फैसले ही के लिए भेजा करते हैं और (अगर फरिश्ते नाज़िल हो जाए तो) फिर उनको (जान बचाने की) मोहलत भी न मिले
9إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ
बेशक हम ही ने क़ुरान नाज़िल किया और हम ही तो उसके निगेहबान भी हैं
10وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِي شِيَعِ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले भी अगली उम्मतों में (और भी बहुत से) रसूल भेजे
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 8

सूरा अल-हिज्र आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (हालॉकि) हम फरिश्तों को खुल्लम खुल्ला (जिस अज़ाब के साथ)…

सूरा आयत 8/99 — सूरा अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हिज्र सुनें, सूरा अल-हिज्र अनुवाद, सूरा अल-हिज्र mp3, सूरा अल-हिज्र pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.





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Monday, September 28, 2026

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