अल-कहफ · 108/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
خَالِدِينَ فِيهَا لَا يَبْغُونَ عَنْهَا حِوَلًا ۝١٠٨
Khaalideena feeha la yabghoona `anhaa hiwalaa
📖 हिंदी अर्थ
और वहाँ से हिलने की भी ख्वाहिश न करेंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले, सदैव ठहरने वाले।
  • لَا يَبْغُونَ: वे इच्छा नहीं करेंगे, न ही तलाश करेंगे।
  • حِوَلًا: बदलाव, स्थानांतरण, या किसी और चीज़ में परिवर्तन।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्हें अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से जन्नत (स्वर्ग) में दाखिल किया है। वे लोग जन्नत में हमेशा के लिए रहेंगे—न कभी वहाँ से निकलेंगे और न ही उनके दिल में कभी यह ख़याल आएगा कि वे किसी और जगह जाना चाहें। वे जन्नत की नेमतों, सुकून, और खुशी से इस कदर मगन होंगे कि उन्हें किसी और चीज़ की तमन्ना ही नहीं होगी। वे न तो बदलाव चाहेंगे, न ही किसी दूसरे मुकाम की आरज़ू करेंगे, क्योंकि जन्नत की नेमतें और अल्लाह की रज़ा से मिलने वाला सुकून ऐसा है जिसके आगे दुनिया की हर खुशी और हर आराम बेमानी है।

यह आयत मोमिनों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है—वह जगह जहाँ न दर्द है, न थकान, न ग़म, और न ही कोई कमी। वहाँ की हर चीज़ उनके दिल की मुराद के मुताबिक़ होगी, और अल्लाह की मेहरबानी से उन्हें ऐसी नेमतें मिलेंगी जिनका न तो किसी ने देखा है, न सुना है, और न ही किसी के ख़याल में आ सकती हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों के लिए ऐसा इनाम तैयार किया है जो हमारी समझ से बाहर है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके हुक्मों पर चलते हैं, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाते हैं, उनके लिए यही आख़िरी मंज़िल है—एक ऐसी जगह जहाँ से कभी जाने की इच्छा भी नहीं होगी। यह हमें बताती है कि दुनिया की चंद रोज़ की मुश्किलें और जद्दोजहद कुछ भी नहीं, अगर उसके बदले में हमें ऐसी हमेशा की ज़िंदगी मिलने वाली है। तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए यह आयत खुशखबरी लेकर आई है।



📜 आयत 106-110 — अल-कहफ

106ذَٰلِكَ جَزَاؤُهُمْ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُوا وَاتَّخَذُوا آيَاتِي وَرُسُلِي هُزُوًا
(और सीधे जहन्नुम में झोंक देगें) ये जहन्नुम उनकी करतूतों का बदला है कि उन्होंने कुफ्र एख्तियार किया और मेरी आयतों और मेरे रसूलों को हँसी ठठ्ठा बना लिया
107إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ كَانَتْ لَهُمْ جَنَّاتُ الْفِرْدَوْسِ نُزُلًا
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किये उनकी मेहमानदारी के लिए फिरदौस (बरी) के बाग़ात होंगे जिनमें वह हमेशा रहेंगे
108خَالِدِينَ فِيهَا لَا يَبْغُونَ عَنْهَا حِوَلًا
और वहाँ से हिलने की भी ख्वाहिश न करेंगे
109قُل لَّوْ كَانَ الْبَحْرُ مِدَادًا لِّكَلِمَاتِ رَبِّي لَنَفِدَ الْبَحْرُ قَبْلَ أَن تَنفَدَ كَلِمَاتُ رَبِّي وَلَوْ جِئْنَا بِمِثْلِهِ مَدَدًا
(ऐ रसूल उन लोगों से) कहो कि अगर मेरे परवरदिगार की बातों के (लिखने के) वास्ते समन्दर (का पानी) भी सियाही बन जाए तो क़ब्ल उसके कि मेरे परवरदिगार की बातें ख़त्म हों समन्दर ही ख़त्म हो जाएगा अगरचे हम वैसा ही एक समन्दर उस की मदद को लाँए
110قُلْ إِنَّمَا أَنَا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰ إِلَيَّ أَنَّمَا إِلَٰهُكُمْ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۖ فَمَن كَانَ يَرْجُو لِقَاءَ رَبِّهِ فَلْيَعْمَلْ عَمَلًا صَالِحًا وَلَا يُشْرِكْ بِعِبَادَةِ رَبِّهِ أَحَدًا
(ऐ रसूल) कह दो कि मैं भी तुम्हारा ही ऐसा एक आदमी हूँ (फर्क़ इतना है) कि मेरे पास ये वही आई है कि तुम्हारे माबूद यकता माबूद हैं तो वो शख्स आरज़ूमन्द होकर अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होगा तो उसे अच्छे काम करने चाहिए और अपने परवरदिगार की इबादत में किसी को शरीक न करें
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अनुवाद — अल-कहफ 108

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Tuesday, August 18, 2026

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