Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ — क्या उन्हें मार्गदर्शन नहीं मिला?
- كَمْ أَهْلَكْنَا — कितनी अधिक संख्या में हमने विनाश किया
- مِنَ الْقُرُونِ — पिछली उम्मतों (समुदायों) में से
- يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ — वे (ये लोग) उनके घरों/बस्तियों में चलते-फिरते हैं
- لِأُولِي النُّهَىٰ — बुद्धि और समझ वालों के लिए
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत मक्का के काफिरों को सम्बोधित करते हुए उन्हें सोचने और सीखने की दावत देती है। अल्लाह तआला फरमाता है: क्या इन लोगों को यह बात मार्गदर्शन नहीं देती कि हमने इनसे पहले कितनी ही उम्मतों को उनके कुफ़्र और झुठलाने की वजह से हलाक कर दिया? ये लोग अपने दैनिक जीवन में, अपने सफरों में, उन्हीं हलाक हुई कौमों की बस्तियों से गुजरते हैं — जैसे समूद की बस्ती (हिज्र), लूत की बस्तियाँ (सदूम), और अन्य विनष्ट समुदायों के खंडहर। वे अपनी आँखों से उनके तबाह होने के निशान देखते हैं, फिर भी उनसे सबक नहीं लेते।
यह आयत बताती है कि अल्लाह की सुन्नत (रीति) कभी नहीं बदलती — जो उम्मतें सच्चाई को झुठलाती हैं और नबियों की दावत को ठुकराती हैं, उनका अंजाम विनाश ही होता है। यह ऐतिहासिक सबक सिर्फ सुनने की चीज़ नहीं, बल्कि आँखों देखा हुआ प्रमाण है।
इस आयत में उन लोगों के लिए बड़ी नसीहत है जो अक्ल और समझ रखते हैं। बुद्धिमान वही है जो दूसरों के अंजाम से सबक ले, और अपनी ज़िन्दगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढाले। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इतिहास से सीखना ईमान की निशानी है, और जो लोग इतिहास से सबक नहीं लेते, वही आगे चलकर पछताते हैं।
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने आस-पास की निशानियों पर गौर करें, पिछली उम्मतों के हालात पर विचार करें, और अपने जीवन को अल्लाह के हुक्मों के अनुसार चलाएँ। यही सच्ची बुद्धिमानी है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको सीखने और अमल करने की तौफीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 126-130 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 128
सूरा ताहा आयत 128 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या उन (अहले मक्का) को उस (खुदा) ने ये…सूरा आयत 128/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 126–130. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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