अल-कहफ · 2/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
قَيِّمًا لِّيُنذِرَ بَأْسًا شَدِيدًا مِّن لَّدُنْهُ وَيُبَشِّرَ الْمُؤْمِنِينَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ أَجْرًا حَسَنًا ۝٢
Qaiyimal liyunzira baasan shadeedam mil ladunhu wa yubashshiral mu`mineenal lazeena ya`maloonas saalihaati anna lahum ajran hasanaa
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि हर तरह से सधा ताकि जो सख्त अज़ाब ख़ुदा की बारगाह से काफिरों पर नाज़िल होने वाला है उससे लोगों को डराए और जिन मोमिनीन ने अच्छे अच्छे काम किए हैं उनको इस बात की खुशख़बरी दे की उनके लिए बहुत अच्छा अज्र (व सवाब) मौजूद है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • क़य्यिमन: सीधा, अडिग, हर प्रकार की टेढ़-पेच से पाक।
  • बअ्सन शदीद: सख्त अज़ाब, भयंकर यातना।
  • मिन लदुन्हु: उसके पास से, अल्लाह की ओर से।
  • अजरन हसनन: बेहतरीन बदला, यानी जन्नत की नेमतें।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस क़ुरआन को सीधा और अडिग बनाया है—इसमें कोई टेढ़, कोई विरोधाभास और कोई कमी नहीं। यह किताब इसलिए उतारी गई ताकि वह काफ़िरों को उस सख्त अज़ाब से डराए जो अल्लाह की ओर से उनके लिए तैयार है, और उन्हें सचेत करे कि उनका अंजाम बहुत भयानक है। साथ ही, यह उन ईमानवालों को खुशखबरी देती है जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए और अच्छे कर्म करते रहे—उनके लिए बेहतरीन बदला है, यानी जन्नत की नेमतें, जो हमेशा रहने वाली हैं और कभी खत्म नहीं होंगी। यह खुशखबरी उन्हें इसलिए दी गई ताकि वे नेक कामों पर डटे रहें और अल्लाह की रहमत से कभी निराश न हों।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ डराने के लिए नहीं, बल्कि खुशखबरी देने के लिए भी आया है। अल्लाह ने इस किताब को दो रास्ते दिखाने के लिए उतारा—एक तरफ वह गुनाहगारों को अज़ाब से आगाह करता है, तो दूसरी तरफ नेक लोगों को जन्नत की खुशखबरी देता है। यह अल्लाह की रहमत और हिकमत है कि उसने डर और उम्मीद दोनों को एक साथ रखा है, ताकि इंसान डर के मारे गुनाहों से बचे और उम्मीद के सहारे नेक कामों में लगा रहे। आओ, हम इस किताब को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ, इसकी तालीमात पर अमल करें, और उस अज्र-ए-हसन (बेहतरीन बदले) के हक़दार बनें जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है। याद रखें, यह दुनिया फ़ानी है, लेकिन जन्नत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

📜 आयत 1-4 — अल-कहफ

1الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَنزَلَ عَلَىٰ عَبْدِهِ الْكِتَابَ وَلَمْ يَجْعَل لَّهُ عِوَجًا ۜ
हर तरह की तारीफ ख़ुदा ही को (सज़ावार) है जिसने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर किताब (क़ुरान) नाज़िल की और उसमें किसी तरह की कज़ी (ख़राबी) न रखी
2قَيِّمًا لِّيُنذِرَ بَأْسًا شَدِيدًا مِّن لَّدُنْهُ وَيُبَشِّرَ الْمُؤْمِنِينَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ أَجْرًا حَسَنًا
बल्कि हर तरह से सधा ताकि जो सख्त अज़ाब ख़ुदा की बारगाह से काफिरों पर नाज़िल होने वाला है उससे लोगों को डराए और जिन मोमिनीन ने अच्छे अच्छे काम किए हैं उनको इस बात की खुशख़बरी दे की उनके लिए बहुत अच्छा अज्र (व सवाब) मौजूद है
3مَّاكِثِينَ فِيهِ أَبَدًا
जिसमें वह हमेशा (बाइत्मेनान) तमाम रहेगें
4وَيُنذِرَ الَّذِينَ قَالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا
और जो लोग इसके क़ाएल हैं कि ख़ुदा औलाद रखता है उनको (अज़ाब से) डराओ
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीRevelation
2आयत

अनुवाद — अल-कहफ 2

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Tuesday, August 18, 2026

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