Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فِتْنَةً – परीक्षा, आज़माइश
- مَرَضٌ – बीमारी, यहाँ अर्थ है संदेह और निफ़ाक़ (दोहरापन)
- الْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْ – जिनके दिल सख्त हो गए हैं (सत्य को स्वीकार करने से इनकार करने वाले)
- شِقَاقٍ – विरोध, दुश्मनी, सत्य से दूर होना
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस घटना की ओर संकेत करती है जब शैतान ने रसूलुल्लाह ﷺ की तिलावत में कुछ मिलाने की कोशिश की थी, ताकि लोगों का इम्तिहान हो सके। अल्लाह तआला ने यह बताया कि शैतान का यह काम बेहूदा नहीं था, बल्कि उसके पीछे अल्लाह की एक गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) छिपी थी — और वह है लोगों की परीक्षा।
अल्लाह ने शैतान के इस काम को उन लोगों के लिए आज़माइश बनाया जिनके दिलों में बीमारी है — यानी मुनाफ़िक़ (दोहरे चरित्र वाले) और वे लोग जिनके दिलों में शक और संदेह है। वे जब यह सुनते हैं तो ठोकर खाते हैं और भटक जाते हैं। इसी तरह, यह उन मुशरिकों के लिए भी परीक्षा है जिनके दिल सख्त हो गए हैं — वे सत्य को सुनकर भी उसे कबूल नहीं करते, क्योंकि उनके दिल पत्थर जैसे सख्त हो चुके हैं।
जब ये लोग शैतान की डाली हुई बात सुनते हैं, तो वे झट से उसे पकड़ लेते हैं और सोचते हैं कि यह रसूल ﷺ की अपनी बात है। इस तरह वे खुद को और दूसरों को गुमराह करते हैं। यही उनकी परीक्षा है — क्या वे सच्चाई को पहचानेंगे या शैतान के जाल में फंसे रहेंगे?
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि ये ज़ालिम (अत्याचारी) लोग — चाहे वे मुनाफ़िक़ हों या मुशरिक — अल्लाह और उसके रसूल की सख्त दुश्मनी में लगे हुए हैं। वे सत्य से इतने दूर हो गए हैं कि उनका विरोध और हठधर्मिता हद से बढ़ चुकी है। उनका यह रवैया उन्हें सीधे रास्ते से और दूर ले जाता है।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में आने वाली हर मुश्किल और परीक्षा अल्लाह की ओर से होती है — वह देखना चाहता है कि कौन सच्चे दिल से उस पर भरोसा करता है और कौन शैतान के बहकावे में आकर भटक जाता है। जिनके दिल साफ और अल्लाह की याद से भरे होते हैं, वे हर परीक्षा में کامیاب होते हैं। लेकिन जिनके दिलों में शक, हठ और अहंकार होता है, वे हर मोड़ पर ठोकर खाते हैं।
यह आयत हमें दिल की सफाई की अहमियत सिखाती है — कि हम अपने दिलों को शक, हसद और अहंकार से पाक रखें, ताकि जब सत्य हमारे सामने आए तो हम उसे कबूल कर सकें। अल्लाह से दुआ है कि वह हमारे दिलों को ईमान की रौशनी से मुनव्वर करे और हमें शैतान के वसवसों से महफूज़ रखे। आमीन।
📜 आयत 51-55 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 53
सूरा अल-हज आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और शैतान जो (वसवसा) डालता (भी) है तो इसलिए ताकि…सूरा आयत 53/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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