अल-अंबिया · 11/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَكَمْ قَصَمْنَا مِن قَرْيَةٍ كَانَتْ ظَالِمَةً وَأَنشَأْنَا بَعْدَهَا قَوْمًا آخَرِينَ ۝١١
Wa kam qasamnaa min qaryatin kannat zaalimatanw wa anshadnaa ba`dahaa qawman aakhareen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने कितनी बस्तियों को जिनके रहने वाले सरकश थे बरबाद कर दिया और उनके बाद दूसरे लोगों को पैदा किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • قَصَمْنَا: हमने नष्ट कर दिया, तोड़-फोड़कर खत्म कर दिया।
  • قَرْيَةٍ: बस्ती या नगर (यहाँ इसका अर्थ है उस बस्ती के निवासी)।
  • ظَالِمَةً: अत्याचारी, यानी काफिर और अपने रसूलों के विरुद्ध विद्रोह करने वाली।
  • أَنشَأْنَا: हमने पैदा किया, बनाया, अस्तित्व में लाए।
  • قَوْمًا آخَرِينَ: दूसरे लोग, उनके स्थान पर नई पीढ़ी।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी क़ुदरत और अज़ाब की सख्ती का ज़िक्र करते हुए फ़रमाते हैं कि कितनी ही बस्तियाँ थीं जो ज़ुल्म में डूबी हुई थीं — उन्होंने अपने रब की नेमतों को भुला दिया, अपने रसूलों को झुठलाया और ज़मीन पर फ़साद फैलाया। उनका ज़ुल्म सिर्फ़ इंसानों पर अत्याचार नहीं था, बल्कि सबसे बड़ा ज़ुल्म यह था कि उन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया और उसकी इबादत से मुँह मोड़ लिया।

जब उनकी शरारत और सरकशी हद से बढ़ गई, तो अल्लाह ने उन्हें अपनी पकड़ में लिया। उन्हें ऐसे नष्ट किया जैसे कोई चीज़ टूटकर चकनाचूर हो जाती है — कोई निशानी बाक़ी न रही, न उनकी ताक़त काम आई, न उनके किले, न उनकी दौलत। वे सब मिट्टी में मिल गए।

फिर अल्लाह ने उनके बाद दूसरे लोगों को पैदा किया, जो उनकी जगह लेकर उस ज़मीन पर आबाद हुए। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जब कोई क़ौम अपने रब के हुक्म से सरकशी करती है और ज़ुल्म पर अड़ी रहती है, तो अल्लाह उसे खत्म करके दूसरी क़ौम ले आता है। यह इतिहास का सबक है — जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी में जीते हैं, वे ज़मीन पर हमेशा नहीं रहते।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इबादत करें, उसके रसूलों की तालीमात पर चलें और ज़ुल्म व कुफ़्र से बचें। अल्लाह बड़ा रहम करने वाला है — वह तौबा करने वालों को माफ कर देता है, लेकिन जो लोग ज़ुल्म पर अड़े रहें, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है। यह आयत हमें डराती भी है और सिखाती भी है कि अल्लाह की पकड़ से बचने का एक ही रास्ता है — ईमान, नेक अमल और अल्लाह की रहमत का सहारा।



📜 आयत 9-13 — अल-अंबिया

9ثُمَّ صَدَقْنَاهُمُ الْوَعْدَ فَأَنجَيْنَاهُمْ وَمَن نَّشَاءُ وَأَهْلَكْنَا الْمُسْرِفِينَ
फिर हमने उन्हें (अपना अज़ाब का) वायदा सच्चा कर दिखाया (और जब अज़ाब आ पहुँचा) तो हमने उन पैग़म्बरों को और जिस जिसको चाहा छुटकारा दिया और हद से बढ़ जाने वालों को हलाक कर डाला
10لَقَدْ أَنزَلْنَا إِلَيْكُمْ كِتَابًا فِيهِ ذِكْرُكُمْ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
हमने तो तुम लोगों के पास वह किताब (कुरान) नाज़िल की है जिसमें तुम्हारा (भी) ज़िक्रे (ख़ैर) है तो क्या तुम लोग (इतना भी) समझते
11وَكَمْ قَصَمْنَا مِن قَرْيَةٍ كَانَتْ ظَالِمَةً وَأَنشَأْنَا بَعْدَهَا قَوْمًا آخَرِينَ
और हमने कितनी बस्तियों को जिनके रहने वाले सरकश थे बरबाद कर दिया और उनके बाद दूसरे लोगों को पैदा किया
12فَلَمَّا أَحَسُّوا بَأْسَنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَرْكُضُونَ
तो जब उन लोगों ने हमारे अज़ाब की आहट पाई तो एका एकी भागने लगे
13لَا تَرْكُضُوا وَارْجِعُوا إِلَىٰ مَا أُتْرِفْتُمْ فِيهِ وَمَسَاكِنِكُمْ لَعَلَّكُمْ تُسْأَلُونَ
(हमने कहा) भागो नहीं और उन्हीं बस्तियों और घरों में लौट जाओ जिनमें तुम चैन करते थे ताकि तुमसे कुछ पूछगछ की जाए
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अनुवाद — अल-अंबिया 11

सूरा अल-अंबिया आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने कितनी बस्तियों को जिनके रहने वाले सरकश थे…

सूरा आयत 11/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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