अल-इसरा · 64/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
وَاسْتَفْزِزْ مَنِ اسْتَطَعْتَ مِنْهُم بِصَوْتِكَ وَأَجْلِبْ عَلَيْهِم بِخَيْلِكَ وَرَجِلِكَ وَشَارِكْهُمْ فِي الْأَمْوَالِ وَالْأَوْلَادِ وَعِدْهُمْ ۚ وَمَا يَعِدُهُمُ الشَّيْطَانُ إِلَّا غُرُورًا ۝٦٤
Wastafziz manis tat`ta minhum bisawtika wa ajlib `alaihim bikhailika wa rajilika wa shaarik hum fil amwaali wal awlaadi wa `idhum; wa maa ya`iduhumush Shaitaanu illaa ghurooraa
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें से जिस पर अपनी (चिकनी चुपड़ी) बात से क़ाबू पा सके वहॉ और अपने (चेलों के लश्कर) सवार और पैदल (सब) से चढ़ाई कर और माल और औलाद में उनके साथ साझा करे और उनसे (खूब झूठे) वायदे कर और शैतान तो उनसे जो वायदे करता है धोखे के सिवा कुछ नहीं होता

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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📜 आयत 62-66 — सूरा अल-इसरा

62قَالَ أَرَأَيْتَكَ هَٰذَا الَّذِي كَرَّمْتَ عَلَيَّ لَئِنْ أَخَّرْتَنِ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ لَأَحْتَنِكَنَّ ذُرِّيَّتَهُ إِلَّا قَلِيلًا
और (शेख़ी से) बोला भला देखो तो सही यही वह शख़्श है जिसको तूने मुझ पर फज़ीलत दी है अगर तू मुझ को क़यामत तक की मोहलत दे तो मैं (दावे से कहता हूँ कि) कम लोगों के सिवा इसकी नस्ल की जड़ काटता रहूँगा
63قَالَ اذْهَبْ فَمَن تَبِعَكَ مِنْهُمْ فَإِنَّ جَهَنَّمَ جَزَاؤُكُمْ جَزَاءً مَّوْفُورًا
ख़ुदा ने फरमाया चल (दूर हो) उनमें से जो शख़्श तेरी पैरवी करेगा तो (याद रहे कि) तुम सबकी सज़ा जहन्नुम है और वह भी पूरी पूरी सज़ा है
64وَاسْتَفْزِزْ مَنِ اسْتَطَعْتَ مِنْهُم بِصَوْتِكَ وَأَجْلِبْ عَلَيْهِم بِخَيْلِكَ وَرَجِلِكَ وَشَارِكْهُمْ فِي الْأَمْوَالِ وَالْأَوْلَادِ وَعِدْهُمْ ۚ وَمَا يَعِدُهُمُ الشَّيْطَانُ إِلَّا غُرُورًا
और इसमें से जिस पर अपनी (चिकनी चुपड़ी) बात से क़ाबू पा सके वहॉ और अपने (चेलों के लश्कर) सवार और पैदल (सब) से चढ़ाई कर और माल और औलाद में उनके साथ साझा करे और उनसे (खूब झूठे) वायदे कर और शैतान तो उनसे जो वायदे करता है धोखे के सिवा कुछ नहीं होता
65إِنَّ عِبَادِي لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَانٌ ۚ وَكَفَىٰ بِرَبِّكَ وَكِيلًا
बेशक जो मेरे (ख़ास) बन्दें हैं उन पर तेरा ज़ोर नहीं चल (सकता) और कारसाज़ी में तेरा परवरदिगार काफी है
66رَّبُّكُمُ الَّذِي يُزْجِي لَكُمُ الْفُلْكَ فِي الْبَحْرِ لِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ ۚ إِنَّهُ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا
लोगों) तुम्हारा परवरदिगार वह (क़ादिरे मुत्तलिक़) है जो तुम्हारे लिए समन्दर में जहाज़ों को चलाता है ताकि तुम उसके फज़ल व करम (रोज़ी) की तलाश करो इसमें शक़ नहीं कि वह तुम पर बड़ा मेहरबान है
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
64आयत

अनुवाद — अल-इसरा 64

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Friday, October 2, 2026

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