अल-कहफ · 31/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
أُولَٰئِكَ لَهُمْ جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهِمُ الْأَنْهَارُ يُحَلَّوْنَ فِيهَا مِنْ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٍ وَيَلْبَسُونَ ثِيَابًا خُضْرًا مِّن سُندُسٍ وَإِسْتَبْرَقٍ مُّتَّكِئِينَ فِيهَا عَلَى الْأَرَائِكِ ۚ نِعْمَ الثَّوَابُ وَحَسُنَتْ مُرْتَفَقًا ۝٣١
Ulaaa`ika lahum Jannaatu `Adnin tajree min tahtihimul anhaaru yuhallawna feehaa min asaawira min zahabinw wa yalbasoona siyaaban khudram min sundusinw wa istabraqim muttaki`eena feehaa `alal araaa`ik; ni`mas sawaab; wa hasunat murtafaqaa
📖 हिंदी अर्थ
ये वही लोग हैं जिनके (रहने सहने के) लिए सदाबहार (बेहश्त के) बाग़ात हैं उनके (मकानात के) नीचे नहरें जारी होगीं वह उन बाग़ात में दमकते हुए कुन्दन के कंगन से सँवारे जाँएगें और उन्हें बारीक रेशम (क्रेब) और दबीज़ रेश्म (वाफते)के धानी जोड़े पहनाए जाएँगें और तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होगें क्या ही अच्छा बदला है और (बेहश्त भी आसाइश की) कैसी अच्छी जगह है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَنَّاتُ عَدْنٍ (जन्नाते अद्न): स्थायी निवास के बगीचे, जहाँ हमेशा रहना हो।
  • أَسَاوِرَ (असाविर): कंगन, जो हाथों में पहने जाते हैं।
  • سُندُسٍ (सुंदुस): बारीक रेशम।
  • إِسْتَبْرَقٍ (इस्तबरक़): मोटा रेशम।
  • الأَرَائِكِ (अराइक): सिंहासन या शाही तख्त, जो पर्दों और सजावट से सुसज्जित हों।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मोमिनों के लिए खुशखबरी है जो ईमान लाए और अच्छे कर्म करते रहे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों के लिए "जन्नाते अद्न" हैं—यानी ऐसे बगीचे जहाँ वे हमेशा रहेंगे, कभी निकलने वाले नहीं। इन बगीचों के नीचे नदियाँ बहती हैं, जिनका पानी अत्यंत मीठा और शीतल है। वहाँ उन्हें सोने के कंगन पहनाए जाएँगे, जो उनके सम्मान और इज़्ज़त की निशानी होंगे। वे हरे रंग के कपड़े पहनेंगे, जो बारीक और मोटे दोनों प्रकार के रेशम से बने होंगे—यह उनके ठाठ और आराम की पोशाक होगी। वे वहाँ शाही तख्तों पर तकिया लगाकर बैठेंगे, जो खूबसूरत पर्दों और सजावट से सुसज्जित होंगे। यह उनका इनाम है, और क्या ही अच्छा इनाम है! और वह जन्नत कितनी अच्छी जगह है, जहाँ वे आराम करेंगे और हमेशा खुश रहेंगे।

दावती पहलू:

यह आयत मोमिनों के लिए एक प्यारी तस्वीर पेश करती है कि अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए क्या कुछ तैयार किया है। ज़रा सोचिए—सोने के कंगन, रेशमी हरे कपड़े, बहती नदियाँ, और शाही तख्त! यह सब उन लोगों के लिए है जो दुनिया में ईमान और अच्छे कर्मों पर ज़िंदगी गुज़ारते हैं। अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसकी रहमत असीम है। यह आयत हमें बताती है कि दुनिया की मेहनत और परेशानी का अंजाम अगर अल्लाह की राह में हो, तो उसका इनाम कभी खत्म नहीं होता। आइए, हम अपने ईमान को मज़बूत करें, अच्छे कर्मों में लगे रहें, और इस जन्नत के हक़दार बनने की कोशिश करें—क्योंकि यही असली कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 29-33 — अल-कहफ

