अल-कहफ · 50/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ كَانَ مِنَ الْجِنِّ فَفَسَقَ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِ ۗ أَفَتَتَّخِذُونَهُ وَذُرِّيَّتَهُ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِي وَهُمْ لَكُمْ عَدُوٌّ ۚ بِئْسَ لِلظَّالِمِينَ بَدَلًا ۝٥٠
Wa iz qulnaa lilma laaa`ikatis judoo li Aadama fasajadooo illaaa Ibleesa kaana minal jinni fafasaqa `an amri Rabbih; afatattakhizoonahoo wa zurriyatahooo awliyaaa`a min doonee wa hum lakum `aduww; bi`sa lizzaalimeena badalaa
📖 हिंदी अर्थ
और (वह वक्त याद करो) जब हमने फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया (ये इबलीस) जिन्नात से था तो अपने परवरदिगार के हुक्म से निकल भागा तो (लोगों) क्या मुझे छोड़कर उसको और उसकी औलाद को अपना दोस्त बनाते हो हालॉकि वह तुम्हारा (क़दीमी) दुश्मन हैं ज़ालिमों (ने ख़ुदा के बदले शैतान को अपना दोस्त बनाया ये उन) का क्या बुरा ऐवज़ है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَفَسَقَ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِ: अपने रब के आदेश से निकल गया, यानी उसकी अवज्ञा की।
  • أَوْلِيَاءَ: मित्र, सहायक, संरक्षक।
  • بَدَلًا: बदले में, विकल्प के रूप में।

तफसीर (व्याख्या):

और ऐ नबी! आप उस समय को याद कीजिए जब हमने सभी फ़रिश्तों से कहा: "आदम को सजदा करो" — यह सजदा इबादत का नहीं, बल्कि सम्मान और आदर का था। सभी फ़रिश्तों ने तुरंत अपने रब के आदेश का पालन किया और सजदे में झुक गए, लेकिन इबलीस ने ऐसा नहीं किया। वह जिन्नों में से था, फ़रिश्तों में से नहीं, और उसने अपने रब के आदेश से विद्रोह करते हुए घमंड और ईर्ष्या के कारण सजदा करने से इनकार कर दिया। उसने अपने रब की आज्ञा का उल्लंघन किया और अपने अहंकार के कारण सत्य से भटक गया।

अब ऐ लोगों! क्या तुम उसे और उसकी संतान को मुझे छोड़कर अपना मित्र और सहायक बनाओगे? हालाँकि वे तुम्हारे खुले दुश्मन हैं। वही तो है जिसने आदम को धोखा दिया और उन्हें जन्नत से निकलवाया। क्या कोई समझदार व्यक्ति अपने दुश्मन को अपना दोस्त बनाएगा? यह कितनी बुरी मिसाल है कि ज़ालिम लोग अल्लाह की आज्ञा मानने के बजाय शैतान और उसकी संतान को अपना संरक्षक बना लें! यह उनके लिए कितना बुरा बदला है कि उन्होंने अल्लाह की रहमत और मार्गदर्शन को छोड़कर शैतान की पैरवी को चुना।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक सिखाती है। शैतान हमारा सबसे पुराना और सबसे बड़ा दुश्मन है — जिसने अल्लाह के सामने घमंड किया और उसकी अवज्ञा की। यदि हम उसकी पैरवी करते हैं, उसके बहकावे में आते हैं, तो हम उसे अपना मित्र बना रहे हैं, जबकि वह हमें हलाक करना चाहता है। अल्लाह हमसे प्रेम करता है और हमारी भलाई चाहता है, इसलिए उसने हमें शैतान के धोखे से आगाह किया है। आइए! हम अपने जीवन को अल्लाह की आज्ञा के अनुसार चलाएँ, उसकी किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत को अपनाएँ, और शैतान के हर बहकावे से बचें। याद रखें, अल्लाह की राह पर चलने वालों के लिए सफलता और शांति है, जबकि शैतान की पैरवी करने वालों के लिए अफसोस और नुकसान है। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफीक दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 48-52 — अल-कहफ

