अल-अंबिया · 10/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
لَقَدْ أَنزَلْنَا إِلَيْكُمْ كِتَابًا فِيهِ ذِكْرُكُمْ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ۝١٠
Laqad anzalnaaa ilaikum Kitaaban feehi zikrukum afalaa ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
हमने तो तुम लोगों के पास वह किताब (कुरान) नाज़िल की है जिसमें तुम्हारा (भी) ज़िक्रे (ख़ैर) है तो क्या तुम लोग (इतना भी) समझते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذِكْرُكُمْ: तुम्हारा सम्मान, शान, और वह चीज़ जो तुम्हें ऊँचाई प्रदान करे।
  • أَفَلَا تَعْقِلُونَ: क्या तुम अक्ल से काम नहीं लेते? क्या तुम समझते नहीं?

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों पर अपनी सबसे बड़ी नेमत और एहसान का ज़िक्र कर रहा है। वह फ़रमाता है कि हमने तुम्हारी तरफ एक ऐसी किताब (क़ुरआन) उतारी है जिसमें तुम्हारी इज़्ज़त, शान और बुलंदी छिपी हुई है। यह किताब सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि तुम्हारे लिए ज़िंदगी का नक्शा है—अगर तुम इसे पकड़ लो, इस पर ईमान लाओ और इस पर अमल करो, तो यह तुम्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में सरफ़राज़ करेगी।

यह वही किताब है जो तुम्हें जाहिलियत के अंधेरों से निकालकर हिदायत की रोशनी की तरफ लाती है। इसमें तुम्हारे दीन और दुनिया की हर ज़रूरत का हल मौजूद है। यह तुम्हारे लिए शर्मिंदगी और रुसवाई का सबब नहीं, बल्कि फ़ख़्र और इज़्ज़त का ज़रिया है—बशर्ते कि तुम इसे समझो और इस पर अमल करो।

अल्लाह तआला फरमाता है: "क्या तुम अक्ल से काम नहीं लेते?" यानी यह इतनी बड़ी नेमत है कि अगर तुम ज़रा सी भी समझ रखते हो, तो तुम्हें इस किताब की तरफ दौड़ पड़ना चाहिए, इसे क़बूल करना चाहिए और इसकी तालीमात पर चलना चाहिए। यह तुम्हारे लिए दुनिया में सबसे बड़ा शरफ़ है कि अल्लाह ने तुम्हें अपनी किताब अता की, और आख़िरत में यही किताब तुम्हारे लिए शफ़ाअत करेगी।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन हमारी असली पहचान है। जिस क़ौम ने क़ुरआन को थामा, उसने दुनिया पर राज किया। और जिस क़ौम ने इसे छोड़ा, वह ज़िल्लत और रुसवाई का शिकार हुई। आज हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने तक ही सीमित न रखें, बल्कि इसे समझें, इस पर अमल करें और इसे अपनी ज़िंदगी का दस्तूर बनाएं। यही हमारी कामयाबी की चाबी है—दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसे अपनी ज़िंदगी में नफ़ाज़ देने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — अल-अंबिया

8وَمَا جَعَلْنَاهُمْ جَسَدًا لَّا يَأْكُلُونَ الطَّعَامَ وَمَا كَانُوا خَالِدِينَ
और हमने उन (पैग़म्बरों) के बदन ऐसे नहीं बनाए थे कि वह खाना न खाएँ और न वह (दुनिया में) हमेशा रहने सहने वाले थे
9ثُمَّ صَدَقْنَاهُمُ الْوَعْدَ فَأَنجَيْنَاهُمْ وَمَن نَّشَاءُ وَأَهْلَكْنَا الْمُسْرِفِينَ
फिर हमने उन्हें (अपना अज़ाब का) वायदा सच्चा कर दिखाया (और जब अज़ाब आ पहुँचा) तो हमने उन पैग़म्बरों को और जिस जिसको चाहा छुटकारा दिया और हद से बढ़ जाने वालों को हलाक कर डाला
10لَقَدْ أَنزَلْنَا إِلَيْكُمْ كِتَابًا فِيهِ ذِكْرُكُمْ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
हमने तो तुम लोगों के पास वह किताब (कुरान) नाज़िल की है जिसमें तुम्हारा (भी) ज़िक्रे (ख़ैर) है तो क्या तुम लोग (इतना भी) समझते
11وَكَمْ قَصَمْنَا مِن قَرْيَةٍ كَانَتْ ظَالِمَةً وَأَنشَأْنَا بَعْدَهَا قَوْمًا آخَرِينَ
और हमने कितनी बस्तियों को जिनके रहने वाले सरकश थे बरबाद कर दिया और उनके बाद दूसरे लोगों को पैदा किया
12فَلَمَّا أَحَسُّوا بَأْسَنَا إِذَا هُم مِّنْهَا يَرْكُضُونَ
तो जब उन लोगों ने हमारे अज़ाब की आहट पाई तो एका एकी भागने लगे
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अनुवाद — अल-अंबिया 10

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सूरा आयत 10/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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