Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَسْرِ – रात में चलना / रात के समय निकलना
- فَاضْرِبْ – मारना / बनाना (यहाँ अर्थ: रास्ता बनाना)
- يَبَسًا – सूखी हुई ज़मीन (जिसमें न पानी हो, न कीचड़)
- دَرَكًا – पीछा करके पकड़ लेना / लिहाक़ करना
- تَخْشَى – डरना (यहाँ: डूबने का डर)
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने अपने नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) को वह़्य (प्रकाशना) के ज़रिए हुक्म दिया कि वे रात के समय अपने बंदों (बनी इसराईल) को मिस्र से निकाल ले जाएँ, ताकि फ़िरऔन को उनके निकलने की ख़बर न हो सके। यह एक गुप्त और सावधानीपूर्वक कदम था, जो अल्लाह की ओर से रहनुमाई के बग़ैर मुमकिन न था।
फिर अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को हुक्म दिया कि जब वे समुद्र के किनारे पहुँचें, तो अपनी लाठी से समुद्र पर मारें। चमत्कार यह हुआ कि समुद्र का पानी फट गया और बीच में एक सूखा रास्ता बन गया — न उसमें पानी था, न कीचड़। यह अल्लाह की क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना था, जिसने मुश्किल से मुश्किल काम को आसान कर दिया।
अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को तसल्ली दी कि इस रास्ते पर चलते हुए न तो उन्हें फ़िरऔन और उसके लश्कर के पीछा करके पकड़ लेने का डर हो, और न समुद्र में डूबने का ख़ौफ़। यानी अल्लाह ने उन्हें दोनों तरफ़ से हिफ़ाज़त का वादा दिया — पीछे से दुश्मन का ख़तरा और आगे से समुद्र का ख़तरा, दोनों से महफ़ूज़ रखा।
इस आयत में अल्लाह की क़ुदरत और अपने नबी की मदद का सबसे बड़ा सबूत है। जब अल्लाह किसी काम का इरादा करता है, तो उसके लिए रास्ते खोल देता है, चाहे वह समुद्र के बीच से ही क्यों न गुज़रता हो। यह हमारे लिए सबक़ है कि जब हम अल्लाह पर भरोसा करके उसके हुक्म पर चलते हैं, तो वह हमारे लिए ऐसे रास्ते खोलता है जिनका हमने सोचा भी नहीं होता।
यह क़िस्सा हमें यह भी सिखाता है कि अल्लाह की मदद उन्हीं को मिलती है जो उसके हुक्म की तामील करते हैं और सब्र व यक़ीन के साथ आगे बढ़ते हैं। जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के हुक्म पर अमल किया और समुद्र रास्ता बन गया, उसी तरह आज भी अगर हम अल्लाह के दीन पर चलें, तो वह हमारी मुश्किलें आसान कर देगा और हमें दुश्मनों के मक्र से बचाएगा।
📜 आयत 75-79 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 77
सूरा ताहा आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने मूसा के पास ''वही'' भेजी कि मेरे बन्दों…सूरा आयत 77/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


