Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاضْرِبْ لَهُمْ مَثَلًا: उनके लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
- جَعَلْنَا لِأَحَدِهِمَا جَنَّتَيْنِ: हमने उन दोनों में से एक के लिए दो बाग़ बनाए।
- مِنْ أَعْنَابٍ: अंगूरों के।
- وَحَفَفْنَاهُمَا بِنَخْلٍ: और हमने उन दोनों बाग़ों को खजूर के पेड़ों से घेर दिया।
- وَجَعَلْنَا بَيْنَهُمَا زَرْعًا: और हमने उन दोनों के बीच खेती (फसलें) उगाईं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप अपनी क़ौम के काफ़िरों को दो व्यक्तियों की मिसाल दीजिए — एक ईमानवाला और दूसरा काफ़िर। यह मिसाल पुरानी उम्मतों से ली गई है, ताकि लोग समझ सकें कि दुनिया की दौलत और ठाठ-बाट किसी के ईमान का पैमाना नहीं है।
हमने उन दोनों में से काफ़िर व्यक्ति को दो विशाल बाग़ दिए, जो अंगूर की बेलों से भरे हुए थे। इन बाग़ों को हमने चारों ओर से खजूर के ऊँचे-ऊँचे पेड़ों से घेर दिया, जो उनकी शोभा और सुरक्षा का कारण बने। इन दोनों बाग़ों के बीच की खाली ज़मीन में हमने तरह-तरह की खेती उगाई — गेहूँ, जौ और अन्य फ़सलें — ताकि उस व्यक्ति को हर प्रकार का भोजन और फल मिल सके। इस तरह वह ज़मीन हर तरह की नेमतों से भरपूर थी, कोई हिस्सा बेकार या वीरान नहीं था।
यह मिसाल बताती है कि अल्लाह तआला जिसे चाहता है दुनिया में खूब रिज़्क़ देता है, लेकिन यह दौलत किसी की आख़िरत की कामयाबी की गारंटी नहीं है। असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह का शुक्र अदा करे और उसकी नेमतों को अपने लिए फ़ित्ना (आज़माइश) न बनाए। यह क़िस्सा आगे चलकर बताएगा कि वह काफ़िर अपनी दौलत पर इतना घमंडी हो गया कि उसने ईमानवाले भाई की नसीहत को ठुकरा दिया और अपने बाग़ों को हमेशा रहने वाला समझ लिया — जबकि असली मालिक तो अल्लाह ही है।
इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि दुनिया की चमक-दमक और माल-दौलत पर नाज़ करना मूर्खता है। अल्लाह ने जो कुछ दिया है, उसका सही उपयोग करें, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें और याद रखें कि यह सब कुछ अस्थायी है। असली जीवन आख़िरत का है, जहाँ अच्छे कर्मों के सिवा कोई चीज़ काम नहीं आएगी। अल्लाह की रहमत और उसका दिया हुआ रिज़्क़ उसी को मिलता है जो उसके आगे झुकता है और उसकी बताई हुई राह पर चलता है।
📜 आयत 30-34 — सूरा अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 32
सूरा अल-कहफ आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) इन लोगों से उन दो शख़्शों की…सूरा आयत 32/110 — सूरा अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-कहफ सुनें, सूरा अल-कहफ अनुवाद, सूरा अल-कहफ mp3, सूरा अल-कहफ pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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