अल-हज · 9/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
ثَانِيَ عِطْفِهِ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۖ لَهُ فِي الدُّنْيَا خِزْيٌ ۖ وَنُذِيقُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَذَابَ الْحَرِيقِ ۝٩
Saaniya `itfihee liyudilla `an sabeelil laahi lahoo fiddun yaa khizyunw wa nuzeequhoo Yawmal Qiyaamati `azaabal lhareeq
📖 हिंदी अर्थ
(ख्वाहमख्वाह) खुदा के बारे में लड़ने मरने पर तैयार है ताकि (लोगों को) ख़ुदा की राह बहका दे ऐसे (नाबकार) के लिए दुनिया में (भी) रूसवाई है और क़यामत के दिन (भी) हम उसे जहन्नुम के अज़ाब (का मज़ा) चखाएँगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثَانِيَ عِطْفِهِ (अपनी गर्दन को मोड़ने वाला) — अर्थात अहंकार और घमंड के कारण अपनी गर्दन को दूसरी ओर मोड़ लेने वाला।
  • خِزْيٌ (अपमान, रुसवाई) — दुनिया में ज़िल्लत और अपमान।
  • عَذَابَ الْحَرِيقِ (जलाने वाला अज़ाब) — आग का अज़ाब जो जलाकर भस्म कर दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफ़िरों के हाल का वर्णन करती है जो अल्लाह के दीन के खिलाफ़ झगड़ते हैं और लोगों को सच्चे रास्ते से भटकाने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोग अपनी गर्दन को अहंकार से मोड़ लेते हैं, यानी वे सच्चाई की तरफ़ देखना भी पसंद नहीं करते। वे घमंड और अकड़ के साथ हक़ से मुँह मोड़ लेते हैं और अपने इसी घमंड के कारण दूसरों को भी अल्लाह के रास्ते से रोकने की कोशिश करते हैं।

ऐसे लोगों के लिए दुनिया में भी रुसवाई और अपमान है — उनकी सच्चाई सामने आ जाएगी, उनके झूठे तर्क बेनक़ाब हो जाएँगे और वे लोगों की नज़रों में ज़लील होंगे। और आख़िरत में उनके लिए सबसे भयानक अज़ाब है — आग का अज़ाब जो उन्हें जला देगा। यह अज़ाब इतना सख्त होगा कि उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

दावती पहलू:

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है — अहंकार और घमंड इंसान को सच्चाई से अंधा कर देता है। जो लोग सच्चाई को जानते हुए भी घमंड के कारण उसे नहीं मानते, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में नुकसान उठाते हैं। इसके विपरीत, जो लोग अपने अहंकार को दबाकर सच्चाई को क़बूल कर लेते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया में इज़्ज़त देता है और आख़िरत में जन्नत की नेमतें अता करता है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिलों से घमंड और अकड़ को निकालें, सच्चाई के आगे झुकें और अल्लाह के दीन की तरफ़ बुलाने वालों की बात को ध्यान से सुनें। याद रखें — जो लोग अल्लाह के रास्ते से दूसरों को रोकते हैं, वे खुद भी रास्ते से भटक जाते हैं और दूसरों को भी भटकाते हैं। लेकिन जो लोग अल्लाह की तरफ़ बुलाते हैं, उनके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में भलाई है। अल्लाह हमें सच्चाई को क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे और हमें अहंकार और घमंड से बचाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अल-हज

7وَأَنَّ السَّاعَةَ آتِيَةٌ لَّا رَيْبَ فِيهَا وَأَنَّ اللَّهَ يَبْعَثُ مَن فِي الْقُبُورِ
और क़यामत यक़ीनन आने वाली है इसमें कोई शक नहीं और बेशक जो लोग क़ब्रों में हैं उनको खुदा दोबारा ज़िन्दा करेगा
8وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَابٍ مُّنِيرٍ
और लोगों में से कुछ ऐसे भी है जो बेजाने बूझे बे हिदायत पाए बगैर रौशन किताब के (जो उसे राह बताए) खुदा की आयतों से मुँह मोडे
9ثَانِيَ عِطْفِهِ لِيُضِلَّ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۖ لَهُ فِي الدُّنْيَا خِزْيٌ ۖ وَنُذِيقُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَذَابَ الْحَرِيقِ
(ख्वाहमख्वाह) खुदा के बारे में लड़ने मरने पर तैयार है ताकि (लोगों को) ख़ुदा की राह बहका दे ऐसे (नाबकार) के लिए दुनिया में (भी) रूसवाई है और क़यामत के दिन (भी) हम उसे जहन्नुम के अज़ाब (का मज़ा) चखाएँगे
10ذَٰلِكَ بِمَا قَدَّمَتْ يَدَاكَ وَأَنَّ اللَّهَ لَيْسَ بِظَلَّامٍ لِّلْعَبِيدِ
और उस वक्त उससे कहा जाएगा कि ये उन आमाल की सज़ा है जो तेरे हाथों ने पहले से किए हैं और बेशक खुदा बन्दों पर हरगिज़ जुल्म नहीं करता
11وَمِنَ النَّاسِ مَن يَعْبُدُ اللَّهَ عَلَىٰ حَرْفٍ ۖ فَإِنْ أَصَابَهُ خَيْرٌ اطْمَأَنَّ بِهِ ۖ وَإِنْ أَصَابَتْهُ فِتْنَةٌ انقَلَبَ عَلَىٰ وَجْهِهِ خَسِرَ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْخُسْرَانُ الْمُبِينُ
और लोगों में से कुछ ऐसे भी हैं जो एक किनारे पर (खड़े होकर) खुदा की इबादत करता है तो अगर उसको कोई फायदा पहुँच गया तो उसकी वजह से मुतमईन हो गया और अगर कहीं उस कोई मुसीबत छू भी गयी तो (फौरन) मुँह फेर के (कुफ़्र की तरफ़) पलट पड़ा उसने दुनिया और आखेरत (दोनों) का घाटा उठाया यही तो सरीही घाटा है
अल-हजकुरान सूची
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मदनीRevelation
9आयत

अनुवाद — अल-हज 9

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Tuesday, August 18, 2026

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