अल-बकरा · 208/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا ادْخُلُوا فِي السِّلْمِ كَافَّةً وَلَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ ۚ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ ۝٢٠٨
Yaaa ayyuhal lazeena aamanud khuloo fis silmi kaaaffatanw wa laa tattabi`oo khutuwaatish Shaitaan; innahoo lakum `aduwwum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
ईमान वालों तुम सबके सब एक बार इस्लाम में (पूरी तरह ) दाख़िल हो जाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तुम्हारा यक़ीनी ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السِّلْم (अस-सिल्म): इस्लाम, आज्ञाकारिता और समर्पण।
  • كَافَّةً (क़ाफ़्फ़तन): पूर्ण रूप से, सम्पूर्ण, सभी भागों सहित।
  • خُطُوَاتِ (ख़ुतुवात): क़दमों के निशान, राहें, तरीक़े।
  • عَدُوٌّ مُّبِينٌ (अदुव्वुन मुबीन): खुला और स्पष्ट शत्रु।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे ईमानवालो! तुम सब मिलकर इस्लाम में पूर्ण रूप से प्रवेश करो। इसका अर्थ यह है कि तुम केवल कुछ आदेशों को मानकर संतुष्ट न हो जाओ, बल्कि इस्लाम के सभी आदेशों, नियमों और शिक्षाओं को बिना किसी भेदभाव के अपनाओ। जिस प्रकार पहले की किताबों वालों (अहले-किताब) ने कुछ बातों पर ईमान रखा और कुछ को अस्वीकार कर दिया, उसी प्रकार तुम भी इस्लाम के किसी भी हिस्से को न छोड़ो।

साथ ही, शैतान के निशानों पर न चलो, अर्थात उसके उन तरीक़ों और रास्तों से बचो जिनके द्वारा वह तुम्हें गुनाहों और अवज्ञा की ओर बुलाता है। वह तुम्हारा खुला शत्रु है, उसकी दुश्मनी कोई छिपी हुई बात नहीं है, बल्कि उसने आदम (अलैहिस्सलाम) के समय से ही स्पष्ट रूप से अपनी शत्रुता का प्रदर्शन किया है। इसलिए उससे सावधान रहो और उसकी बातों में आकर अपने ईमान को कमज़ोर न करो।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस्लाम एक सम्पूर्ण जीवन-प्रणाली है। इसे अधूरा नहीं माना जा सकता; इसे पूर्ण रूप से अपनाना ही सच्चा ईमान है।
  2. ईमान और इस्लाम में आधे-अधूरेपन की गुंजाइश नहीं। जो व्यक्ति कुछ आदेश माने और कुछ छोड़ दे, वह वास्तव में उसी रवैये का अनुसरण करता है जो अहले-किताब में पाया जाता था।
  3. शैतान को खुला शत्रु मानकर उससे सतर्क रहना चाहिए। जो व्यक्ति अपने शत्रु को पहचान ले, वह उसके जाल में आसानी से नहीं फँसता।
  4. यह आयत मुसलमानों को एकता और पूर्ण समर्पण की शिक्षा देती है, जिससे समाज में भाईचारा और स्थिरता आती है।
  5. इस्लाम की राह ही सच्ची कामयाबी की राह है; इसे पूर्ण रूप से अपनाने से ही दुनिया और आख़िरत की भलाई मिलती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 206-210 — अल-बकरा

206وَإِذَا قِيلَ لَهُ اتَّقِ اللَّهَ أَخَذَتْهُ الْعِزَّةُ بِالْإِثْمِ ۚ فَحَسْبُهُ جَهَنَّمُ ۚ وَلَبِئْسَ الْمِهَادُ
और जब कहा जाता है कि ख़ुदा से डरो तो उसे ग़ुरुर गुनाह पर उभारता है बस ऐसे कम्बख्त के लिए जहन्नुम ही काफ़ी है और बहुत ही बुरा ठिकाना है
207وَمِنَ النَّاسِ مَن يَشْرِي نَفْسَهُ ابْتِغَاءَ مَرْضَاتِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ رَءُوفٌ بِالْعِبَادِ
और लोगों में से ख़ुदा के बन्दे कुछ ऐसे हैं जो ख़ुदा की (ख़ुशनूदी) हासिल करने की ग़रज़ से अपनी जान तक बेच डालते हैं और ख़ुदा ऐसे बन्दों पर बड़ा ही यफ्क्क़त वाला है
208يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا ادْخُلُوا فِي السِّلْمِ كَافَّةً وَلَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ ۚ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
ईमान वालों तुम सबके सब एक बार इस्लाम में (पूरी तरह ) दाख़िल हो जाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तुम्हारा यक़ीनी ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है
209فَإِن زَلَلْتُم مِّن بَعْدِ مَا جَاءَتْكُمُ الْبَيِّنَاتُ فَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
फिर जब तुम्हारे पास रौशन दलीले आ चुकी उसके बाद भी डगमगा गए तो अच्छी तरह समझ लो कि ख़ुदा (हर तरह) ग़ालिब और तदबीर वाला है
210هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا أَن يَأْتِيَهُمُ اللَّهُ فِي ظُلَلٍ مِّنَ الْغَمَامِ وَالْمَلَائِكَةُ وَقُضِيَ الْأَمْرُ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
क्या वह लोग इसी के मुन्तज़िर हैं कि सफेद बादल के साय बानो की आड़ में अज़ाबे ख़ुदा और अज़ाब के फ़रिश्ते उन पर ही आ जाए और सब झगड़े चुक ही जाते हालॉकि आख़िर कुल उमुर ख़ुदा ही की तरफ रुजू किए जाएँगे
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अनुवाद — अल-बकरा 208

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Tuesday, August 18, 2026

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