Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَتَفَيَّأُ – लौटना, पलटना, इधर-उधर झुकना (छाया का एक ओर से दूसरी ओर खिसकना)।
- ظِلَالُهُ – उसकी छायाएँ (बहुवचन)।
- عَنِ الْيَمِينِ وَالشَّمَائِلِ – दाएँ और बाएँ ओर से (अर्थात् छाया का दाएँ-बाएँ झुकना)।
- سُجَّدًا – सजदा करते हुए, झुकते हुए, आज्ञाकारी होकर।
- دَاخِرُونَ – दबे-कुचले, अपमानित, पूर्ण रूप से वशीभूत।
तफ़सीर:
क्या इन इनकार करने वालों ने कभी आँखें खोलकर अल्लाह की बनाई हुई चीज़ों को नहीं देखा? पहाड़, पेड़, इमारतें — हर उस चीज़ को जिसकी छाया बनती है — वह छाया सुबह से शाम तक लगातार बदलती रहती है। पहले दाईं ओर झुकती है, फिर बाईं ओर खिसकती है, और यह क्रम सूरज और चाँद की गति के साथ बदलता रहता है। यह छायाओं का यह निरंतर बदलना और झुकना किसी यादृच्छिक प्रक्रिया का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उनका अपने रब के प्रति सजदा है — वे अल्लाह के आगे पूरी तरह झुकी हुई हैं, उसकी आज्ञा के प्रति समर्पित हैं। वे चीज़ें जिन्हें देखकर भी ये लोग सबक नहीं लेते, वे स्वयं अपनी छाया के माध्यम से अल्लाह की अज़मत का इज़हार कर रही हैं। वे पूरी तरह वशीभूत हैं, उनके सामने कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है, बल्कि वे हर पल उसी के इशारे पर चल रही हैं। यह दृश्य हर रोज़ सामने आता है, फिर भी इनकार करने वाले इससे सबक नहीं लेते।
फ़ायदे:
- क़ुदरत-ए-इलाही पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र की तरग़ीब: यह आयत हमें सिखाती है कि ब्रह्मांड की हर चीज़ — यहाँ तक कि छाया का बदलना भी — अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है। जो लोग सोचते हैं कि यह सब अपने आप हो रहा है, वे ग़लत हैं। हर पल, हर गति में अल्लाह का हुक्म चल रहा है।
- विनम्रता और समर्पण का पाठ: जब पेड़, पहाड़ और हर चीज़ अपनी छाया के साथ अल्लाह के आगे झुकती है, तो इंसान को भी अपने रब के सामने विनम्र होना चाहिए। अगर बेजान चीज़ें उसकी आज्ञा का पालन करती हैं, तो इंसान जो अक्ल और समझ रखता है, उसे तो और भी अधिक समर्पण करना चाहिए।
- इस्लाम का सौंदर्य: इस्लाम सिखाता है कि पूरी कायनात एक ही रब की आज्ञा में बँधी हुई है — कोई अराजकता नहीं, कोई बेकार की चीज़ नहीं। यह विश्वास इंसान को एक सुव्यवस्थित, उद्देश्यपूर्ण और शांतिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। जब इंसान यह देखता है कि हर चीज़ अल्लाह की तस्बीह कर रही है, तो उसका दिल भी उसी की याद में लग जाता है और उसे एक अजीब सुकून मिलता है।
📜 आयत 46-50 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 48
सूरा अन-नहल आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उन लोगों ने ख़ुदा की मख़लूक़ात में से कोई…सूरा आयत 48/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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