Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَشْرِي: बेचता है (यहाँ अर्थ है: अपनी जान को अल्लाह की राह में बेच देना, यानी क़ुर्बान कर देना)।
- ابْتِغَاء: तलब करते हुए, चाहत में।
- مَرْضَات: खुशी, प्रसन्नता, रज़ा।
- رَءُوف: बहुत दयालु, अत्यंत करुणामय।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला बयान फ़रमाता है कि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अल्लाह की रज़ा और खुशी की तलब में अपनी जान तक बेच देते हैं। यानी वे अपने प्राणों की परवाह किए बिना अल्लाह के दीन की ख़ातिर जिहाद करते हैं, उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, और हर उस कष्ट को सहन करते हैं जो अल्लाह की राह में आता है। वे दुनिया की किसी भी चीज़ को अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रज़ा के आगे क़ीमती नहीं समझते। यह वह लोग हैं जो अपने ईमान की सच्चाई को अपने अमल से साबित करते हैं।
अल्लाह तआला उनके इस जज़्बे और क़ुर्बानी से ख़ुश होता है और उन्हें बेहतरीन बदला देता है। आयत के अंत में अल्लाह फ़रमाता है कि वह अपने बंदों पर बहुत दयालु और मेहरबान है। उसकी यह दया ही है कि उसने उन्हें जिहाद का हुक्म दिया, क्योंकि इसी में उनकी भलाई और कामयाबी छिपी है। वह उनके छोटे-छोटे अमलों को भी बड़ा अज्र (इनाम) अता करता है और उनकी मुश्किलों को आसान करता है।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह की रज़ा हासिल करना मोमिन की सबसे बड़ी मंज़िल है, और इसके लिए अपनी जान तक क़ुर्बान करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।
- सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अमल से साबित होता है — जब इंसान अल्लाह की राह में अपनी सबसे प्यारी चीज़ (जान) भी न्योछावर कर दे।
- अल्लाह अपने बंदों पर असीम दया रखता है; वह उन्हें ऐसे कामों की तरफ़ राह दिखाता है जो उनके लिए बेहतरीन हैं, चाहे वे शुरू में कठिन क्यों न लगें।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दीन की ख़ातिर कुर्बानी देने वालों का अल्लाह के पास कोई नुक़सान नहीं होता, बल्कि उन्हें हमेशा की ज़िंदगी और बेहतरीन अज्र मिलता है।
- मोमिन को चाहिए कि वह अल्लाह की रज़ा को दुनिया की हर चीज़ पर मुक़द्दम रखे, क्योंकि अल्लाह की रज़ा ही में उसकी असली कामयाबी है।
📜 आयत 205-209 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 207
सूरा अल-बकरा आयत 207 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और लोगों में से ख़ुदा के बन्दे कुछ ऐसे हैं…सूरा आयत 207/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 205–209. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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