अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَسْجُدُ (सजदा करता है): अर्थात अत्यंत विनम्रता और आज्ञाकारिता के साथ झुकता है।
- دَابَّةٍ (चलने वाला प्राणी): पृथ्वी पर चलने वाला हर जीव-जंतु, चाहे वह जानवर हो, कीड़ा हो या कोई भी चलने वाला प्राणी।
- لَا يَسْتَكْبِرُونَ (घमंड नहीं करते): अर्थात अहंकार और अभिमान नहीं करते, बल्कि पूर्ण आज्ञाकारिता में झुकते हैं।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत बताती है कि आकाशों और पृथ्वी में जो कुछ भी है, वह सब अकेले अल्लाह ही के लिए सजदा करता है। आकाशों में मौजूद सारी मख़लूक़ात (प्राणी) और पृथ्वी पर चलने वाले हर जीव-जंतु — सभी अल्लाह के सामने झुकते हैं। यहाँ "ما" (जो कुछ) का शब्द इस्तेमाल किया गया है, जो "من" (जो कोई) से अधिक व्यापक है, क्योंकि इसमें बुद्धि रखने वाले और न रखने वाले, दोनों शामिल हैं। इसका मतलब है कि हर वह चीज़ जो पृथ्वी पर चलती है — चाहे वह समझदार हो या न हो — अपनी फ़ितरत (प्राकृतिक प्रवृत्ति) के अनुसार अल्लाह के सामने झुकती है और उसकी आज्ञा का पालन करती है।
इसके बाद अल्लाह ने विशेष रूप से फ़रिश्तों (ملائكة) का ज़िक्र किया, हालाँकि वे आकाशों में मौजूद चीज़ों में शामिल हैं। यह उनके सम्मान, उनकी उच्च स्थिति और उनकी अत्यधिक इबादत के कारण किया गया। फ़रिश्ते अल्लाह की इबादत में कभी घमंड नहीं करते, न ही उसकी आज्ञा से सिर मोड़ते हैं। वे पूर्ण आज्ञाकारिता और विनम्रता के साथ हमेशा अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) और इबादत में लगे रहते हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- सृष्टि की एकता और अल्लाह की महानता: यह आयत हमें सिखाती है कि पूरी कायनात — आकाश, पृथ्वी, जीव-जंतु, पेड़-पौधे — सब अल्लाह की तासीर (आज्ञाकारिता) में हैं। यह अल्लाह की महानता और उसकी एकता का प्रमाण है।
- विनम्रता का पाठ: फ़रिश्ते, जो सबसे उच्च और पवित्र प्राणी हैं, वे भी अल्लाह के सामने घमंड नहीं करते। यह हम इंसानों के लिए सबसे बड़ा सबक़ है कि हमें अपने ज्ञान, धन, पद या ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह के सामने विनम्र और आज्ञाकारी रहना चाहिए।
- सजदे की अहमियत: सजदा अल्लाह के सामने सबसे बड़ी विनम्रता की मुद्रा है। यह आयत हमें बताती है कि सजदा केवल अल्लाह के लिए है, और यही वह क्रिया है जो पूरी कायनात करती है। इसलिए हमें नमाज़ में सजदे को पूरी ख़ुशू (एकाग्रता) और विनम्रता के साथ करना चाहिए।
- फ़रिश्तों की इबादत से प्रेरणा: फ़रिश्ते बिना किसी थकान या ऊब के लगातार अल्लाह की इबादत करते हैं। यह हमें प्रेरित करता है कि हम अपनी इबादत में नियमितता और लगन अपनाएँ, और अल्लाह की याद से कभी विमुख न हों।
- अहंकार से बचाव: यह आयत अहंकार (किब्र) को सबसे बड़ी बुराई बताती है, क्योंकि फ़रिश्तों की विशेषता यही है कि वे घमंड नहीं करते। इंसान को चाहिए कि वह अपने अंदर से अहंकार को मिटाए और अल्लाह के सामने हमेशा झुका रहे।
📜 आयत 47-51 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 49
सूरा अन-नहल आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जितनी चीज़ें (चादँ सूरज वग़ैरह) आसमानों में हैं और…सूरा आयत 49/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 47–51. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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