Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اهْتَدَىٰ: हिदायत पाना, सीधे मार्ग पर चलना।
- ضَلَّ: गुमराह होना, पथभ्रष्ट होना।
- تَزِرُ: उठाना, वहन करना।
- وَازِرَةٌ: बोझ उठाने वाली (आत्मा)।
- وِزْرَ: बोझ, पाप, गुनाह।
- نَبْعَثَ: भेजना, उठाना (रसूल भेजना)।
तफसीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला स्पष्ट करते हैं कि हिदायत और गुमराही का फल व्यक्ति को खुद ही मिलता है। जो कोई सीधे मार्ग पर चलता है, उसकी हिदायत का लाभ उसी को पहुँचता है, और जो गुमराही का रास्ता अपनाता है, उसकी गुमराही का अंजाम भी उसी के लिए है। यह न्याय का मूल सिद्धांत है कि कोई आत्मा किसी दूसरी आत्मा का पाप नहीं उठाएगी। हर इंसान अपने कर्मों के लिए स्वयं जिम्मेदार है।
इसके बाद अल्लाह तआला अपनी रहमत और अदल का एक और पहलू बयान करते हैं कि वह किसी को तब तक अज़ाब नहीं देते, जब तक कि उनके पास रसूल न भेज दिया जाए। यानी अल्लाह की ओर से हुज्जत (प्रमाण) क़ायम किए बिना किसी को सज़ा नहीं दी जाती। रसूलों के आने के बाद ही लोगों पर अल्लाह की आज्ञा मानने की ज़िम्मेदारी पूरी तरह स्थापित होती है, और उसके बाद ही उन्हें इनाम या सज़ा का हक़दार बनाया जाता है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी का सिद्धांत है — हर इंसान अपने अच्छे या बुरे कर्मों का फल खुद पाएगा, किसी और का बोझ उस पर नहीं डाला जाएगा। यह अत्यंत न्यायपूर्ण व्यवस्था है जो मनुष्य को आत्मविश्वास और उत्तरदायित्व की भावना देती है।
- अल्लाह की रहमत का पता चलता है कि उसने बिना मार्गदर्शन भेजे किसी को सज़ा का पात्र नहीं बनाया। यह उसकी दया और न्याय का प्रमाण है कि उसने हर युग में रसूल और किताबें भेजकर लोगों को सही रास्ता दिखाया।
- यह आयत हमें प्रेरित करती है कि हम अपने कर्मों को सुधारें और केवल अपने अच्छे कर्मों पर भरोसा रखें, क्योंकि क़ियामत के दिन कोई किसी की मदद नहीं कर सकेगा।
- इससे यह भी पता चलता है कि अल्लाह का मार्गदर्शन (क़ुरआन और रसूल) हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत है, क्योंकि इसके बिना हम सही और गलत में अंतर नहीं कर सकते।
📜 आयत 13-17 — सूरा अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 15
सूरा अल-इसरा आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो शख़्श रुबरु होता है तो बस अपने फायदे के…सूरा आयत 15/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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