अन-नहल · 49/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَلِلَّهِ يَسْجُدُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ مِن دَابَّةٍ وَالْمَلَائِكَةُ وَهُمْ لَا يَسْتَكْبِرُونَ ۝٤٩
Wa lillaahi yasjudu maa fis samaawaati wa maa fil ardi min daaabbatinw walma laaa`ikatu wa hum laa yastakbiroon
📖 हिंदी अर्थ
और जितनी चीज़ें (चादँ सूरज वग़ैरह) आसमानों में हैं और जितने जानवर ज़मीन में हैं सब ख़ुदा ही के आगे सर सजूद हैं और फरिश्ते तो (है ही) और वह हुक्में ख़ुदा से सरकशी नहीं करते (49) (सजदा)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْجُدُ (सजदा करता है): अर्थात अत्यंत विनम्रता और आज्ञाकारिता के साथ झुकता है।
  • دَابَّةٍ (चलने वाला प्राणी): पृथ्वी पर चलने वाला हर जीव-जंतु, चाहे वह जानवर हो, कीड़ा हो या कोई भी चलने वाला प्राणी।
  • لَا يَسْتَكْبِرُونَ (घमंड नहीं करते): अर्थात अहंकार और अभिमान नहीं करते, बल्कि पूर्ण आज्ञाकारिता में झुकते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत बताती है कि आकाशों और पृथ्वी में जो कुछ भी है, वह सब अकेले अल्लाह ही के लिए सजदा करता है। आकाशों में मौजूद सारी मख़लूक़ात (प्राणी) और पृथ्वी पर चलने वाले हर जीव-जंतु — सभी अल्लाह के सामने झुकते हैं। यहाँ "ما" (जो कुछ) का शब्द इस्तेमाल किया गया है, जो "من" (जो कोई) से अधिक व्यापक है, क्योंकि इसमें बुद्धि रखने वाले और न रखने वाले, दोनों शामिल हैं। इसका मतलब है कि हर वह चीज़ जो पृथ्वी पर चलती है — चाहे वह समझदार हो या न हो — अपनी फ़ितरत (प्राकृतिक प्रवृत्ति) के अनुसार अल्लाह के सामने झुकती है और उसकी आज्ञा का पालन करती है।

इसके बाद अल्लाह ने विशेष रूप से फ़रिश्तों (ملائكة) का ज़िक्र किया, हालाँकि वे आकाशों में मौजूद चीज़ों में शामिल हैं। यह उनके सम्मान, उनकी उच्च स्थिति और उनकी अत्यधिक इबादत के कारण किया गया। फ़रिश्ते अल्लाह की इबादत में कभी घमंड नहीं करते, न ही उसकी आज्ञा से सिर मोड़ते हैं। वे पूर्ण आज्ञाकारिता और विनम्रता के साथ हमेशा अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) और इबादत में लगे रहते हैं।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. सृष्टि की एकता और अल्लाह की महानता: यह आयत हमें सिखाती है कि पूरी कायनात — आकाश, पृथ्वी, जीव-जंतु, पेड़-पौधे — सब अल्लाह की तासीर (आज्ञाकारिता) में हैं। यह अल्लाह की महानता और उसकी एकता का प्रमाण है।
  2. विनम्रता का पाठ: फ़रिश्ते, जो सबसे उच्च और पवित्र प्राणी हैं, वे भी अल्लाह के सामने घमंड नहीं करते। यह हम इंसानों के लिए सबसे बड़ा सबक़ है कि हमें अपने ज्ञान, धन, पद या ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह के सामने विनम्र और आज्ञाकारी रहना चाहिए।
  3. सजदे की अहमियत: सजदा अल्लाह के सामने सबसे बड़ी विनम्रता की मुद्रा है। यह आयत हमें बताती है कि सजदा केवल अल्लाह के लिए है, और यही वह क्रिया है जो पूरी कायनात करती है। इसलिए हमें नमाज़ में सजदे को पूरी ख़ुशू (एकाग्रता) और विनम्रता के साथ करना चाहिए।
  4. फ़रिश्तों की इबादत से प्रेरणा: फ़रिश्ते बिना किसी थकान या ऊब के लगातार अल्लाह की इबादत करते हैं। यह हमें प्रेरित करता है कि हम अपनी इबादत में नियमितता और लगन अपनाएँ, और अल्लाह की याद से कभी विमुख न हों।
  5. अहंकार से बचाव: यह आयत अहंकार (किब्र) को सबसे बड़ी बुराई बताती है, क्योंकि फ़रिश्तों की विशेषता यही है कि वे घमंड नहीं करते। इंसान को चाहिए कि वह अपने अंदर से अहंकार को मिटाए और अल्लाह के सामने हमेशा झुका रहे।
🎧 सुनें

📜 आयत 47-51 — अन-नहल

47أَوْ يَأْخُذَهُمْ عَلَىٰ تَخَوُّفٍ فَإِنَّ رَبَّكُمْ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ
या वह अज़ाब से डरते हो तो (उसी हालत में) धर पकड़ करे इसमें तो शक नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा शफीक़ रहम वाला है
48أَوَلَمْ يَرَوْا إِلَىٰ مَا خَلَقَ اللَّهُ مِن شَيْءٍ يَتَفَيَّأُ ظِلَالُهُ عَنِ الْيَمِينِ وَالشَّمَائِلِ سُجَّدًا لِّلَّهِ وَهُمْ دَاخِرُونَ
क्या उन लोगों ने ख़ुदा की मख़लूक़ात में से कोई ऐसी चीज़ नहीं देखी जिसका साया (कभी) दाहिनी तरफ और कभी बायीं तरफ पलटा रहता है कि (गोया) ख़ुदा के सामने सर सजदा है और सब इताअत का इज़हार करते हैं
49وَلِلَّهِ يَسْجُدُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ مِن دَابَّةٍ وَالْمَلَائِكَةُ وَهُمْ لَا يَسْتَكْبِرُونَ
और जितनी चीज़ें (चादँ सूरज वग़ैरह) आसमानों में हैं और जितने जानवर ज़मीन में हैं सब ख़ुदा ही के आगे सर सजूद हैं और फरिश्ते तो (है ही) और वह हुक्में ख़ुदा से सरकशी नहीं करते (49) (सजदा)
50يَخَافُونَ رَبَّهُم مِّن فَوْقِهِمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ ۩
और अपने परवरदिगार से जो उनसे (कहीं) बरतर (बड़ा) व आला है डरते हैं और जो हुक्में दिया जाता है फौरन बजा लाते हैं
51۞ وَقَالَ اللَّهُ لَا تَتَّخِذُوا إِلَٰهَيْنِ اثْنَيْنِ ۖ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ فَإِيَّايَ فَارْهَبُونِ
और ख़ुदा ने फरमाया था कि दो दो माबूद न बनाओ माबूद तो बस वही यकता ख़ुदा है सिर्फ मुझी से डरते रहो
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अनुवाद — अन-नहल 49

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Tuesday, August 18, 2026

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