अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آمَنْتُمْ لَهُ – क्या तुम उस पर ईमान ले आए
- آذَنَ – अनुमति दूँ
- لَكَبِيرُكُم – निश्चित रूप से वह तुम्हारा बड़ा (सरदार/गुरु) है
- مِنْ خِلَافٍ – उल्टे तरीके से (एक हाथ और दूसरा पैर)
- جُذُوعِ النَّخْلِ – खजूर के तनों पर
- أَشَدُّ عَذَابًا وَأَبْقَى – अधिक कठोर और अधिक स्थायी यातना
तफ़सीर:
जब फ़िरऔन ने देखा कि उसके जादूगरों ने मूसा (अलैहिस्सलाम) के सामने सजदा करके ईमान कबूल कर लिया है, तो उसका अहंकार और क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने हैरानी और ग़ुस्से से कहा: "क्या तुम मूसा पर ईमान ले आए, इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति देता?!" उसकी यह बात दरअसल उसके घमंड और अपनी खुदाई के दावे को दर्शाती है — वह चाहता था कि लोग उसकी इजाज़त के बिना कुछ भी न करें, यहाँ तक कि ईमान भी न लाएँ।
फिर उसने एक झूठा इल्ज़ाम लगाते हुए कहा: "यक़ीनन यह मूसा तुम्हारा बड़ा (उस्ताद) है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है!" यानी उसने यह कहकर उनके ईमान को जादू का नतीजा बताने की कोशिश की, ताकि लोगों की नज़रों में उनका ईमान बेकार हो जाए। लेकिन हक़ीक़त यह थी कि ये जादूगर खुद जादू के उस्ताद थे और उन्होंने पहचान लिया था कि मूसा (अलैहिस्सलाम) का काम जादू नहीं, बल्कि खुदा का मोजिज़ा है।
इसके बाद फ़िरऔन ने उन्हें धमकी दी: "मैं तुम्हारे हाथ और पैर उल्टे तरीके से काटूँगा — यानी दायाँ हाथ और बायाँ पैर — और तुम्हें खजूर के तनों पर सूली चढ़ा दूँगा।" उसने यह भी कहा: "और तुम्हें जानना होगा कि हममें से कौन अधिक कठोर और अधिक स्थायी यातना देने वाला है — मैं या मूसा का रब?"
दावती पहलू और सबक:
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की राह में मुश्किलें और अज़ियतें आती हैं, लेकिन जब दिल में हक़ की पहचान हो जाए, तो दुनिया की कोई ताक़त उसे नहीं रोक सकती। फ़िरऔन के जादूगरों ने सच्चाई को पहचानते ही दुनिया की सारी आसाइशों और अपनी जान की परवाह किए बिना ईमान का ऐलान कर दिया। यही वह जज़्बा है जो हर मोमिन में होना चाहिए — कि हक़ के सामने किसी की धमकी काम न आए।
फ़िरऔन की धमकियाँ और यातनाएँ आज इतिहास का एक सबक हैं, जबकि उन जादूगरों का ईमान और उनकी क़ुर्बानी हमेशा के लिए नमूना बन गई। याद रखिए, अल्लाह की मदद उन्हीं के साथ होती है जो उसकी राह में सब्र करते हैं। दुनिया की यातनाएँ चाहे कितनी भी कठोर क्यों न हों, आख़िरत का अज़ाब उससे कहीं ज़्यादा सख्त और हमेशा रहने वाला है। इसलिए हमें हमेशा उसी की रज़ा को सामने रखना चाहिए, न कि किसी इंसान की नाराज़गी को।
📜 आयत 69-73 — ताहा
अनुवाद — ताहा 71
सूरा ताहा आयत 71 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिरऔन ने उन लोगों से कहा (हाए) इससे पहले कि…सूरा आयत 71/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 69–73. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