29وَقُلِ الْحَقُّ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَن شَاءَ فَلْيُؤْمِن وَمَن شَاءَ فَلْيَكْفُرْ ۚ إِنَّا أَعْتَدْنَا لِلظَّالِمِينَ نَارًا أَحَاطَ بِهِمْ سُرَادِقُهَا ۚ وَإِن يَسْتَغِيثُوا يُغَاثُوا بِمَاءٍ كَالْمُهْلِ يَشْوِي الْوُجُوهَ ۚ بِئْسَ الشَّرَابُ وَسَاءَتْ مُرْتَفَقًا
और (ऐ रसूल) तुम कह दों कि सच्ची बात (कलमए तौहीद) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (नाज़िल हो चुकी है) बस जो चाहे माने और जो चाहे न माने (मगर) हमने ज़ालिमों के लिए वह आग (दहका के) तैयार कर रखी है जिसकी क़नातें उन्हें घेर लेगी और अगर वह लोग दोहाई करेगें तो उनकी फरियाद रसी खौलते हुए पानी से की जाएगी जो मसलन पिघले हुए ताबें की तरह होगा (और) वह मुँह को भून डालेगा क्या बुरा पानी है और (जहन्नुम भी) क्या बुरी जगह है
30إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ إِنَّا لَا نُضِيعُ أَجْرَ مَنْ أَحْسَنَ عَمَلًا
इसमें शक़ नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम करते रहे तो हम हरगिज़ अच्छे काम वालो के अज्र को अकारत नहीं करते
31أُولَٰئِكَ لَهُمْ جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهِمُ الْأَنْهَارُ يُحَلَّوْنَ فِيهَا مِنْ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٍ وَيَلْبَسُونَ ثِيَابًا خُضْرًا مِّن سُندُسٍ وَإِسْتَبْرَقٍ مُّتَّكِئِينَ فِيهَا عَلَى الْأَرَائِكِ ۚ نِعْمَ الثَّوَابُ وَحَسُنَتْ مُرْتَفَقًا
ये वही लोग हैं जिनके (रहने सहने के) लिए सदाबहार (बेहश्त के) बाग़ात हैं उनके (मकानात के) नीचे नहरें जारी होगीं वह उन बाग़ात में दमकते हुए कुन्दन के कंगन से सँवारे जाँएगें और उन्हें बारीक रेशम (क्रेब) और दबीज़ रेश्म (वाफते)के धानी जोड़े पहनाए जाएँगें और तख्तों पर तकिए लगाए (बैठे) होगें क्या ही अच्छा बदला है और (बेहश्त भी आसाइश की) कैसी अच्छी जगह है
32۞ وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلًا رَّجُلَيْنِ جَعَلْنَا لِأَحَدِهِمَا جَنَّتَيْنِ مِنْ أَعْنَابٍ وَحَفَفْنَاهُمَا بِنَخْلٍ وَجَعَلْنَا بَيْنَهُمَا زَرْعًا
और (ऐ रसूल) इन लोगों से उन दो शख़्शों की मिसाल बयान करो कि उनमें से एक को हमने अंगूर के दो बाग़ दे रखे है और हमने चारो ओर खजूर के पेड़ लगा दिये है और उन दोनों बाग़ के दरमियान खेती भी लगाई है
33كِلْتَا الْجَنَّتَيْنِ آتَتْ أُكُلَهَا وَلَمْ تَظْلِم مِّنْهُ شَيْئًا ۚ وَفَجَّرْنَا خِلَالَهُمَا نَهَرًا
वह दोनों बाग़ खूब फल लाए और फल लाने में कुछ कमी नहीं की और हमने उन दोनों बाग़ों के दरमियान नहर भी जारी कर दी है
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अनुवाद — अल-कहफ 31

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सूरा आयत 31/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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