ताहा · 75/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
وَمَن يَأْتِهِ مُؤْمِنًا قَدْ عَمِلَ الصَّالِحَاتِ فَأُولَٰئِكَ لَهُمُ الدَّرَجَاتُ الْعُلَىٰ ۝٧٥
Wa mai yaatihee mu`minan qad `amilas saalihaati fa ulaaa`ika lahumud dara jaatul `ulaa
📖 हिंदी अर्थ
(सिसकता रहेगा) और जो शख्स उसके सामने ईमानदार हो कर हाज़िर होगा और उसने अच्छे-अच्छे काम भी किए होंगे तो ऐसे ही लोग हैं जिनके लिए बड़े-बड़े बुलन्द रूतबे हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَأْتِهِ – उसके पास आएगा (अर्थात अल्लाह के सामने प्रस्तुत होगा)
  • مُؤْمِنًا – ईमान की हालत में (अल्लाह पर विश्वास रखते हुए)
  • الصَّالِحَاتِ – अच्छे कर्म, नेक कार्य
  • الدَّرَجَاتُ الْعُلَى – ऊँचे दर्जे, बुलंद मंज़िलें

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के लिए खुशखबरी है जो अपने रब के सामने ईमान की हालत में हाज़िर होते हैं। यानी जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में अल्लाह पर ईमान रखा, उसकी वहदानियत (एकता) को दिल से स्वीकार किया, और अपने अच्छे कर्मों से अपनी ज़िंदगी को सजाया। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने बुलंद दर्जे तैयार किए हैं।

ये दर्जे सिर्फ़ आम नहीं हैं, बल्कि जन्नत के सबसे ऊँचे मक़ामात हैं, जहाँ हर नेकी का बदला उससे कहीं बेहतर मिलेगा। यह वही लोग हैं जिन्होंने अपने दिल को शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराने) की गंदगी से पाक रखा, अल्लाह की इबादत को खालिस किया, उसकी फ़रमाँबरदारी की और उसकी नाफ़रमानी से बचे रहे। उन्होंने दुनिया में अच्छे कर्म किए और आख़िरत में अपने रब से इस हालत में मिले कि उन्होंने किसी को उसका साझी नहीं बनाया।

इन लोगों के लिए जन्नत के ऊँचे दर्जे हैं, जिनके नीचे नहरें बहती हैं, और वे उनमें हमेशा हमेशा रहेंगे। यह स्थायी नेमतें और आरामगाहें हैं जो कभी ख़त्म नहीं होंगी। यही वह इनाम है जो अल्लाह उन लोगों को देता है जिन्होंने अपनी रूह को पाक किया, बुराइयों से दूर रहे और सिर्फ़ अल्लाह की इबादत की।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो चाहता है कि उसकी ज़िंदगी का अंजाम अच्छा हो। अल्लाह ने अपने रहमत भरे दरवाज़े हर उस बंदे के लिए खोले हैं जो ईमान लाए और नेक कर्म करे। यह कोई मुश्किल रास्ता नहीं है – बस दिल से अल्लाह को मानना और अपने अमल को अच्छा बनाना। जो भी इस रास्ते पर चलेगा, अल्लाह उसे जन्नत के सबसे ऊँचे मक़ामात से नवाज़ेगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी टूटता नहीं। आइए, हम सब अपनी ज़िंदगी को ईमान और नेक अमल से सजाएँ, ताकि उस दिन हम भी उन खुशनसीबों में शामिल हों जिनके लिए ये बुलंद दर्जे तैयार हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 73-77 — ताहा

73إِنَّا آمَنَّا بِرَبِّنَا لِيَغْفِرَ لَنَا خَطَايَانَا وَمَا أَكْرَهْتَنَا عَلَيْهِ مِنَ السِّحْرِ ۗ وَاللَّهُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ
(और कहा) हम तो अपने परवरदिगार पर इसलिए ईमान लाए हैं ताकि हमारे वास्ते सारे गुनाह माफ़ कर दे और (ख़ास कर) जिस पर तूने हमें मजबूर किया था और खुदा ही सबसे बेहतर है
74إِنَّهُ مَن يَأْتِ رَبَّهُ مُجْرِمًا فَإِنَّ لَهُ جَهَنَّمَ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ
और (उसी को) सबसे ज्यादा क़याम है इसमें शक नहीं कि जो शख्स मुजरिम होकर अपने परवरदिगार के सामने हाज़िर होगा तो उसके लिए यक़ीनन जहन्नुम (धरा हुआ) है जिसमें न तो वह मरे ही गा और न ज़िन्दा ही रहेगा
75وَمَن يَأْتِهِ مُؤْمِنًا قَدْ عَمِلَ الصَّالِحَاتِ فَأُولَٰئِكَ لَهُمُ الدَّرَجَاتُ الْعُلَىٰ
(सिसकता रहेगा) और जो शख्स उसके सामने ईमानदार हो कर हाज़िर होगा और उसने अच्छे-अच्छे काम भी किए होंगे तो ऐसे ही लोग हैं जिनके लिए बड़े-बड़े बुलन्द रूतबे हैं
76جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ مَن تَزَكَّىٰ
वह सदाबहार बाग़ात जिनके नीचे नहरें जारी हैं वह लोग उसमें हमेशा रहेंगे और जो गुनाह से पाक व पाकीज़ा रहे उस का यही सिला है
77وَلَقَدْ أَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي فَاضْرِبْ لَهُمْ طَرِيقًا فِي الْبَحْرِ يَبَسًا لَّا تَخَافُ دَرَكًا وَلَا تَخْشَىٰ
और हमने मूसा के पास ''वही'' भेजी कि मेरे बन्दों (बनी इसराइल) को (मिस्र से) रातों रात निकाल ले जाओ फिर दरिया में (लाठी मारकर) उनके लिए एक सूखी राह निकालो और तुमको पीछा करने का न कोई खौफ़ रहेगा न (डूबने की) कोई दहशत
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अनुवाद — ताहा 75

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Tuesday, August 18, 2026

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