अन-नहल · 50/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
يَخَافُونَ رَبَّهُم مِّن فَوْقِهِمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ ۩ ۝٥٠
yakhaafoona Rabbahum min fawqihim wa yaf`aloona maa yu`maroon
📖 हिंदी अर्थ
और अपने परवरदिगार से जो उनसे (कहीं) बरतर (बड़ा) व आला है डरते हैं और जो हुक्में दिया जाता है फौरन बजा लाते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَخَافُونَ (वे डरते हैं) — भय रखते हैं, डरते हैं।
  • مِن فَوْقِهِمْ (उनके ऊपर से) — अर्थात उनका रब उनके ऊपर है, अपनी ज़ात, क़ुदरत और सत्ता में सर्वोपरि है।
  • يَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ (वे वही करते हैं जो उन्हें आदेश दिया जाता है) — पूर्ण आज्ञाकारिता, बिना किसी प्रश्न या विरोध के।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत फ़रिश्तों के गुणों का वर्णन कर रही है। फ़रिश्ते अल्लाह की इबादत में लगे रहते हैं, लेकिन साथ ही वे अपने रब से डरते भी हैं। वे जानते हैं कि उनका रब उनके ऊपर है — अपनी ज़ात, अपनी ताक़त और अपने अधिकार में। उसकी पकड़ से कोई चीज़ बाहर नहीं, कोई उस पर हावी नहीं हो सकता, और कोई उसके आदेश को टाल नहीं सकता। यह भय उन्हें नम्र और आज्ञाकारी बनाए रखता है।

इसके बाद अल्लाह बताता है कि फ़रिश्ते सिर्फ़ डरते ही नहीं, बल्कि वे हर उस आदेश को बिना किसी हिचकिचाहट के पूरा करते हैं जो उन्हें दिया जाता है। उनकी आज्ञाकारिता में कोई कमी नहीं, कोई देरी नहीं, और कोई सवाल नहीं। वे पूरी तरह से अल्लाह के प्रति समर्पित हैं।

इस आयत में अल्लाह की उच्चता (फ़ौक़ियत) का गुण साबित होता है — वह अपने सभी प्राणियों से ऊपर है, जैसा कि उसकी शान के लायक़ है। यह ऊपर होना उसकी ज़ात, उसकी क़ुदरत और उसके अधिकार के साथ है, न कि किसी दिशा या स्थान के अर्थ में जैसा कि मख़लूक़ के लिए होता है।


फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह का डर — फ़रिश्ते जैसे पाक और नेक प्राणी भी अल्लाह से डरते हैं, तो हम इंसानों को कितना ज़्यादा उसका डर रखना चाहिए। यह डर हमें गुनाहों से रोकता है और नेकी की तरफ़ ले जाता है।
  2. अल्लाह की अज़मत — यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह हर चीज़ से ऊपर है, उसकी ताक़त और सत्ता असीमित है। इस एहसास से इंसान के दिल में अल्लाह की बुज़ुर्गी और प्यार बढ़ता है।
  3. आज्ञाकारिता का महत्व — फ़रिश्तों की तरह हमें भी अल्लाह के हुक्मों को बिना किसी शिकायत और देरी के पूरा करना चाहिए। यही सच्ची इबादत है।
  4. इस्लाम की खूबसूरती — इस्लाम सिखाता है कि डर और मोहब्बत दोनों मिलकर इंसान को बेहतर बनाते हैं। डर अल्लाह की पकड़ से बचाता है, और मोहब्बत उसकी रहमत की तरफ़ ले जाती है। यही संतुलन इंसान को कामयाबी की राह दिखाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 48-52 — अन-नहल

48أَوَلَمْ يَرَوْا إِلَىٰ مَا خَلَقَ اللَّهُ مِن شَيْءٍ يَتَفَيَّأُ ظِلَالُهُ عَنِ الْيَمِينِ وَالشَّمَائِلِ سُجَّدًا لِّلَّهِ وَهُمْ دَاخِرُونَ
क्या उन लोगों ने ख़ुदा की मख़लूक़ात में से कोई ऐसी चीज़ नहीं देखी जिसका साया (कभी) दाहिनी तरफ और कभी बायीं तरफ पलटा रहता है कि (गोया) ख़ुदा के सामने सर सजदा है और सब इताअत का इज़हार करते हैं
49وَلِلَّهِ يَسْجُدُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ مِن دَابَّةٍ وَالْمَلَائِكَةُ وَهُمْ لَا يَسْتَكْبِرُونَ
और जितनी चीज़ें (चादँ सूरज वग़ैरह) आसमानों में हैं और जितने जानवर ज़मीन में हैं सब ख़ुदा ही के आगे सर सजूद हैं और फरिश्ते तो (है ही) और वह हुक्में ख़ुदा से सरकशी नहीं करते (49) (सजदा)
50يَخَافُونَ رَبَّهُم مِّن فَوْقِهِمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ ۩
और अपने परवरदिगार से जो उनसे (कहीं) बरतर (बड़ा) व आला है डरते हैं और जो हुक्में दिया जाता है फौरन बजा लाते हैं
51۞ وَقَالَ اللَّهُ لَا تَتَّخِذُوا إِلَٰهَيْنِ اثْنَيْنِ ۖ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ فَإِيَّايَ فَارْهَبُونِ
और ख़ुदा ने फरमाया था कि दो दो माबूद न बनाओ माबूद तो बस वही यकता ख़ुदा है सिर्फ मुझी से डरते रहो
52وَلَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلَهُ الدِّينُ وَاصِبًا ۚ أَفَغَيْرَ اللَّهِ تَتَّقُونَ
और जो कुछ आसमानों में हैं और जो कुछ ज़मीन में हैं (ग़रज़) सब कुछ उसी का है और ख़ालिस फरमाबरदारी हमेशा उसी को लाज़िम (जरूरी) है तो क्या तुम लोग ख़ुदा के सिवा (किसी और से भी) डरते हो
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीRevelation
50आयत

अनुवाद — अन-नहल 50

सूरा अन-नहल आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अपने परवरदिगार से जो उनसे (कहीं) बरतर (बड़ा) व…

सूरा आयत 50/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए