अल-कहफ · 107/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَانَتْ لَهُمْ جَنَّاتُ الْفِرْدَوْسِ نُزُلًا ۝١٠٧
Innal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati kaanat lahum Jannaatul Firdawsi nuzulaa
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किये उनकी मेहमानदारी के लिए फिरदौस (बरी) के बाग़ात होंगे जिनमें वह हमेशा रहेंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जन्नातुल फ़िरदौस: जन्नत का सबसे ऊँचा और सबसे उत्तम स्थान, जो जन्नत के बीचों-बीच है। इसे "फ़िरदौस" कहा जाता है, जिसका अर्थ है बाग़ या उद्यान।
  • नुज़ुलन: यानी मेहमानों के लिए तैयार की गई जगह, स्वागत-स्थल, या ठहरने का सम्मानजनक स्थान।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के लिए खुशखबरी है जिन्होंने अल्लाह पर ईमान लाया और अपने ईमान को सिर्फ ज़ुबान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने अमल से साबित किया। उन्होंने अच्छे कर्म किए, यानी अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढाला, दूसरों के साथ भलाई की, और अपने फ़र्ज़ों को अदा किया। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने अपने इल्म में जन्नतुल फ़िरदौस तैयार किया है, जो जन्नत का सबसे ऊँचा और सबसे बेहतरीन हिस्सा है। यह कोई साधारण इनाम नहीं, बल्कि एक ऐसा सम्मान है जो अल्लाह की ओर से उनके लिए "नुज़ुल" के रूप में है — यानी जैसे किसी मेहमान के लिए पहले से सबसे अच्छी जगह तैयार की जाती है, उसी तरह अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए यह जगह तैयार कर रखी है।

यह आयत हमें बताती है कि ईमान और अच्छे कर्म साथ-साथ चलते हैं। सिर्फ ईमान का दावा काफी नहीं, बल्कि उसे अपने अमल से साबित करना ज़रूरी है। जब कोई व्यक्ति सच्चे दिल से ईमान लाता है और अपने कर्मों को सुधारता है, तो अल्लाह उसे सबसे उत्तम इनाम देता है। यह इनाम उसकी मेहनत का बदला नहीं, बल्कि अल्लाह का फज़ल और करम है, जो वह अपने बंदों पर करता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने जीवन में ईमान और अमल दोनों पर ध्यान देना चाहिए। जो लोग अल्लाह की राह में चलते हैं, उनके लिए अल्लाह ने ऐसी जगह तैयार की है जिसका कोई मुकाबला नहीं। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम अपने कर्मों को बेहतर बनाएं, अल्लाह की इबादत करें, और दूसरों के साथ भलाई करें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हो सकें जिनके लिए यह सम्मान तैयार किया गया है।

अल्लाह हमें सच्चे ईमान और अच्छे कर्मों की तौफ़ीक़ दे, और हमें जन्नतुल फ़िरदौस का हक़दार बनाए। आमीन।



📜 आयत 105-109 — सूरा अल-कहफ

105أُولَٰئِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ وَلِقَائِهِ فَحَبِطَتْ أَعْمَالُهُمْ فَلَا نُقِيمُ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَزْنًا
यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयातों से और (क़यामत के दिन) उसके सामने हाज़िर होने से इन्कार किया तो उनका सब किया कराया अकारत हुआ तो हम उसके लिए क़यामत के दिन मीजान हिसाब भी क़ायम न करेंगे
106ذَٰلِكَ جَزَاؤُهُمْ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُوا وَاتَّخَذُوا آيَاتِي وَرُسُلِي هُزُوًا
(और सीधे जहन्नुम में झोंक देगें) ये जहन्नुम उनकी करतूतों का बदला है कि उन्होंने कुफ्र एख्तियार किया और मेरी आयतों और मेरे रसूलों को हँसी ठठ्ठा बना लिया
107إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَانَتْ لَهُمْ جَنَّاتُ الْفِرْدَوْسِ نُزُلًا
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किये उनकी मेहमानदारी के लिए फिरदौस (बरी) के बाग़ात होंगे जिनमें वह हमेशा रहेंगे
108خَالِدِينَ فِيهَا لَا يَبْغُونَ عَنْهَا حِوَلًا
और वहाँ से हिलने की भी ख्वाहिश न करेंगे
109قُل لَّوْ كَانَ الْبَحْرُ مِدَادًا لِّكَلِمَاتِ رَبِّي لَنَفِدَ الْبَحْرُ قَبْلَ أَن تَنفَدَ كَلِمَاتُ رَبِّي وَلَوْ جِئْنَا بِمِثْلِهِ مَدَدًا
(ऐ रसूल उन लोगों से) कहो कि अगर मेरे परवरदिगार की बातों के (लिखने के) वास्ते समन्दर (का पानी) भी सियाही बन जाए तो क़ब्ल उसके कि मेरे परवरदिगार की बातें ख़त्म हों समन्दर ही ख़त्म हो जाएगा अगरचे हम वैसा ही एक समन्दर उस की मदद को लाँए
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
107आयत

अनुवाद — अल-कहफ 107

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Friday, October 2, 2026

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