48وَعُرِضُوا عَلَىٰ رَبِّكَ صَفًّا لَّقَدْ جِئْتُمُونَا كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ بَلْ زَعَمْتُمْ أَلَّن نَّجْعَلَ لَكُم مَّوْعِدًا
सबके सब तुम्हारे परवरदिगार के सामने कतार पे क़तार पेश किए जाएँगें और (उस वक्त हम याद दिलाएँगे कि जिस तरह हमने तुमको पहली बार पैदा किया था (उसी तरह) तुम लोगों को (आख़िर) हमारे पास आना पड़ा मगर तुम तो ये ख्याल करते थे कि हम तुम्हारे (दोबारा पैदा करने के) लिए कोई वक्त ही न ठहराएँगें
49وَوُضِعَ الْكِتَابُ فَتَرَى الْمُجْرِمِينَ مُشْفِقِينَ مِمَّا فِيهِ وَيَقُولُونَ يَا وَيْلَتَنَا مَالِ هَٰذَا الْكِتَابِ لَا يُغَادِرُ صَغِيرَةً وَلَا كَبِيرَةً إِلَّا أَحْصَاهَا ۚ وَوَجَدُوا مَا عَمِلُوا حَاضِرًا ۗ وَلَا يَظْلِمُ رَبُّكَ أَحَدًا
और लोगों के आमाल की किताब (सामने) रखी जाएँगी तो तुम गुनेहगारों को देखोगे कि जो कुछ उसमें (लिखा) है (देख देख कर) सहमे हुए हैं और कहते जाते हैं हाए हमारी यामत ये कैसी किताब है कि न छोटे ही गुनाह को बे क़लमबन्द किए छोड़ती है न बड़े गुनाह को और जो कुछ इन लोगों ने (दुनिया में) किया था वह सब (लिखा हुआ) मौजूद पाएँगें और तेरा परवरदिगार किसी पर (ज़र्रा बराबर) ज़ुल्म न करेगा
50وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ كَانَ مِنَ الْجِنِّ فَفَسَقَ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِ ۗ أَفَتَتَّخِذُونَهُ وَذُرِّيَّتَهُ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِي وَهُمْ لَكُمْ عَدُوٌّ ۚ بِئْسَ لِلظَّالِمِينَ بَدَلًا
और (वह वक्त याद करो) जब हमने फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो तो इबलीस के सिवा सबने सजदा किया (ये इबलीस) जिन्नात से था तो अपने परवरदिगार के हुक्म से निकल भागा तो (लोगों) क्या मुझे छोड़कर उसको और उसकी औलाद को अपना दोस्त बनाते हो हालॉकि वह तुम्हारा (क़दीमी) दुश्मन हैं ज़ालिमों (ने ख़ुदा के बदले शैतान को अपना दोस्त बनाया ये उन) का क्या बुरा ऐवज़ है
51۞ مَّا أَشْهَدتُّهُمْ خَلْقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلَا خَلْقَ أَنفُسِهِمْ وَمَا كُنتُ مُتَّخِذَ الْمُضِلِّينَ عَضُدًا
मैने न तो आसमान व ज़मीन के पैदा करने के वक्त उनको (मदद के लिए) बुलाया था और न खुद उनके पैदा करने के वक्त अौर मै (ऐसा गया गुज़रा) न था कि मै गुमराह करने वालों को मददगार बनाता
52وَيَوْمَ يَقُولُ نَادُوا شُرَكَائِيَ الَّذِينَ زَعَمْتُمْ فَدَعَوْهُمْ فَلَمْ يَسْتَجِيبُوا لَهُمْ وَجَعَلْنَا بَيْنَهُم مَّوْبِقًا
और (उस दिन से डरो) जिस दिन ख़ुदा फरमाएगा कि अब तुम जिन लोगों को मेरा शरीक़ ख्याल करते थे उनको (मदद के लिए) पुकारो तो वह लोग उनको पुकारेगें मगर वह लोग उनकी कुछ न सुनेगें और हम उन दोनों के बीच में महलक (खतरनाक) आड़ बना देंगे
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अनुवाद — अल-कहफ 50

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Tuesday, August 18, 2026

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