अल-बकरा · 207/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَمِنَ النَّاسِ مَن يَشْرِي نَفْسَهُ ابْتِغَاءَ مَرْضَاتِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ رَءُوفٌ بِالْعِبَادِ ۝٢٠٧
Wa minan naasi mai yashree nafsahub tighaaa`a mardaatil laah; wallaahu ra`oofum bil`ibaad
📖 हिंदी अर्थ
और लोगों में से ख़ुदा के बन्दे कुछ ऐसे हैं जो ख़ुदा की (ख़ुशनूदी) हासिल करने की ग़रज़ से अपनी जान तक बेच डालते हैं और ख़ुदा ऐसे बन्दों पर बड़ा ही यफ्क्क़त वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَشْرِي: बेचता है (यहाँ अर्थ है: अपनी जान को अल्लाह की राह में बेच देना, यानी क़ुर्बान कर देना)।
  • ابْتِغَاء: तलब करते हुए, चाहत में।
  • مَرْضَات: खुशी, प्रसन्नता, रज़ा।
  • رَءُوف: बहुत दयालु, अत्यंत करुणामय।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला बयान फ़रमाता है कि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अल्लाह की रज़ा और खुशी की तलब में अपनी जान तक बेच देते हैं। यानी वे अपने प्राणों की परवाह किए बिना अल्लाह के दीन की ख़ातिर जिहाद करते हैं, उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, और हर उस कष्ट को सहन करते हैं जो अल्लाह की राह में आता है। वे दुनिया की किसी भी चीज़ को अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रज़ा के आगे क़ीमती नहीं समझते। यह वह लोग हैं जो अपने ईमान की सच्चाई को अपने अमल से साबित करते हैं।

अल्लाह तआला उनके इस जज़्बे और क़ुर्बानी से ख़ुश होता है और उन्हें बेहतरीन बदला देता है। आयत के अंत में अल्लाह फ़रमाता है कि वह अपने बंदों पर बहुत दयालु और मेहरबान है। उसकी यह दया ही है कि उसने उन्हें जिहाद का हुक्म दिया, क्योंकि इसी में उनकी भलाई और कामयाबी छिपी है। वह उनके छोटे-छोटे अमलों को भी बड़ा अज्र (इनाम) अता करता है और उनकी मुश्किलों को आसान करता है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की रज़ा हासिल करना मोमिन की सबसे बड़ी मंज़िल है, और इसके लिए अपनी जान तक क़ुर्बान करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।
  2. सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अमल से साबित होता है — जब इंसान अल्लाह की राह में अपनी सबसे प्यारी चीज़ (जान) भी न्योछावर कर दे।
  3. अल्लाह अपने बंदों पर असीम दया रखता है; वह उन्हें ऐसे कामों की तरफ़ राह दिखाता है जो उनके लिए बेहतरीन हैं, चाहे वे शुरू में कठिन क्यों न लगें।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि दीन की ख़ातिर कुर्बानी देने वालों का अल्लाह के पास कोई नुक़सान नहीं होता, बल्कि उन्हें हमेशा की ज़िंदगी और बेहतरीन अज्र मिलता है।
  5. मोमिन को चाहिए कि वह अल्लाह की रज़ा को दुनिया की हर चीज़ पर मुक़द्दम रखे, क्योंकि अल्लाह की रज़ा ही में उसकी असली कामयाबी है।


📜 आयत 205-209 — सूरा अल-बकरा

205وَإِذَا تَوَلَّىٰ سَعَىٰ فِي الْأَرْضِ لِيُفْسِدَ فِيهَا وَيُهْلِكَ الْحَرْثَ وَالنَّسْلَ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الْفَسَادَ
और जहाँ तुम्हारी मोहब्बत से मुँह फेरा तो इधर उधर दौड़ धूप करने लगा ताकि मुल्क में फ़साद फैलाए और ज़राअत (खेती बाड़ी) और मवेशी का सत्यानास करे और ख़ुदा फसाद को अच्छा नहीं समझता
206وَإِذَا قِيلَ لَهُ اتَّقِ اللَّهَ أَخَذَتْهُ الْعِزَّةُ بِالْإِثْمِ ۚ فَحَسْبُهُ جَهَنَّمُ ۚ وَلَبِئْسَ الْمِهَادُ
और जब कहा जाता है कि ख़ुदा से डरो तो उसे ग़ुरुर गुनाह पर उभारता है बस ऐसे कम्बख्त के लिए जहन्नुम ही काफ़ी है और बहुत ही बुरा ठिकाना है
207وَمِنَ النَّاسِ مَن يَشْرِي نَفْسَهُ ابْتِغَاءَ مَرْضَاتِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ رَءُوفٌ بِالْعِبَادِ
और लोगों में से ख़ुदा के बन्दे कुछ ऐसे हैं जो ख़ुदा की (ख़ुशनूदी) हासिल करने की ग़रज़ से अपनी जान तक बेच डालते हैं और ख़ुदा ऐसे बन्दों पर बड़ा ही यफ्क्क़त वाला है
208يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا ادْخُلُوا فِي السِّلْمِ كَافَّةً وَلَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ ۚ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
ईमान वालों तुम सबके सब एक बार इस्लाम में (पूरी तरह ) दाख़िल हो जाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो वह तुम्हारा यक़ीनी ज़ाहिर ब ज़ाहिर दुश्मन है
209فَإِن زَلَلْتُم مِّن بَعْدِ مَا جَاءَتْكُمُ الْبَيِّنَاتُ فَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
फिर जब तुम्हारे पास रौशन दलीले आ चुकी उसके बाद भी डगमगा गए तो अच्छी तरह समझ लो कि ख़ुदा (हर तरह) ग़ालिब और तदबीर वाला है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
207आयत

अनुवाद — अल-बकरा 207

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Monday, September 28, 2026

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