ताहा · 76/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ مَن تَزَكَّىٰ ۝٧٦
Jannaatu `Adnin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa; wa zaalika jazaaa`ua man tazakka
📖 हिंदी अर्थ
वह सदाबहार बाग़ात जिनके नीचे नहरें जारी हैं वह लोग उसमें हमेशा रहेंगे और जो गुनाह से पाक व पाकीज़ा रहे उस का यही सिला है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَنَّاتُ عَدْنٍ: स्थायी निवास के बगीचे, जिनका कोई अंत नहीं।
  • تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ: उनके महलों और पेड़ों के नीचे नहरें बहती हैं।
  • خَالِدِينَ فِيهَا: उनमें हमेशा के लिए रहने वाले।
  • مَن تَزَكَّى: जो पवित्र हो गया, यानी शिर्क और पापों से बचा, और अल्लाह की इबादत में एकाग्र हुआ।

तफसीर:

यह आयत उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो अपने रब के पास ईमान और नेक आमाल के साथ आते हैं। अल्लाह तआला ने उनके लिए "जन्नतुल अदन" तैयार की है—यानी स्थायी रहने के बगीचे, जिनके नीचे नहरें बहती हैं। ये नहरें महलों और पेड़ों के नीचे से गुजरती हैं, और यह दृश्य जन्नत की खूबसूरती को और बढ़ा देता है। वहाँ वे हमेशा रहेंगे, कभी नहीं मरेंगे, न ही वहाँ से निकाले जाएँगे। यह अल्लाह की ओर से उन लोगों का बदला है जिन्होंने अपने आपको पवित्र किया—यानी शिर्क, कुफ्र और गुनाहों से दूर रहे, अल्लाह की इबादत में किसी को साझी नहीं बनाया, और उसकी आज्ञा का पालन किया।

यहाँ "तज़क्की" का मतलब सिर्फ ज़ाहिरी पवित्रता नहीं, बल्कि दिल की पवित्रता है—दिल को अल्लाह के सिवा हर चीज़ से साफ करना, और उसे सिर्फ अल्लाह की मुहब्बत और इबादत के लिए समर्पित करना। यह वही रास्ता है जो फिरौन के मुकाबले में जादूगरों ने अपनाया—उन्होंने सच्चाई को पहचाना, अपने आपको शिर्क से पाक किया, और अल्लाह की राह में कुर्बान हो गए।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि असली कामयाबी दुनिया के झूठे वादों में नहीं, बल्कि उस जन्नत में है जो हमेशा रहने वाली है। यहाँ की ज़िंदगी चंद रोज़ की है, लेकिन वहाँ की ज़िंदगी हमेशा की है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को पाक रखें, अल्लाह की इबादत में किसी को साझी न बनाएँ, और अपने आमाल को उसकी रज़ा के लिए खास कर दें।

याद रखिए, अल्लाह का वादा सच्चा है—जो कोई भी अपने आपको पवित्र करेगा, उसके लिए यही इनाम है। यह हमारे लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह ने अपने बंदों के लिए ऐसी जगह तैयार की है जहाँ कोई दुख, थकान या मौत नहीं होगी। आइए, हम सब इस रास्ते को अपनाएँ और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।

🎧 सुनें

📜 आयत 74-78 — ताहा

74إِنَّهُ مَن يَأْتِ رَبَّهُ مُجْرِمًا فَإِنَّ لَهُ جَهَنَّمَ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ
और (उसी को) सबसे ज्यादा क़याम है इसमें शक नहीं कि जो शख्स मुजरिम होकर अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होगा तो उसके लिए यक़ीनन जहन्नुम (धरा हुआ) है जिसमें न तो वह मरे ही गा और न ज़िन्दा ही रहेगा
75وَمَن يَأْتِهِ مُؤْمِنًا قَدْ عَمِلَ الصَّالِحَاتِ فَأُولَٰئِكَ لَهُمُ الدَّرَجَاتُ الْعُلَىٰ
(सिसकता रहेगा) और जो शख्स उसके सामने ईमानदार हो कर हाज़िर होगा और उसने अच्छे-अच्छे काम भी किए होंगे तो ऐसे ही लोग हैं जिनके लिए बड़े-बड़े बुलन्द रूतबे हैं
76جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ مَن تَزَكَّىٰ
वह सदाबहार बाग़ात जिनके नीचे नहरें जारी हैं वह लोग उसमें हमेशा रहेंगे और जो गुनाह से पाक व पाकीज़ा रहे उस का यही सिला है
77وَلَقَدْ أَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي فَاضْرِبْ لَهُمْ طَرِيقًا فِي الْبَحْرِ يَبَسًا لَّا تَخَافُ دَرَكًا وَلَا تَخْشَىٰ
और हमने मूसा के पास ''वही'' भेजी कि मेरे बन्दों (बनी इसराइल) को (मिस्र से) रातों रात निकाल ले जाओ फिर दरिया में (लाठी मारकर) उनके लिए एक सूखी राह निकालो और तुमको पीछा करने का न कोई खौफ़ रहेगा न (डूबने की) कोई दहशत
78فَأَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ بِجُنُودِهِ فَغَشِيَهُم مِّنَ الْيَمِّ مَا غَشِيَهُمْ
ग़रज़ फिरऔन ने अपने लशकर समैत उनका पीछा किया फिर दरिया (के पानी का रेला) जैसा कुछ उन पर छाया गया वह छा गया
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अनुवाद — ताहा 76

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Tuesday, August 18, 2026

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