अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَمَنَّىٰ – अर्थात पढ़ा, तिलावत की (कुरआन की आयतें पढ़ते समय)।
- أُمْنِيَّتِهِ – उसकी तिलावत या पढ़ने में।
- يَنسَخُ – मिटा देता है, समाप्त कर देता है।
- يُحْكِمُ – मज़बूत और स्पष्ट कर देता है, स्थापित कर देता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! हमने आपसे पहले जितने भी रसूल और नबी भेजे, उन सबके साथ यही स्थिति रही कि जब वे अल्लाह की किताब की तिलावत करते, तो शैतान उनकी तिलावत में अपनी तरफ से कुछ वसवसे (संदेह और भ्रम) मिलाने की कोशिश करता, ताकि लोगों को सच्चाई से भटका सके। लेकिन अल्लाह तआला अपनी कुदरत से शैतान के उन वसवसों को तुरंत मिटा देता है और अपनी आयतों को स्पष्ट और मज़बूत कर देता है। यह चीज़ आपके साथ भी हुई, तो आप चिंतित न हों। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि हर नबी के साथ यही परीक्षा हुई। अल्लाह सब कुछ जानने वाला है और अपनी हर बात में हिकमत (समझदारी) रखता है। वह जानता है कि कब क्या करना है और कैसे अपने दीन को स्थापित करना है।
यह आयत उस घटना के संदर्भ में उतरी जब कुछ लोगों ने झूठी अफवाह फैलाई थी कि नबी ﷺ ने अपनी तिलावत में शैतान के शब्द पढ़ दिए। अल्लाह ने इस आयत के माध्यम से स्पष्ट कर दिया कि यह सब शैतान की कोशिश थी, और अल्लाह ने उसे नाकाम कर दिया। नबी ﷺ की पवित्रता और सत्यनिष्ठा पर कोई आँच नहीं आई। अल्लाह ने अपनी आयतों को हमेशा सुरक्षित रखा और शैतान के सारे प्रयासों को विफल कर दिया। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) रही है कि वह अपने नबियों की हिफ़ाज़त करता है और उनके माध्यम से सच्चाई को स्थापित करता है।
दावत (आमंत्रण) की ओर से कुछ बातें:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की राह में रुकावटें आएंगी, शैतान हर नबी के साथ अपनी चालें चलता रहा, लेकिन अल्लाह की मदद हमेशा उनके साथ रही। जब हम सच्चाई पर चलते हैं, तो शैतान हमारे रास्ते में भी वसवसे डालता है, लेकिन अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को वह कभी नुकसान नहीं पहुंचा सकता। अल्लाह ने अपने दीन को हमेशा सुरक्षित रखा है और रखेगा। हमें चाहिए कि हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, क्योंकि यही अल्लाह की मज़बूत रस्सी है। शैतान की कोशिशें चाहे कितनी भी हों, अल्लाह का कलाम (कुरआन) हमेशा सच्चा और स्पष्ट है। हमें अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलते हुए अल्लाह से मदद मांगनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है और वही अपने बंदों को सच्चाई की राह दिखाता है।
📜 आयत 50-54 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 52
सूरा अल-हज आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले जब कभी कोई…सूरा आयत 52/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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