अल-हज · 51/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَالَّذِينَ سَعَوْا فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ ۝٥١
Wallazeena sa`aw feee Aayaatinaa mu`aajizeena ulaaa ika As-haabul jaheem
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों (के झुठलाने में हमारे) आजिज़ करने के वास्ते कोशिश की यही लोग तो जहन्नुमी हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَعَوْا (सअव) – प्रयास किया, दौड़-धूप की, कोशिश की।
  • آيَاتِنَا (आयातिना) – हमारी आयतें, यानी क़ुरआन की आयतें और अल्लाह के प्रमाण।
  • مُعَاجِزِينَ (मुआजिज़ीन) – यानी अल्लाह को हराने या उससे बच निकलने की कोशिश करने वाले, उसकी शक्ति को चुनौती देने वाले। यह उन लोगों के लिए है जो सोचते हैं कि वे अल्लाह की पकड़ से बच जाएँगे और उसे विवश कर देंगे।
  • أَصْحَابُ الْجَحِيمِ (अस्हाबुल जहीम) – जहन्नम (नरक) के साथी, यानी उसमें हमेशा रहने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाने और उन्हें बेकार करने के लिए पूरी कोशिश करते हैं। वे न केवल इनकार करते हैं, बल्कि सक्रिय रूप से इस्लाम के खिलाफ साज़िशें रचते हैं, लोगों को सच्चाई से दूर करने की हर संभव कोशिश करते हैं। उनका यह प्रयास इस भ्रम के साथ होता है कि वे अल्लाह को मात दे देंगे या उसकी पकड़ से बच निकलेंगे। वे समझते हैं कि मौत के बाद कोई जीवन नहीं, कोई हिसाब नहीं, और अल्लाह उन्हें पकड़ने की शक्ति नहीं रखता। यह उनकी सबसे बड़ी भूल है।

अल्लाह तआला स्पष्ट करता है कि ऐसे लोगों का अंजाम जहन्नम की आग है। वे उसके साथी बनेंगे, यानी हमेशा के लिए उसमें रहेंगे। जिस तरह एक साथी अपने साथी से अलग नहीं होता, उसी तरह वे जहन्नम से कभी अलग नहीं होंगे। यह उनकी साज़िशों और अल्लाह से लड़ने की कोशिशों का सीधा परिणाम है।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। यह हमें बताती है कि अल्लाह की आयतों के साथ खिलवाड़ करना, उन्हें झुठलाना, या उनके खिलाफ काम करना कितना गंभीर अपराध है। साथ ही, यह हमें यह भी याद दिलाती है कि अल्लाह की शक्ति से बचना असंभव है। चाहे इंसान कितनी भी कोशिश कर ले, वह अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकता।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अल्लाह की आयतों को समझें, उन पर अमल करें, और उन्हें अपने जीवन में उतारें। क़ुरआन हमारे लिए हिदायत है, और जो इसे अपनाएगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। अल्लाह हमें सच्चाई समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 49-53 — अल-हज

49قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّمَا أَنَا لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि लोगों में तो सिर्फ तुमको खुल्लम-खुल्ला (अज़ाब से) डराने वाला हूँ
50فَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
पस जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए (आख़िरत में) उनके लिए बख्शिश है और बेहिश्त की बहुत उम्दा रोज़ी
51وَالَّذِينَ سَعَوْا فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों (के झुठलाने में हमारे) आजिज़ करने के वास्ते कोशिश की यही लोग तो जहन्नुमी हैं
52وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رَّسُولٍ وَلَا نَبِيٍّ إِلَّا إِذَا تَمَنَّىٰ أَلْقَى الشَّيْطَانُ فِي أُمْنِيَّتِهِ فَيَنسَخُ اللَّهُ مَا يُلْقِي الشَّيْطَانُ ثُمَّ يُحْكِمُ اللَّهُ آيَاتِهِ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और (ऐ रसूल) हमने तो तुमसे पहले जब कभी कोई रसूल और नबी भेजा तो ये ज़रूर हुआ कि जिस वक्त उसने (तबलीग़े एहकाम की) आरज़ू की तो शैतान ने उसकी आरज़ू में (लोंगों को बहका कर) ख़लल डाल दिया फिर जो वस वसा शैतान डालता है खुदा उसे बेट देता है फिर अपने एहकाम को मज़बूत करता है और खुदा तो बड़ा वाक़िफकार दाना है
53لِّيَجْعَلَ مَا يُلْقِي الشَّيْطَانُ فِتْنَةً لِّلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَالْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمْ ۗ وَإِنَّ الظَّالِمِينَ لَفِي شِقَاقٍ بَعِيدٍ
और शैतान जो (वसवसा) डालता (भी) है तो इसलिए ताकि खुदा उसे उन लोगों के आज़माइश (का ज़रिया) क़रार दे जिनके दिलों में (कुफ्र का) मर्ज़ है और जिनके दिल सख्त हैं और बेशक (ये) ज़ालिम मुशरेकीन पल्ले दरजे की मुख़ालेफ़त में पड़े हैं
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अनुवाद — अल-हज 51

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Tuesday, August 18, 2026

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