मरियम · 75/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
قُلْ مَن كَانَ فِي الضَّلَالَةِ فَلْيَمْدُدْ لَهُ الرَّحْمَٰنُ مَدًّا ۚ حَتَّىٰ إِذَا رَأَوْا مَا يُوعَدُونَ إِمَّا الْعَذَابَ وَإِمَّا السَّاعَةَ فَسَيَعْلَمُونَ مَنْ هُوَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضْعَفُ جُندًا ۝٧٥
Qul man kaana fidda laalati falyamdud lahur Rahmaanu maddaa; hattaaa izaa ra aw maa yoo`adoona immal `azaaba wa immas Saa`ata fasa ya`lamoona man huwa sharrum makaananw wa ad`afu jundaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) कह दो कि जो शख्स गुमराही में पड़ा है तो खुदा उसको ढ़ील ही देता चला जाता है यहाँ तक कि उस चीज़ को (अपनी ऑंखों से) देख लेंगे जिनका उनसे वायदा किया गया है या अज़ाब या क़यामत तो उस वक्त उन्हें मालूम हो जाएगा कि मरतबे में कौन बदतर है और लश्कर (जत्थे) में कौन कमज़ोर है (बेकस) है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الضَّلَالَةِ: सत्य पथ से भटकना, कुफ्र और गुमराही।
  • فَلْيَمْدُدْ لَهُ الرَّحْمَنُ مَدًّا: अल्लाह उसे उसकी गुमराही में ढील देता रहे और उसे बढ़ावा देता रहे।
  • مَكَانًا: ठिकाना, निवास स्थान।
  • أَضْعَفُ جُندًا: सेना और सहायकों की दृष्टि से सबसे कमज़ोर।

तफसीर:

ऐ नबी! आप इन मुनकिरीन से कह दीजिए कि जो कोई भी सत्य से भटककर गुमराही में पड़ा हुआ है, तो रहमान (अल्लाह) उसे उसकी गुमराही में मुहलत देता रहता है और उसे बढ़ावा देता रहता है। यह अल्लाह की ओर से उसकी सज़ा को टालना नहीं है, बल्कि यह उसकी परीक्षा और उसके लिए एक अवसर है, ताकि वह और अधिक गुमराह होता जाए। यह अल्लाह की रहमत का एक रूप है कि वह इंसान को उसकी ज़िद और सरकशी के बावजूद तुरंत पकड़ नहीं लेता, बल्कि उसे मौका देता है, ताकि वह सुधर जाए।

यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को आँखों से देख लेंगे जिसका उन्हें वादा दिया गया है — चाहे वह दुनिया में आने वाला अज़ाब हो (जैसे कि मुसलमानों के हाथों उनकी हार, क़त्ल, या क़ैद) या फिर क़यामत का दिन हो (जब वे जहन्नम की आग में झोंक दिए जाएँगे) — उस वक़्त उन्हें साफ़ पता चल जाएगा कि कौन बदतर ठिकाने वाला है और कौन सबसे कमज़ोर सेना वाला है। उस दिन वे ख़ुद देख लेंगे कि असली बुरा ठिकाना और कमज़ोर सहायक उनका है, न कि ईमानवालों का। मोमिनीन का ठिकाना जन्नत है और उनकी सेना अल्लाह की मदद से सबसे मज़बूत है, जबकि काफ़िरों का ठिकाना जहन्नम है और उनकी सेना बिल्कुल बेबस और कमज़ोर है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह रहमान है और अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है। वह गुनाहगारों को फौरन सज़ा नहीं देता, बल्कि उन्हें तौबा करने का मौका देता है। यह अल्लाह की रहमत की एक झलक है कि वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी ओर लौट आएँ। लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि अल्लाह की मुहलत उसकी पकड़ से बचने का ज़रिया नहीं है। जब वक़्त आ जाएगा, तो हर शख्स को अपने किए का नतीजा भुगतना ही पड़ेगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की रहमत का फायदा उठाएँ, अपनी गुमराही से तौबा करें, और सीधे रास्ते पर चलें, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जिनका ठिकाना बुरा हो और जिनकी सेना कमज़ोर हो। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 73-77 — मरियम

73وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ قَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آمَنُوا أَيُّ الْفَرِيقَيْنِ خَيْرٌ مَّقَامًا وَأَحْسَنُ نَدِيًّا
और जब हमारी वाज़ेए रौशन आयतें उनके सामने पढ़ी जाती हैं तो जिन लोगों ने कुफ़्र किया ईमानवालों से पूछते हैं भला ये तो बताओ कि हम तुम दोनों फरीक़ो में से मरतबे में कौन ज्यादा बेहतर है और किसकी महफिल ज्यादा अच्छी है
74وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هُمْ أَحْسَنُ أَثَاثًا وَرِئْيًا
हालाँकि हमने उनसे पहले बहुत सी जमाअतों को हलाक कर छोड़ा जो उनसे साज़ो सामान और ज़ाहिरी नमूद में कहीं बढ़ चढ़ के थी
75قُلْ مَن كَانَ فِي الضَّلَالَةِ فَلْيَمْدُدْ لَهُ الرَّحْمَٰنُ مَدًّا ۚ حَتَّىٰ إِذَا رَأَوْا مَا يُوعَدُونَ إِمَّا الْعَذَابَ وَإِمَّا السَّاعَةَ فَسَيَعْلَمُونَ مَنْ هُوَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضْعَفُ جُندًا
(ऐ रसूल) कह दो कि जो शख्स गुमराही में पड़ा है तो खुदा उसको ढ़ील ही देता चला जाता है यहाँ तक कि उस चीज़ को (अपनी ऑंखों से) देख लेंगे जिनका उनसे वायदा किया गया है या अज़ाब या क़यामत तो उस वक्त उन्हें मालूम हो जाएगा कि मरतबे में कौन बदतर है और लश्कर (जत्थे) में कौन कमज़ोर है (बेकस) है
76وَيَزِيدُ اللَّهُ الَّذِينَ اهْتَدَوْا هُدًى ۗ وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ مَّرَدًّا
और जो लोग राहे रास्त पर हैं खुदा उनकी हिदायत और ज्यादा करता जाता है और बाक़ी रह जाने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब की राह से भी बेहतर है और अन्जाम के ऐतबार से (भी) बेहतर है
77أَفَرَأَيْتَ الَّذِي كَفَرَ بِآيَاتِنَا وَقَالَ لَأُوتَيَنَّ مَالًا وَوَلَدًا
(ऐ रसूल) क्या तुमने उस शख्स पर भी नज़र की जिसने हमारी आयतों से इन्कार किया और कहने लगा कि (अगर क़यामत हुईतो भी) मुझे माल और औलाद ज़रूर मिलेगी
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
75आयत

अनुवाद — मरियम 75

सूरा मरियम आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) कह दो कि जो शख्स गुमराही में पड़ा…

सूरा आयत 75/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए