ताहा · 128/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
أَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّأُولِي النُّهَىٰ ۝١٢٨
Afalam yahdi lahum kam ahlaknaa qablahum minal qurooni yamshoona fee masaakinihim; inna fee zaalika la Aayaatil li ulinnuhaa
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या उन (अहले मक्का) को उस (खुदा) ने ये नहीं बता दिया था कि हमने उनके पहले कितने लोगों को हलाक कर डाला जिनके घरों में ये लोग चलते फिरते हैं इसमें शक नहीं कि उसमें अक्लमंदों के लिए (कुदरते खुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ — क्या उन्हें मार्गदर्शन नहीं मिला?
  • كَمْ أَهْلَكْنَا — कितनी अधिक संख्या में हमने विनाश किया
  • مِنَ الْقُرُونِ — पिछली उम्मतों (समुदायों) में से
  • يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ — वे (ये लोग) उनके घरों/बस्तियों में चलते-फिरते हैं
  • لِأُولِي النُّهَىٰ — बुद्धि और समझ वालों के लिए

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत मक्का के काफिरों को सम्बोधित करते हुए उन्हें सोचने और सीखने की दावत देती है। अल्लाह तआला फरमाता है: क्या इन लोगों को यह बात मार्गदर्शन नहीं देती कि हमने इनसे पहले कितनी ही उम्मतों को उनके कुफ़्र और झुठलाने की वजह से हलाक कर दिया? ये लोग अपने दैनिक जीवन में, अपने सफरों में, उन्हीं हलाक हुई कौमों की बस्तियों से गुजरते हैं — जैसे समूद की बस्ती (हिज्र), लूत की बस्तियाँ (सदूम), और अन्य विनष्ट समुदायों के खंडहर। वे अपनी आँखों से उनके तबाह होने के निशान देखते हैं, फिर भी उनसे सबक नहीं लेते।

यह आयत बताती है कि अल्लाह की सुन्नत (रीति) कभी नहीं बदलती — जो उम्मतें सच्चाई को झुठलाती हैं और नबियों की दावत को ठुकराती हैं, उनका अंजाम विनाश ही होता है। यह ऐतिहासिक सबक सिर्फ सुनने की चीज़ नहीं, बल्कि आँखों देखा हुआ प्रमाण है।

इस आयत में उन लोगों के लिए बड़ी नसीहत है जो अक्ल और समझ रखते हैं। बुद्धिमान वही है जो दूसरों के अंजाम से सबक ले, और अपनी ज़िन्दगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढाले। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इतिहास से सीखना ईमान की निशानी है, और जो लोग इतिहास से सबक नहीं लेते, वही आगे चलकर पछताते हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने आस-पास की निशानियों पर गौर करें, पिछली उम्मतों के हालात पर विचार करें, और अपने जीवन को अल्लाह के हुक्मों के अनुसार चलाएँ। यही सच्ची बुद्धिमानी है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको सीखने और अमल करने की तौफीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 126-130 — ताहा

126قَالَ كَذَٰلِكَ أَتَتْكَ آيَاتُنَا فَنَسِيتَهَا ۖ وَكَذَٰلِكَ الْيَوْمَ تُنسَىٰ
खुदा फरमाएगा ऐसा ही (होना चाहिए) हमारी आयतें भी तो तेरे पास आई तो तू उन्हें भुला बैठा और इसी तरह आज तू भी भूला दिया जाएगा
127وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي مَنْ أَسْرَفَ وَلَمْ يُؤْمِن بِآيَاتِ رَبِّهِ ۚ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَشَدُّ وَأَبْقَىٰ
और जिसने (हद से) तजाविज़ किया और अपने परवरदिगार की आयतों पर ईमान न लाया उसको ऐसी ही बदला देगें और आख़िरत का अज़ाब तो यक़ीनी बहुत सख्त और बहुत देर पा है
128أَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّأُولِي النُّهَىٰ
तो क्या उन (अहले मक्का) को उस (खुदा) ने ये नहीं बता दिया था कि हमने उनके पहले कितने लोगों को हलाक कर डाला जिनके घरों में ये लोग चलते फिरते हैं इसमें शक नहीं कि उसमें अक्लमंदों के लिए (कुदरते खुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं
129وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَكَانَ لِزَامًا وَأَجَلٌ مُّسَمًّى
और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से पहले ही एक वायदा और अज़ाब का) एक वक्त मुअय्युन न होता तो (उनकी हरकतों से) फ़ौरन अज़ाब का आना लाज़मी बात थी
130فَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوبِهَا ۖ وَمِنْ آنَاءِ اللَّيْلِ فَسَبِّحْ وَأَطْرَافَ النَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرْضَىٰ
(ऐ रसूल) जो कुछ ये कुफ्फ़ार बका करते हैं तुम उस पर सब्र करो और आफ़ताब निकलने के क़ब्ल और उसके ग़ुरूब होने के क़ब्ल अपने परवरदिगार की हम्दोसना के साथ तसबीह किया करो और कुछ रात के वक़्तों में और दिन के किनारों में तस्बीह करो ताकि तुम निहाल हो जाओ
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीRevelation
128आयत

अनुवाद — ताहा 128

सूरा ताहा आयत 128 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या उन (अहले मक्का) को उस (खुदा) ने ये…

सूरा आयत 128/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 126–130. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए