अल-हज · 53/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हज
لِّيَجْعَلَ مَا يُلْقِي الشَّيْطَانُ فِتْنَةً لِّلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْ ۗ وَإِنَّ الظَّالِمِينَ لَفِي شِقَاقٍ بَعِيدٍ ۝٥٣
Liyaj`ala maa yulqish Shaitaanu fitnatal lillazeena fee quloobihim maradunw walqaasiyati quloobuhum; wa innaz zaalimeena lafee shiqaaqim ba`eed
📖 हिंदी अर्थ
और शैतान जो (वसवसा) डालता (भी) है तो इसलिए ताकि खुदा उसे उन लोगों के आज़माइश (का ज़रिया) क़रार दे जिनके दिलों में (कुफ्र का) मर्ज़ है और जिनके दिल सख्त हैं और बेशक (ये) ज़ालिम मुशरेकीन पल्ले दरजे की मुख़ालेफ़त में पड़े हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فِتْنَةً – परीक्षा, आज़माइश
  • مَرَضٌ – बीमारी, यहाँ अर्थ है संदेह और निफ़ाक़ (दोहरापन)
  • الْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْ – जिनके दिल सख्त हो गए हैं (सत्य को स्वीकार करने से इनकार करने वाले)
  • شِقَاقٍ – विरोध, दुश्मनी, सत्य से दूर होना

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस घटना की ओर संकेत करती है जब शैतान ने रसूलुल्लाह ﷺ की तिलावत में कुछ मिलाने की कोशिश की थी, ताकि लोगों का इम्तिहान हो सके। अल्लाह तआला ने यह बताया कि शैतान का यह काम बेहूदा नहीं था, बल्कि उसके पीछे अल्लाह की एक गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) छिपी थी — और वह है लोगों की परीक्षा।

अल्लाह ने शैतान के इस काम को उन लोगों के लिए आज़माइश बनाया जिनके दिलों में बीमारी है — यानी मुनाफ़िक़ (दोहरे चरित्र वाले) और वे लोग जिनके दिलों में शक और संदेह है। वे जब यह सुनते हैं तो ठोकर खाते हैं और भटक जाते हैं। इसी तरह, यह उन मुशरिकों के लिए भी परीक्षा है जिनके दिल सख्त हो गए हैं — वे सत्य को सुनकर भी उसे कबूल नहीं करते, क्योंकि उनके दिल पत्थर जैसे सख्त हो चुके हैं।

जब ये लोग शैतान की डाली हुई बात सुनते हैं, तो वे झट से उसे पकड़ लेते हैं और सोचते हैं कि यह रसूल ﷺ की अपनी बात है। इस तरह वे खुद को और दूसरों को गुमराह करते हैं। यही उनकी परीक्षा है — क्या वे सच्चाई को पहचानेंगे या शैतान के जाल में फंसे रहेंगे?

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि ये ज़ालिम (अत्याचारी) लोग — चाहे वे मुनाफ़िक़ हों या मुशरिक — अल्लाह और उसके रसूल की सख्त दुश्मनी में लगे हुए हैं। वे सत्य से इतने दूर हो गए हैं कि उनका विरोध और हठधर्मिता हद से बढ़ चुकी है। उनका यह रवैया उन्हें सीधे रास्ते से और दूर ले जाता है।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में आने वाली हर मुश्किल और परीक्षा अल्लाह की ओर से होती है — वह देखना चाहता है कि कौन सच्चे दिल से उस पर भरोसा करता है और कौन शैतान के बहकावे में आकर भटक जाता है। जिनके दिल साफ और अल्लाह की याद से भरे होते हैं, वे हर परीक्षा में کامیاب होते हैं। लेकिन जिनके दिलों में शक, हठ और अहंकार होता है, वे हर मोड़ पर ठोकर खाते हैं।

यह आयत हमें दिल की सफाई की अहमियत सिखाती है — कि हम अपने दिलों को शक, हसद और अहंकार से पाक रखें, ताकि जब सत्य हमारे सामने आए तो हम उसे कबूल कर सकें। अल्लाह से दुआ है कि वह हमारे दिलों को ईमान की रौशनी से मुनव्वर करे और हमें शैतान के वसवसों से महफूज़ रखे। आमीन।



📜 आयत 51-55 — सूरा अल-हज

51وَالَّذِينَ سَعَوْا فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों (के झुठलाने में हमारे) आजिज़ करने के वास्ते कोशिश की यही लोग तो जहन्नुमी हैं
52وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رَّسُولٍ وَلَا نَبِيٍّ إِلَّا إِذَا تَمَنَّىٰ أَلْقَى الشَّيْطَانُ فِي أُمْنِيَّتِهِ فَيَنسَخُ اللَّهُ مَا يُلْقِي الشَّيْطَانُ ثُمَّ يُحْكِمُ اللَّهُ آيَاتِهِ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और (ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले जब कभी कोई रसूल और नबी भेजा तो ये ज़रूर हुआ कि जिस वक्त उसने (तबलीग़े एहकाम की) आरज़ू की तो शैतान ने उसकी आरज़ू में (लोंगों को बहका कर) ख़लल डाल दिया फिर जो वस वसा शैतान डालता है खुदा उसे बेट देता है फिर अपने एहकाम को मज़बूत करता है और खुदा तो बड़ा वाक़िफकार दाना है
53لِّيَجْعَلَ مَا يُلْقِي الشَّيْطَانُ فِتْنَةً لِّلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْ ۗ وَإِنَّ الظَّالِمِينَ لَفِي شِقَاقٍ بَعِيدٍ
और शैतान जो (वसवसा) डालता (भी) है तो इसलिए ताकि खुदा उसे उन लोगों के आज़माइश (का ज़रिया) क़रार दे जिनके दिलों में (कुफ्र का) मर्ज़ है और जिनके दिल सख्त हैं और बेशक (ये) ज़ालिम मुशरेकीन पल्ले दरजे की मुख़ालेफ़त में पड़े हैं
54وَلِيَعْلَمَ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ أَنَّهُ الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَيُؤْمِنُوا بِهِ فَتُخْبِتَ لَهُ قُلُوبُهُمْ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَهَادِ الَّذِينَ آمَنُوا إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और (इसलिए भी) ताकि जिन लोगों को (कुतूबे समावी का) इल्म अता हुआ है वह जान लें कि ये (वही) बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से ठीक ठीक (नाज़िल) हुईहै फिर (ये ख्याल करके) इस पर वह लोग ईमान लाए फिर उनके दिल खुदा के सामने आजिज़ी करें और इसमें तो शक ही नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया उनकी खुदा सीधी राह तक पहुँचा देता है
55وَلَا يَزَالُ الَّذِينَ كَفَرُوا فِي مِرْيَةٍ مِّنْهُ حَتَّىٰ تَأْتِيَهُمُ السَّاعَةُ بَغْتَةً أَوْ يَأْتِيَهُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَقِيمٍ
और जो लोग काफिर हो बैठे वह तो कुरान की तरफ से हमेशा शक ही में पड़े रहेंगे यहाँ तक कि क़यामत यकायक उनके सर पर आ मौजूद हो या (यूँ कहो कि) उनपर एक सख्त मनहूस दिन का अज़ाब नाज़िल हुआ
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
53आयत

अनुवाद — अल-हज 53

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Wednesday, September 30, 2026

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