अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَنْ أَظْلَمُ: उससे बड़ा ज़ालिम कौन हो सकता है?
- مَنَعَ مَسَاجِدَ اللَّهِ: अल्लाह की मस्जिदों को रोका।
- أَن يُذْكَرَ فِيهَا اسْمُهُ: कि उनमें अल्लाह का नाम लिया जाए।
- وَسَعَىٰ فِي خَرَابِهَا: और उनके वीरान करने में कोशिश की।
- خِزْيٌ: रुसवाई, अपमान और ज़िल्लत।
- عَذَابٌ عَظِيمٌ: बहुत बड़ा अज़ाब।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों के ज़ुल्म की सबसे बड़ी मिसाल बयान की है जो अल्लाह की मस्जिदों में उसका ज़िक्र, नमाज़, क़ुरआन की तिलावत और इबादत को रोकते हैं, और उन मस्जिदों को वीरान करने की कोशिश करते हैं—चाहे वह मस्जिदों को गिराकर हो, बंद करके हो, या मोमिनों को उनमें जाने से रोककर। अल्लाह फ़रमाता है कि इनसे बढ़कर ज़ालिम और कोई नहीं हो सकता।
यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने बैतुल मुक़द्दस को वीरान किया, जैसे बुख्त नस्र और उसके साथी, या मक्का के मुशरिकों ने मस्जिदे हराम से मुसलमानों को रोका। इन ज़ालिमों के लिए अल्लाह ने फ़रमाया कि उन्हें मस्जिदों में दाख़िल होने का हक़ भी नहीं, और अगर दाख़िल हों भी तो डरते हुए, काँपते हुए दाख़िल हों। उनकी सज़ा यह है कि दुनिया में उन्हें रुसवाई, ज़िल्लत और अपमान मिलेगा—कभी क़त्ल के रूप में, कभी जज़िया देने की मजबूरी के रूप में—और आख़िरत में उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब तैयार है, जो जहन्नुम की आग है।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह की मस्जिदें उसकी ज़मीन पर सबसे प्यारी जगहें हैं। इन्हें आबाद रखना, इनमें ज़िक्र और इबादत का इंतज़ाम करना बहुत बड़ी नेकी है, और इन्हें वीरान करना या इनसे रोकना सबसे बड़ा ज़ुल्म है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि मस्जिदों की खिदमत, उनकी सफ़ाई, उनकी देखभाल और वहाँ इबादत का माहौल बनाना हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है। जो लोग मस्जिदों को वीरान करते हैं या उनमें जाने से रोकते हैं, वे अल्लाह के यहाँ सबसे बड़े ज़ालिम हैं।
- अल्लाह का क़ानून है कि जो लोग दूसरों को अल्लाह की इबादत से रोकते हैं, उन्हें दुनिया में भी ज़िल्लत उठानी पड़ती है और आख़िरत में भी सख्त सज़ा मिलेगी। यह हमें सिखाता है कि हम कभी किसी को अल्लाह की इबादत और नेकी से न रोकें, बल्कि लोगों को अल्लाह की तरफ बुलाने का ज़रिया बनें।
- मस्जिदों की आबादी सिर्फ़ ईमान वालों के हाथ से होती है। यह हमारे लिए एक शरफ़ है कि अल्लाह ने हमें अपनी मस्जिदों में आने और उसका नाम लेने की तौफ़ीक़ दी है। हमें इस नेमत की क़द्र करनी चाहिए और मस्जिदों को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बनाना चाहिए।
📜 आयत 112-116 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 114
सूरा अल-बकरा आयत 114 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो खुदा की मसजिदों…सूरा आयत 114/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 112–116. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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