अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَسْتَهْزِئُ: मज़ाक उड़ाता है, उपहास करता है।
- يَمُدُّهُمْ: उन्हें ढील देता है, मोहलत देता है।
- طُغْيَانِهِمْ: उनकी सरकशी, अत्याचार, हद से गुज़र जाना।
- يَعْمَهُونَ: भटकते हुए अंधेरे में भटकना, हैरान और परेशान रहना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के मज़ाक का जवाब देते हुए फ़रमाता है कि वे जिस तरह ईमानवालों का उपहास करते हैं, अल्लाह उनके साथ उन्हीं के जैसा व्यवहार करता है। यानी अल्लाह उन्हें दुनिया में मुसलमानों के साथ रहने की इजाज़त देता है, उन पर इस्लामी अहकाम लागू करता है, और उन्हें मुसलमानों जैसा दर्जा देता है, जबकि वे असल में ईमान नहीं रखते। यह अल्लाह की ओर से उनके साथ एक तरह का व्यवहारिक उपहास है, क्योंकि वे सोचते हैं कि वे मुसलमानों को धोखा दे रहे हैं, लेकिन असल में वे खुद धोखे में हैं।
इसके साथ ही अल्लाह उन्हें मोहलत देता है और उनकी उम्र बढ़ाता है, ताकि वे अपनी सरकशी और गुमराही में और आगे बढ़ें। वे हर दिन अपनी भटकन में बढ़ते जाते हैं, लेकिन उन्हें इसका एहसास नहीं होता। वे हैरान और परेशान रहते हैं, न तो सच्चे ईमान की रोशनी उन्हें मिलती है और न ही वे अपने कुकर्मों से बाज़ आते हैं। यह उनके लिए अल्लाह की ओर से एक सज़ा है, जो उनके किए की प्रतिक्रिया है — जैसा कर्म करोगे, वैसा ही बदला पाओगे।
आख़िरत में उन्हें सख्त अज़ाब का सामना करना पड़ेगा, जबकि दुनिया में उन्हें मुसलमानों के साथ रहने की सूरत दी गई। यह अल्लाह की हिकमत है कि वह उन्हें ढील देता है, लेकिन उन्हें भूलता नहीं है। उनका अंजाम बहुत बुरा होगा, क्योंकि उन्होंने ईमान का रास्ता छोड़कर नफ़ाक़ (धोखेबाज़ी) का रास्ता अपनाया।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह की सज़ा में देरी हो सकती है, लेकिन वह कभी टलती नहीं। मुनाफ़िक़ों और ज़ालिमों को मोहलत मिलती है, लेकिन यह मोहलत उनके लिए और बर्बादी का सामान बनती है।
- जो लोग दूसरों का मज़ाक उड़ाते हैं, उन्हें अल्लाह की ओर से ऐसा बदला मिलता है जो उनके किए के बराबर होता है — यह अल्लाह का न्याय है।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे कभी मुनाफ़िक़ों की बातों से विचलित न हों, क्योंकि अल्लाह उनके हाल को अच्छी तरह जानता है और उनका हिसाब लेने वाला है।
- अल्लाह की ढील (मोहलत) को उसकी रहमत नहीं समझना चाहिए; यह अक्सर उन लोगों के लिए एक इम्तिहान होता है जो अपनी सरकशी में बढ़ते जाते हैं। सच्चे ईमानवाले को चाहिए कि वह हर पल अल्लाह की तरफ लौटे और अपने गुनाहों से तौबा करे।
📜 आयत 13-17 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 15
सूरा अल-बकरा आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (वह क्या बनाएँगे) खुदा उनको बनाता है और उनको ढील…सूरा आयत 15/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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