अल-कहफ · 106/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
ذَٰلِكَ جَزَاؤُهُمْ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُوا وَاتَّخَذُوا آيَاتِي وَرُسُلِي هُزُوًا ۝١٠٦
Zaalika jazaaa`uhum jahannamu bimaa kafaroo wattakhazooo Aayaatee wa Rusulee huzuwaa
📖 हिंदी अर्थ
(और सीधे जहन्नुम में झोंक देगें) ये जहन्नुम उनकी करतूतों का बदला है कि उन्होंने कुफ्र एख्तियार किया और मेरी आयतों और मेरे रसूलों को हँसी ठठ्ठा बना लिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • جَزَاؤُهُمْ – उनका बदला
  • هُزُوًا – मज़ाक़, ठट्ठा, उपहास

तफ़सीर:

यह वही अज़ाब है जिसका ज़िक्र पिछली आयात में हुआ कि उनके अच्छे कर्म बरबाद हो गए और क़ियामत के दिन हम उन्हें कोई वज़न न देंगे। यह सब कुछ उनका बदला है — और वह बदला जहन्नम है। यह उनका ठिकाना है, उनकी मंज़िल है, और यही उनका हक़ है।

यह सज़ा उन्हें किसी ज़ुल्म की वजह से नहीं मिल रही, बल्कि यह उनके अपने कर्मों का नतीजा है। उन्होंने अल्लाह पर ईमान नहीं लाया, उसकी आयतों को नकारा, और उसके रसूलों को ठट्ठे में उड़ाया। उन्होंने अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर नहीं किया, उनसे सबक़ नहीं लिया, बल्कि उन्हें मज़ाक़ बना लिया। जब अल्लाह के रसूल उन्हें सीधे रास्ते की दावत देते थे, तो वे उनका उपहास करते थे और उन्हें झुठलाते थे।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त सिखाती है — कि अल्लाह की आयतों और उसके रसूलों का मज़ाक़ उड़ाना कुफ़्र का सबसे बड़ा रूप है। जो शख्स अल्लाह की किताब को हँसी-मज़ाक़ की चीज़ बना ले, या नबियों की शान में बुरा कहे, वह अपने ईमान को खो चुका है।

नसीहत और दावत:

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अपने जीवन में अल्लाह की आयतों का कितना सम्मान करते हैं। क्या हम क़ुरआन को सिर्फ़ तिलावत के लिए रखते हैं या उस पर अमल करते हैं? क्या हम अल्लाह के रसूलों की सुन्नत को अपनी ज़िंदगी में अपनाते हैं? आज कई लोग दीन के मामलों में मज़ाक़ करते हैं, इस्लाही बातों पर हँसते हैं, और अल्लाह के दीन को पुराना और बेकार समझते हैं। यह बहुत खतरनाक रवैया है।

अल्लाह हमें हिदायत दे कि हम उसकी आयतों को गंभीरता से लें, उन पर अमल करें, और उनका सम्मान करें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की आयतों का मज़ाक उड़ाते हैं, उनका ठिकाना जहन्नम है — जबकि जो लोग ईमान लाते हैं और नेक अमल करते हैं, उनके लिए जन्नत के बाग़ हैं। अल्लाह हमें सच्चा ईमान और अच्छे अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 104-108 — सूरा अल-कहफ

104الَّذِينَ ضَلَّ سَعْيُهُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَهُمْ يَحْسَبُونَ أَنَّهُمْ يُحْسِنُونَ صُنْعًا
(ये) वह लोग (हैं) जिन की दुनियावी ज़िन्दगी की राई (कोशिश सब) अकारत हो गई और वह उस ख़ाम ख्याल में हैं कि वह यक़ीनन अच्छे-अच्छे काम कर रहे हैं
105أُولَٰئِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ وَلِقَائِهِ فَحَبِطَتْ أَعْمَالُهُمْ فَلَا نُقِيمُ لَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَزْنًا
यही वह लोग हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयातों से और (क़यामत के दिन) उसके सामने हाज़िर होने से इन्कार किया तो उनका सब किया कराया अकारत हुआ तो हम उसके लिए क़यामत के दिन मीजान हिसाब भी क़ायम न करेंगे
106ذَٰلِكَ جَزَاؤُهُمْ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُوا وَاتَّخَذُوا آيَاتِي وَرُسُلِي هُزُوًا
(और सीधे जहन्नुम में झोंक देगें) ये जहन्नुम उनकी करतूतों का बदला है कि उन्होंने कुफ्र एख्तियार किया और मेरी आयतों और मेरे रसूलों को हँसी ठठ्ठा बना लिया
107إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَانَتْ لَهُمْ جَنَّاتُ الْفِرْدَوْسِ نُزُلًا
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किये उनकी मेहमानदारी के लिए फिरदौस (बरी) के बाग़ात होंगे जिनमें वह हमेशा रहेंगे
108خَالِدِينَ فِيهَا لَا يَبْغُونَ عَنْهَا حِوَلًا
और वहाँ से हिलने की भी ख्वाहिश न करेंगे
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
106आयत

अनुवाद — अल-कहफ 106

सूरा अल-कहफ आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और सीधे जहन्नुम में झोंक देगें) ये जहन्नुम उनकी करतूतों…

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Saturday, October 3, 2026

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