अल-बकरा · 16/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ اشْتَرَوُا الضَّلَالَةَ بِالْهُدَىٰ فَمَا رَبِحَت تِّجَارَتُهُمْ وَمَا كَانُوا مُهْتَدِينَ ۝١٦
Ulaaa`ikal lazeenash tara wud dalaalata bilhudaa famaa rabihat tijaaratuhum wa maa kaanoo muhtadeen
📖 हिंदी अर्थ
यही वह लोग हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही ख़रीद ली, फिर न उनकी तिजारत ही ने कुछ नफ़ा दिया और न उन लोगों ने हिदायत ही पाई
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اشْتَرَوُا: खरीदा, अर्थात बदला किया।
  • الضَّلَالَةَ: गुमराही, पथभ्रष्टता।
  • بِالْهُدَىٰ: मार्गदर्शन के बदले में।
  • رَبِحَت: लाभ हुआ, नफा हुआ।
  • تِجَارَتُهُمْ: उनका व्यापार, उनका सौदा।
  • مُهْتَدِينَ: हिदायत पाने वाले, सीधे मार्ग पर चलने वाले।

विस्तृत व्याख्या:

ये मुनाफिक (दिखावटी मुसलमान) वे लोग हैं जिन्होंने हिदायत और ईमान को छोड़कर गुमराही और कुफ्र को खरीद लिया। यानी उन्होंने सच्चे मार्गदर्शन को त्यागकर पथभ्रष्टता को अपना लिया, और ईमान के बदले कुफ्र को चुन लिया। यह उनका सौदा बिल्कुल घाटे का रहा, क्योंकि उन्होंने अनमोल चीज़ (ईमान और हिदायत) को बेचकर बेकार और हानिकारक चीज़ (गुमराही) को खरीदा। उनके इस व्यापार में न तो कोई लाभ हुआ और न ही वे सफल हुए। वास्तव में वे हिदायत से वंचित रहे और अपने इस कृत्य से उन्होंने अपना सब कुछ गंवा दिया। यह स्पष्ट घाटा और खुली हानि है, क्योंकि उन्होंने ईमान की रोशनी को छोड़कर कुफ्र का अंधेरा चुना, और इस तरह वे कभी सीधे रास्ते पर नहीं आ सके।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान और हिदायत सबसे कीमती नेमतें हैं, जिन्हें किसी भी दुनियावी चीज़ के बदले नहीं बेचना चाहिए।
  2. मुनाफिकी और धोखे का अंजाम हमेशा नुकसान होता है, भले ही दुनिया में वे कितना भी फायदा कमा लें।
  3. सच्चा लाभ और सफलता केवल अल्लाह की राह पर चलने में है, और जो इस राह को छोड़ता है वह असली घाटे में रहता है।
  4. यह आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अपने धर्म और ईमान को किसी भी दुनियावी मोल पर न बेचें, क्योंकि दुनिया की सारी चीज़ें ईमान के एक कतरे के बराबर भी नहीं हैं।
  5. इससे हमें यह भी सीख मिलती है कि इंसान को अपने हर काम में अल्लाह की रज़ा और सच्चाई को मापदंड बनाना चाहिए, न कि सिर्फ दुनियावी फायदे को।
🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — अल-बकरा

14وَإِذَا لَقُوا الَّذِينَ آمَنُوا قَالُوا آمَنَّا وَإِذَا خَلَوْا إِلَىٰ شَيَاطِينِهِمْ قَالُوا إِنَّا مَعَكُمْ إِنَّمَا نَحْنُ مُسْتَهْزِئُونَ
और जब उन लोगों से मिलते हैं जो ईमान ला चुके तो कहते हैं हम तो ईमान ला चुके और जब अपने शैतानों के साथ तनहा रह जाते हैं तो कहते हैं हम तुम्हारे साथ हैं हम तो (मुसलमानों को) बनाते हैं
15اللَّهُ يَسْتَهْزِئُ بِهِمْ وَيَمُدُّهُمْ فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ
(वह क्या बनाएँगे) खुदा उनको बनाता है और उनको ढील देता है कि वह अपनी सरकशी में ग़लत पेचाँ (उलझे) रहें
16أُولَٰئِكَ الَّذِينَ اشْتَرَوُا الضَّلَالَةَ بِالْهُدَىٰ فَمَا رَبِحَت تِّجَارَتُهُمْ وَمَا كَانُوا مُهْتَدِينَ
यही वह लोग हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही ख़रीद ली, फिर न उनकी तिजारत ही ने कुछ नफ़ा दिया और न उन लोगों ने हिदायत ही पाई
17مَثَلُهُمْ كَمَثَلِ الَّذِي اسْتَوْقَدَ نَارًا فَلَمَّا أَضَاءَتْ مَا حَوْلَهُ ذَهَبَ اللَّهُ بِنُورِهِمْ وَتَرَكَهُمْ فِي ظُلُمَاتٍ لَّا يُبْصِرُونَ
उन लोगों की मिसाल (तो) उस शख्स की सी है जिसने (रात के वक्त मजमे में) भड़कती हुईआग रौशन की फिर जब आग (के शोले) ने उसके गिर्दों पेश (चारों ओर) खूब उजाला कर दिया तो खुदा ने उनकी रौशनी ले ली और उनको घटाटोप अंधेरे में छोड़ दिया
18صُمٌّ بُكْمٌ عُمْيٌ فَهُمْ لَا يَرْجِعُونَ
कि अब उन्हें कुछ सुझाई नहीं देता ये लोग बहरे गूँगे अन्धे हैं कि फिर अपनी गुमराही से बाज़ नहीं आ सकते
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अनुवाद — अल-बकरा 16

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Tuesday, August 18, 2026

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