अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اشْتَرَوُا: खरीदा, अर्थात बदला किया।
- الضَّلَالَةَ: गुमराही, पथभ्रष्टता।
- بِالْهُدَىٰ: मार्गदर्शन के बदले में।
- رَبِحَت: लाभ हुआ, नफा हुआ।
- تِجَارَتُهُمْ: उनका व्यापार, उनका सौदा।
- مُهْتَدِينَ: हिदायत पाने वाले, सीधे मार्ग पर चलने वाले।
विस्तृत व्याख्या:
ये मुनाफिक (दिखावटी मुसलमान) वे लोग हैं जिन्होंने हिदायत और ईमान को छोड़कर गुमराही और कुफ्र को खरीद लिया। यानी उन्होंने सच्चे मार्गदर्शन को त्यागकर पथभ्रष्टता को अपना लिया, और ईमान के बदले कुफ्र को चुन लिया। यह उनका सौदा बिल्कुल घाटे का रहा, क्योंकि उन्होंने अनमोल चीज़ (ईमान और हिदायत) को बेचकर बेकार और हानिकारक चीज़ (गुमराही) को खरीदा। उनके इस व्यापार में न तो कोई लाभ हुआ और न ही वे सफल हुए। वास्तव में वे हिदायत से वंचित रहे और अपने इस कृत्य से उन्होंने अपना सब कुछ गंवा दिया। यह स्पष्ट घाटा और खुली हानि है, क्योंकि उन्होंने ईमान की रोशनी को छोड़कर कुफ्र का अंधेरा चुना, और इस तरह वे कभी सीधे रास्ते पर नहीं आ सके।
शिक्षाएँ और लाभ:
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान और हिदायत सबसे कीमती नेमतें हैं, जिन्हें किसी भी दुनियावी चीज़ के बदले नहीं बेचना चाहिए।
- मुनाफिकी और धोखे का अंजाम हमेशा नुकसान होता है, भले ही दुनिया में वे कितना भी फायदा कमा लें।
- सच्चा लाभ और सफलता केवल अल्लाह की राह पर चलने में है, और जो इस राह को छोड़ता है वह असली घाटे में रहता है।
- यह आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अपने धर्म और ईमान को किसी भी दुनियावी मोल पर न बेचें, क्योंकि दुनिया की सारी चीज़ें ईमान के एक कतरे के बराबर भी नहीं हैं।
- इससे हमें यह भी सीख मिलती है कि इंसान को अपने हर काम में अल्लाह की रज़ा और सच्चाई को मापदंड बनाना चाहिए, न कि सिर्फ दुनियावी फायदे को।
📜 आयत 14-18 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 16
सूरा अल-बकरा आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यही वह लोग हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही ख़रीद…सूरा आयत 16/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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